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बचपन से बुढ़ापे तक, महिलाओं को किन जरूरी हेल्थ चेकअप्स कराने की दी जाती है सलाह? जानिये

Health Checkups for Women: CDC के मुताबिक 21 से 65 साल की आयुवर्ग में आने वाली महिलाओं को नियमित अंतराल पर पैप स्मीयर्स टेस्ट कराना चाहिए

women health, health checkups, pap smears test, hpv test, mammogram, breast cancerकिशोरावस्था में प्रवेश करने के साथ ही युवतियां वार्षिक हेल्थ स्क्रीनिंग के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास जरूर जाएं

Women’s Health: स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं को जो बढ़ती उम्र में बीमारियां अपनी चपेट में लेती है, उनपर अगर समय रहते ध्यान दिया जाए तो 70 प्रतिशत तक टाला जाता है। उनके अनुसार भारत में प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पर महिलाएं ध्यान नहीं देती हैं। वहीं, अगर नियमित रूप से औरतें अपना हेल्थ चेकअप्स करवाती हैं तो सेहत बेहतर रह सकती है। जांच करवाने से किसी भी बीमारी, अंदरुनी चोट के बारे में पता लगाया जा सकता है। CDC के मुताबिक पुरुषों की तुलना में महिलाओं को क्रॉनिक बीमारियों का खतरा अधिक होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि महिलाओं को कम उम्र से ही किन हेल्थ चेकअप्स कराने की सलाह दी जाती है।

11 से 12 वर्ष में – 11 से 12 वर्ष की उम्र में लड़कियों को ह्युमन पैपिलोमावायरस (HPV) वैक्सिनेशन लगाने की सलाह दी जाती है। बता दें कि आगे चलकर इस वायरस के कारण महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर जैसे गंभी र बीमारियां हो सकती हैं।

20 साल की उम्र में – किशोरावस्था में प्रवेश करने के साथ ही युवतियां वार्षिक हेल्थ स्क्रीनिंग के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास जरूर जाएं। अगर किसी के स्तनों में गांठ, यूटेरस से अनियंत्रित ब्लीडिंग या फिर प्राइवेट पार्ट्स में दर्द महसूस होने पर डॉक्टर से जरूर मिलें। इसके अलावा, गाइंकोलोजिस्ट अनचाही प्रेग्नेंसी, फर्टिलिटी, माहवारी संबंधी दिक्कतों के बारे में भी बताती हैं।

21 से 29 वर्ष की महिलाएं – CDC के मुताबिक 21 से 65 साल की आयुवर्ग में आने वाली महिलाओं को नियमित अंतराल पर पैप स्मीयर्स टेस्ट कराना चाहिए। हालांकि, इससे कम और ज्यादा उम्र की महिलाओं को ये टेस्ट कराने से बचना चाहिए।

30 साल में – इस उम्र की महिलाओं को भी HPV टेस्ट कराना चाहिए। अगर HPV रिपोर्ट्स नॉर्मल हैं तो हर 5 साल में पैप स्मीयर्स टेस्ट कराना चाहिए।

40 साल में – महिलाएं जो 40 वर्ष की हो चुकी हैं उन्हें मैमोग्राम कराने की सलाह दी जाती है। ये ब्रेस्ट का एक्स-रे होता है जिससे स्तन कैंसर का पता लगाया जा सकता है। शुरुआती चरणों में ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाने में ये जांच कारगर साबित होती है। हालांकि, माहवारी के सप्ताह भर के बाद ही मैमोग्राम कराना चाहिए। साथ ही, पर्फ्यूम या इत्र लगाकर न जाएं।

45 से 50 आयु वर्ग की महिलाएं – इस उम्र की महिलाओं को अगर लगातार दस्त, कब्ज़ या फिर मल में खून आने की शिकायत होती है तो उन्हें कोलन कैंसर से जुड़े टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। डॉक्टर्स इन परेशानियों को कोलन कैंसर के लक्षण मानते हैं।

65 व अधिक उम्र में – ये समय आते-आते हड्डियां कमज़ोर हो जाती हैं, ऐसे में डॉक्टर्स से पूछकर कैल्शियम सप्लीमेंट्स लेने चाहिए। इस उम्र में ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, दांत संबंधी परेशानियों के लिए भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह लेनी चाहिए।

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