तनाव मौजूदा दौर में तेजी से उभरने वाली मानसिक बीमारी बन रहा है। तनाव के लिए हमारी जिंदगी की मसरूफियत, अभाव, बढ़ती जिम्मेदारियां, तंगी और बिगड़ती सेहत को जिम्मेदार माना जाता है। ये तनाव न सिर्फ शारीरिक सेहत को बिगाड़ता है बल्कि हमारी मानसिक तंदुरुस्ती को भी खत्म करता रहता है। 2026 में हेल्थ एंजायटी (Health Anxiety) का बढ़ना सिर्फ एक मानसिक समस्या नहीं, बल्कि ये एक आधुनिक डिजिटल महामारी बनती जा रही है। बजट 2026 में सरकार ने इसी बढ़ते मानसिक तनाव को देखते हुए मानसिक सेहत में सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं।

तनाव, डिप्रेशन, एंग्जायटी, नशे की लत और ट्रॉमा जैसी समस्याएं आज तेजी से लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रही हैं लेकिन इन मानसिक रोगों के इलाज के लिए खास संस्थाओं और रिसर्च सेंटर की कमी है। इसी कमी को दूर करने के लिए यूनियन बजट 2026-27 में सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को स्ट्रांग बनाने के लिए  मेंटल हेल्थ इंस्टीट्यूट को स्थापित करने की योजना बनाई है। देश में एडवांस मेंटल हेल्थ और न्यूरोसाइंस संस्थानों की भारी कमी रही है जिस पर सरकार ने काम करने की योजना बनाई है।

मानसिक सेहत पर बात करना टैबू या जरूरत

आज लोगों में हेल्थ एंजायटी तेजी से बढ़ रही है, ये कोई कमजोरी नहीं, बल्कि एक मेडिकल स्थिति है। बजट 2026 में इसके लिए विशेष प्रावधान बताते हैं कि अब मानसिक सेहत पर बात करना ‘टैबू’ नहीं, बल्कि जरूरत है। सरकार का लक्ष्य अब केवल बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि मानसिक सेहत को मजबूत करना और मानसिक बीमारियों से बचाव करना है।

हेल्थ एंजायटी क्या है?

एंग्जायटी और कॉन्फिडेंस कोच ललित तनेजा ने बताया अगर आप भी हर छोटी से बड़ी परेशानी को लेकर डर जाते हैं या उसके बारे में जरूरत से ज्यादा सोचने लगते हैं, राई का पहाड़ बना लेते हैं तो ये हेल्थ एंजायटी है। शरीर में कुछ भी हो और दिमाग उसके लिए बुरा से बुरा सोचने लगे तो ये एंजायटी है। जो लोग हेल्थ एंजाइटी की चपेट में आते हैं वो सिर्फ अपनी सेहत को लेकर ही नहीं डरते बल्कि वो दूसरों की सेहत को लेकर भी चिंतित रहते हैं। ऐसे लोग किसी को दर्द से कराहते हुए देख लें या सुन लें तो वो तुरंत उस स्थिति को खुद पर महसूस करने लगते हैं। ये स्थिति दिमाग की एक सिचवेशन है जहां दिमाग हर स्थिति को डेंजर समझने लगता है।

अगर आपका शरीर थका हुआ महसूस करता है, लेकिन दिमाग शांत नहीं हो पा रहा तो यह कमजोरी नहीं है,  यह इस बात का संकेत है कि आपका नर्वस सिस्टम अभी भी सर्वाइवल मोड में फंसा हुआ है। एंग्जायटी सिर्फ  दिमाग में नहीं होती,  ये सीने, सांस, पेट, मांसपेशियों और नींद पर भी असर डालती है। जब आप अपने शरीर को सुरक्षा का एहसास सिखाते हैं तो ये लक्षण धीरे-धीरे अपनी पकड़ खोने लगते हैं। आइए जानते हैं कि हेल्थ एंजायटी का इलाज कैसे करें।

CBT थेरेपी सबसे ज्यादा है असरदार

Cognitive Behavioral Therapy हेल्थ एंग्जायटी का गोल्ड स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट है। इस इलाज के जरिए नेगेटिव सोच को पहचानना सिखाया जाता है। ये इलाज सबसे बुरा होगा वाली सोच को तोड़ना सिखाता है।  रिसर्च के अनुसार CBT से 60–80% लोगों में स्पष्ट सुधार होता है।

नर्वस सिस्टम को शांत करना 

हेल्थ एंग्जायटी सिर्फ दिमाग की नहीं, नर्वस सिस्टम की समस्या भी होती है। इसे ठीक करने के लिए 4-7-8 ब्रीदिंग, धीमी वॉक, योग, प्राणायाम किया जाता है। बॉडी स्कैन मेडिटेशन से मदद मिलती है। जब शरीर को सुरक्षा मिलती है डर खुद कम होने लगता है।

गूगलिंग और बार-बार चेक करना बंद करें

हेल्थ एंजायटी से बचना चाहते हैं तो गूगल को बार-बार चेक करना बंद करें। लक्षण बार-बार सर्च करना, पल्स, BP, हार्टबीट बार-बार चेक करना,ये आदतें एंग्जायटी को 10 गुना बढ़ा देती हैं। धीरे-धीरे इन पर कंट्रोल करना इलाज का जरूरी हिस्सा है।

जरूरत पड़ने पर दवाएं जरूर लें

अगर एंग्जायटी बहुत ज्यादा है तो डॉक्टर से दवाएं ले सकते हैं। कुछ समय के लिए एंग्जायटी-रिलीफ मेडिसिन आराम दे सकती है। दवा सिर्फ साइकियाट्रिस्ट की सलाह से लें।

लाइफस्टाइल में बदलाव करें

लाइफस्टाइल में बदलाव करके आप इस बीमारी को कंट्रोल कर सकते हैं। आप 7–8 घंटे की नींद लें। कैफीन, निकोटीन का सेवन कम करें।  रोज़ हल्की एक्सरसाइज करें।  अकेले नहीं रहें और खुद से बात करने का तरीका बदलें। मुझे कुछ गंभीर बीमारी है ये सोचना बंद कर दें। ये छोटा बदलाव बहुत बड़ा असर करता है।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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