भयंकर गर्मी के मौसम में अक्सर हमारा पाचन तंत्र (Digestion System) कमजोर होने लगता है, जिससे गैस, अपच और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में पेट को ठंडक पहुंचाने और पाचन को बेहतर करने के लिए सबसे पहला नाम पपीते का आता है। कई लोग इसे पेट के लिए किसी दवा से कम नहीं मानते। आयुर्वेद में पपीते को गुणों की खान माना जाता है। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक रोजाना 100 ग्राम पपीता खाली पेट खाया जाए तो पेट से लेकर आंतों तक में जमा गंदा मल आसानी से बाहर निकल जाता है। जिन लोगों का पाचन खराब रहता है और पेट में गैस बनती है ऐसे लोग पपीते का सेवन करें तो फायदा होता है। आइए रिसर्च से भी जान लेते हैं कि पपीता कैसे बाउल मूवमेंट को दुरुस्त करता है और पाचन में सुधार करता है।
पपीता कैसे बाउल मूवमेंट को रखता है दुरुस्त
पपीता हमारे पाचन तंत्र और बाउल मूवमेंट को दुरुस्त करने के लिए मेडिकल साइंस में एक बेहद असरदार प्राकृतिक उपाय माना जाता है। जब भोजन सही तरीके से नहीं पचता या आंतों की गति धीमी हो जाती है, तो कब्ज और अपच की समस्या होती है।आधुनिक गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के क्लिनिकल ट्रायल्स के अनुसार, पपीता मुख्य रूप से तीन वैज्ञानिक तरीकों से हमारे बाउल मूवमेंट को रेगुलेट और ट्रैक पर लाता है।
Medical News Today और कई हेल्थ पत्रिकाओं के मुताबिक पपीते में फाइबर और पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है। पपीते का सेवन मल को सॉफ्ट करता है और आंतों की गतिशीलता को बढ़ाता है। पपीते में पेपेन एंजाइम और काइमो पेपेन (Chymopapain) नामक प्रोटियोलिटिक एंजाइम पाए जाते हैं। Neuroendocrinology Letters में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक जब हम भारी प्रोटीन जैसे मीट, दालें, या डेयरी उत्पाद खाते हैं, तो पेट को उन्हें पचाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। पेपेन एंजाइम इन जटिल प्रोटीनों को पेट में ही बहुत तेजी से अमीनो एसिड में तोड़ देता है। इससे आधा पचा भोजन आंतों में नहीं सड़ता और गैस, ब्लोटिंग और एसिडिटी तुरंत कम होती है। इसका सेवन करने से मल का आगे बढ़ना आसान हो जाता है।
आंतों की गति बढ़ाता है पपीता
आंतों के सुचारू रूप से सिकुड़ने और फैलने की प्रक्रिया को पेरीस्टाल्सिस कहते हैं, इसी से मल बाहर निकलता है। Journal of Medicinal Food की एक रिपोर्ट के मुताबिक पपीते में घुलनशील फाइबर और पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है। यह कॉम्बिनेशन आंतों में जाकर स्पंज की तरह काम करता है। यह मल में पानी को रोककर रखता है, जिससे सूखा और कड़ा मल Soft हो जाता है। फाइबर आंतों की दीवारों पर हल्का दबाव बनाता है, जिससे पेरीस्टाल्सिस गति तेज होती है और बाउल मूवमेंट नेचुरल तरीके से दुरुस्त होता है।
कब्ज और इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम में है असरदार
क्रोनिक कब्ज और इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम (IBS) से पीड़ित लोगों के गट बैरियर में हल्की सूजन आ जाती है। U.S. National Institutes of Health (NIH) के तहत दर्ज क्लिनिकल ट्रायल्स में देखा गया कि जिन मरीजों को नियमित रूप से पपीते का अर्क या पका हुआ पपीता दिया गया, उनके पेट साफ होने की आवृत्ति (Bowel Frequency) में अप्रत्याशित सुधार हुआ। पपीते के एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे विटामिन-सी और बीटा-कैरोटीन आंतों की अंदरूनी परत की सूजन को शांत करते हैं, जिससे पाचन दुरुस्त रहता है।
गर्मी में पपीते का सेवन कब करना चाहिए?
आयुर्वेद में भोजन को केवल पोषण नहीं, बल्कि एक ‘औषधि’ माना गया है। आयुर्वेद के मुताबिक हर खाने का एक निश्चित टाइम होता है।पपीते की तासीर गर्म होती है और इसका रस पचने के बाद तीखा हो जाता है। गर्मियों में शरीर में पहले से ही ‘पित्त दोष’ बढ़ा हुआ होता है, इसलिए गर्मी के मौसम में गर्म तासीर वाले पपीते को खाने के लिए आयुर्वेद कुछ खास नियम और सही तरीकों की वकालत करता है।
गर्मियों में पपीता खाने का सबसे सही समय सुबह 9 बजे से साढ़े 11 बजे के बीच होता है। इस समय हमारे शरीर की पाचन अग्नि सक्रिय होने लगती है। जिन लोगों को कब्ज या पेट की खराबी की परेशानी है वो गर्मियों में सुबह उठने के बाद गुनगुना पानी पीने के आधे घंटे बाद सीमित मात्रा में पपीते का सेवन करें। ध्यान रखें कि गर्मियों में इसे देर शाम या रात के समय खाने से पूरी तरह बचें, क्योंकि रात में कफ की प्रवृत्ति होती है और पपीते के गुण रात में पाचन को धीमा कर पेट में भारीपन पैदा कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी आयुर्वेदिक सिद्धांतों, सामान्य न्यूट्रिशन गाइडलाइंस और विशेषज्ञों के अध्ययनों पर आधारित है। पपीता पाचन के लिए एक बेहतरीन फल है, लेकिन ध्यान रखें कि गर्भवती महिलाओं को इसके सेवन से पूरी तरह बचना चाहिए या डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। किसी भी गंभीर पेट रोग या डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले किसी प्रमाणित आयुर्वेदिक चिकित्सक या क्लीनिकल डायटीशियन से परामर्श जरूर लें।
