गर्मी में बॉडी को हाइड्रेट और ठंडा रखने के लिए ठंडी तासीर वाली चीजों का सेवन असरदार साबित होता है। बेल गर्मी का एक ऐसा फल है जिसका सेवन लोग गर्मी में उसका जूस बनाकर और गूदे के रूप में करते हैं। बेल एक औषधीय पौधा है जिसके कच्चे फल, जड़ और तना का सेवन कई तरह की बीमारियों का इलाज करने में किया जाता रहा है। गर्मी में ठंडी तासीर की बेल का सेवन कई बीमारियों जैसे कब्ज,दस्त और पाचन से जुड़ी बीमारियों का इलाज करने में किया जाता रहा है।बेल में मौजूद पोषक तत्वों की बात करें तो इसमें टैनिन, फ्लेवोनोइड्स और कौमारिन नामक रसायन पाए जाते हैं जो सूजन को कंट्रोल करते हैं। डिप्रेशन, याददाश्त और अस्थमा के मरीजों के लिए भी ये फल बेहद असरदार साबित होता है। अब सवाल ये उठता है कि आखिर ये फल डायबिटीज मरीज खा सकते हैं?
डिस्क्लेमर :यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है।
क्या डायबिटीज मरीज बेल का सेवन कर सकते हैं?
डायबिटीज केयर एंड एजुकेशन स्पेशलिस्ट फिटनेस न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स डॉक्टर अनुपम घोष के अनुसार, बेल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) लो कैटेगरी में माना जाता है, हालांकि इस पर सीमित रिसर्च मौजूद है। एक्सपर्ट ने बताया बेल का GI करीब 50 के आसपास हो सकता है, जो इसे डायबिटीज मरीजों के लिए पूरी तरह खतरनाक नहीं बनाता। डायबिटीज मरीज इस फल का गर्मी में सेवन कर सकते हैं। webmd के मुताबिक बेल का सेवन डायबिटीज मरीज भी कर सकते हैं। अगर डायबिटीज मरीज ब्लड शुगर कंट्रोल करने की दवाओं का सेवन कर रहे हैं साथ ही बेल को फल के रूप में खा रहे हैं तो उनका ब्लड शुगर काफी तेजी से नीचे गिर सकता है। ऐसे में डायबिटीज मरीजों को काफी निगरानी की और दवाओं के डोज में बदलाव करने की जरूरत होती है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि डायबिटीज मरीज रोजाना बेल का सेवन कर सकते हैं या नहीं?बेल खाने से सेहत को कौन-कौन से फायदे होते हैं।
डायबिटीज मरीज बेल का सेवन जूस के रूप में करें या फल खाएं?
एक्सपर्ट ने बताया कि डायबिटीज मरीजों के लिए केवल ग्लाइसेमिक इंडेक्स के आधार पर किसी भी फूड को सुरक्षित नहीं माना जा सकता। बेल में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होती है। 100 ग्राम बेल में लगभग 31 ग्राम कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है, जिससे इसका ग्लाइसेमिक लोड (GL) करीब 15 तक पहुंच सकता है। यह स्तर मध्यम से हाई माना जाता है और ब्लड शुगर को बढ़ा सकता है।
एक्सपर्ट के मुताबिक डायबिटीज मरीज अगर बेल का सेवन जूस के रूप में करते हैं तो उसमें फाइबर काफी हद तक खत्म हो जाता है। फाइबर की कमी के कारण शुगर तेजी से शरीर में अवशोषित होती है, जिससे ब्लड शुगर लेवल अचानक बढ़ सकता है। इसलिए डायबिटीज मरीजों को बेल का जूस पीने से बचना चाहिए। एक्सपर्ट ने बताया डायबिटीज मरीज अगर बेल का सेवन करना चाहते हैं तो उसे जूस की बजाय पूरे फल के रूप में सीमित मात्रा में खाना बेहतर विकल्प माना जाता है। फाइबर की मौजूदगी शुगर के अवशोषण को धीमा करती है, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है। इसके अलावा अगर कोई डायबिटीज मरीज बेल का सेवन करता है तो उसे कार्बोहाइड्रेट काउंटिंग पर ध्यान देना चाहिए। इसके साथ प्रोटीन या हेल्दी फैट का सेवन करना चाहिए। इससे शुगर का स्तर अचानक नहीं बढ़ता।
एक्सपर्ट ने बताया बेल में एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद हैं। ऐसे में पैकेज्ड जूस की तुलना में बेल का सेवन बेहतर विकल्प हो सकता है, लेकिन संतुलन और सही तरीके से। एक्सपर्ट्स डायबिटीज मरीजों को सलाह देते हैं कि अगर संभव हो तो डायबिटीज मरीज बेल का सेवन सीमित करें और ऐसे फलों को प्राथमिकता दें जिनका ग्लाइसेमिक लोड कम हो।
बेल का सेवन करने के सेहत के लिए फायदे
बेल का सेवन पाचन तंत्र के लिए बेहद फायदेमंद है। इसमें भरपूर फाइबर होता है, जो कब्ज, अपच और गैस जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। यह आंतों को साफ करती है और पाचन में सुधार करती है। विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स गुणों से भरपूर ये फल इम्यूनिटी को मजबूत करता है और संक्रमण से बचाव करता है। सीमित मात्रा में बेल का सेवन ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है, खासकर जब इसे जूस की बजाय पूरे फल के रूप में खाया जाए। गर्मियों में बेल का शरबत शरीर को ठंडक पहुंचाता है और हीट स्ट्रोक से बचाने में मदद करता है। बेल में मौजूद पोटैशियम और दूसरे मिनरल्स ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने और दिल के रोगों से बचाव करने में मददगार साबित होता है। यह शरीर से टॉक्सिन निकालने में मदद करता है, जिससे लिवर और किडनी की सेहत बेहतर रहती है। बेल का सेवन स्किन को ग्लोइंग बनाने में भी असरदार साबित होता है।
