इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में सेहत से जुड़ी सलाहों की बाढ़ आई हुई है। भारत में देसी नुस्खों और दादी-नानी के बटुए से निकली सलाहों को अक्सर डॉक्टरी इलाज से ऊपर मान लिया जाता है। लेकिन सेहत के मामले में अधूरी जानकारी जानलेवा साबित हो सकती है। अक्सर सुना जाता है कि बीयर पीने से गुर्दे की पथरी (Kidney Stone) निकल जाती है या पपीता खाने से हर तरह की कब्ज दूर हो जाती है। लेकिन क्या इन दावों के पीछे कोई वैज्ञानिक आधार है या ये केवल सुनी-सुनाई बातें हैं? आज जनसत्ता के इस विशेष हेल्थ चेक में हम विशेषज्ञों और मेडिकल साइंस की मदद से इन 4 प्रचलित हेल्थ मिथकों का पोस्टमॉर्टम करेंगे, ताकि आप अपनी सेहत से जुड़ा कोई भी फैसला तथ्यों के आधार पर ले सकें।
फोर्टिस अस्पताल वसंत कुंज में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में वरिष्ठ सलाहकार डॉ. शुभम वत्स्या से पाचन से जुड़े कुछ मिथक का हमने जवाब मांगा है। आइए जानते हैं कि कौन-कौन से ऐसे मिथक है जो गलत हैं लेकिन हम उसे सही मानकर उनसे इलाज करना चाहते है।
मिथक-1: क्या खाना खाने के बाद पानी पीना चाहिए?
फैक्ट चेक: खाना खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए, यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार यह एक आम मिथक है कि खाने के बाद पानी पीने से पाचन खराब हो जाता है या गैस्ट्रिक जूस पतले हो जाते हैं। असल में हमारा शरीर पाचन की प्रक्रिया को संतुलित तरीके से कंट्रोल करता है। थोड़ी मात्रा में पानी पीने से पाचन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता। बल्कि सीमित मात्रा में पानी भोजन को नरम करने, खाना निगलने में आसानी देने और पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद कर सकता है। खाने के बाद ज्यादा पानी पीना कुछ लोगों में ब्लोटिंग की शिकायत बढ़ा सकता है। इसलिए एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि खाना खाने के तुरंत बाद बहुत ज्यादा पानी न पिएं, बल्कि जरूरत हो तो 1 से 2 गिलास तक पानी ले सकते हैं। अगर किसी को एसिडिटी, अपच या पाचन से जुड़ी परेशानी है तो उसे अपनी स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
मिथक-2: क्या पपीता खाने से पाचन बिल्कुल ठीक हो जाता है?
फैक्ट चेक: पपीता पाचन के लिए फायदेमंद जरूर है, लेकिन यह मान लेना कि पपीता खाने से डायजेशन पूरी तरह ठीक हो जाता है सही नहीं है। पपीते में पपेन (Papain) नामक एंजाइम पाया जाता है, जो प्रोटीन को तोड़ने में मदद करता है। इसी वजह से यह अपच, गैस और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत दे सकता है। साथ ही इसमें फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो आंतों की सेहत सुधारने और मल त्याग को आसान बनाने में मदद करती है। एंटीबायोटिक दवाएं आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को भी प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में पपीता, अपने एंजाइम और फाइबर की वजह से गट हेल्थ को सपोर्ट करता है और रिकवरी में मददगार हो सकता है। अगर किसी को क्रॉनिक गैस्ट्राइटिस, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS), अल्सर या दूसरी गंभीर पाचन समस्या है, तो सिर्फ पपीता खाने से समस्या पूरी तरह ठीक नहीं होगी। ऐसी स्थितियों में संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, नियमित व्यायाम और जरूरत पड़ने पर दवा जरूरी होती है।
मिथक-3: क्या खाने को 32 बार चबाने से ही वह आसानी से पचता है?
फैक्ट चेक: खाना अच्छी तरह चबाकर खाना पाचन के लिए फायदेमंद है, लेकिन हर निवाले को ठीक 32 बार चबाना जरूरी है, यह धारणा गलत है। डॉक्टरों के मुताबिक इंसान गाय-भैंस की तरह जुगाली करने वाला प्राणी नहीं है। पाचन की प्रक्रिया मुंह से शुरू जरूर होती है, जहां लार में मौजूद एंजाइम भोजन को तोड़ना शुरू करते हैं, लेकिन असली पाचन पेट और आंतों में होता है। जरूरी ये है कि आप आराम से, बिना जल्दबाजी के और अच्छी तरह चबाकर खाएं। तय संख्या पर ध्यान देने की बजाय mindful eating ज्यादा जरूरी है।
मिथक-4: क्या किडनी स्टोन बाहर निकालने में बीयर बेस्ट सॉल्यूशन है?
फैक्ट चेक: यह धारणा पूरी तरह गलत है कि बीयर पीने से किडनी स्टोन निकल जाता है। एक्सपर्ट के मुताबिक बीयर में अल्कोहल होता है, जो शरीर में डिहाइड्रेशन बढ़ा सकता है। डिहाइड्रेशन किडनी स्टोन की समस्या को और गंभीर बना सकता है। हालांकि बीयर एक हल्का डाययूरेटिक प्रभाव दिखा सकती है, लेकिन यह सुरक्षित या मेडिकल ट्रीटमेंट का विकल्प नहीं है। किडनी स्टोन में सबसे जरूरी है पर्याप्त मात्रा में सादा पानी पीना, डॉक्टर की सलाह लेना और जरूरत पड़ने पर दवा या इलाज कराना। इसलिए इस तरह के झूठे दावों पर भरोसा न करें।
डिस्क्लेमर:
इस लेख में साझा की गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। अपनी डाइट, एक्सरसाइज या दवाओं में कोई भी बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति के मामले में तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।
