हेयर फॉल होना एक आम समस्या है, लेकिन जब बालों के बीच में अचानक चिकने, गोल पैच बनने लगते हैं तो यह ज्यादा गंभीर संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण Alopecia Areata की ओर इशारा करते हैं। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर के इम्यून सेल्स ही गलती से हेयर फॉलिकल्स पर हमला कर देते हैं, जिससे बाल पैच के रूप में झड़ने लगते हैं। ज्यादातर मामलों में बाल छोटे-छोटे गोल पैच में गिरते हैं, लेकिन कुछ स्थितियों में यह समस्या बढ़कर पूरे सिर (Alopecia Totalis) या पूरे शरीर (Alopecia Universalis) तक भी पहुंच सकती है। यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। कई बार बाल झड़ने से पहले उस जगह पर खुजली, झनझनाहट या हल्की जलन महसूस होती है।
डर्मेटोलॉजिस्ट और स्किनकेयर एक्सपर्ट Dr. Vineet Verma ने बताया एलोपेशिया एरीटा एक ऑटोइम्यून कंडीशन होती है जिसमें हमारे इम्यून सेल्स ही गलती से बालों की जड़ों यानी हेयर फॉलिकल्स पर हमला कर देते हैं। इसी वजह से बाल गोल-गोल पैच में झड़ने लगते हैं। कई मामलों में यह समस्या बढ़कर पूरे स्कैल्प को प्रभावित कर सकती है, जिसे एलोपेसिया टोटलिस कहा जाता है। एक्सपर्ट ने बताया सही ट्रीटमेंट, जैसे क्रीम, ऑइंटमेंट या लोशन के जरिए कुछ महीनों में बाल दोबारा उग सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप किसी डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लें और बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी गलत दवा लगाने से बचें। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि एलोपेशिया एरीटा के लिए कौन-कौन से कारण जिम्मेदार हो सकते हैं और इसका मेडिकल ट्रीटमेंट कैसे होता है, और उसका घर में कैसे इलाज किया जा सकता है।
एलोपेशिया एरीटा के कारण कौन-कौन से हैं?
- अनुवांशिकता या फैमिली हिस्ट्री इस बीमारी के लिए जिम्मेदार हो सकती है।
- दूसरी ऑटोइम्यून बीमारियों से जुड़ाव
- तनाव और पर्यावरणीय कारक भी इस बीमारी के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
एलोपेशिया का मेडिकल ट्रीटमेंट
- एलोपेशिया को मैनेज करने और बालों की दोबारा ग्रोथ बढ़ाने के लिए PRP (प्लेटलेट-रिच प्लाज्मा), मेसोथेरेपी और ग्रोथ फैक्टर कंसंट्रेट जैसी एडवांस थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। बेहतर परिणाम के लिए आमतौर पर कई सेशंस की जरूरत होती है।
- एलोपेशिया का इलाज उसके प्रकार को समझकर किया जाता है।
- इसका इलाज PRP, मेसोथेरेपी, GFC, लेजर थेरेपी से किया जाता है।
- इस परेशानी का इलाज बाल झड़ने की गंभीरता और फैलाव को समझते हुए किया जाता है। डॉक्टर स्टेरॉयड क्रीम, लोशन या मिनॉक्सिडिल जैसी दवाएं दे सकते हैंकुछ मामलों में स्टेरॉयड इंजेक्शन दिए जाते हैं ताकि बालों की ग्रोथ वापस आए।तनाव इस समस्या को बढ़ा सकता है, इसलिए योग, मेडिटेशन जरूरी है।पोषण पर ध्यान देना जरूरी है। डाइट में प्रोटीन, आयरन, बायोटिन और विटामिन से भरपूर फूड्स खाएं।
एलोपेशिया का घरेलू इलाज
एलोपेशिया का इलाज करने में प्याज का रस एक पारंपरिक और असरदार उपाय माना जाता है। प्याज में सल्फर भरपूर मात्रा में होता है, जो बालों के लिए एक जरूरी बिल्डिंग ब्लॉक की तरह काम करता है। यह कोलेजन के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है और स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है। जब स्कैल्प में रक्त प्रवाह सही तरीके से होता है तो हेयर फॉलिकल्स तक ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व बेहतर तरीके से पहुंचते हैं जो इन पैची एरिया को दोबारा एक्टिव करने के लिए जरूरी वेक-अप कॉल साबित होता है।
प्याज का रस कैसे एलोपेशिया का इलाज करता है रिसर्च से समझें
Journal of Dermatology (2002) में प्रकाशित एक रिसर्च के चौंकाने वाले परिणाम देखने को मिले। रिसर्च में शोधकर्ताओं ने एलोपेशिया एरीटा से जूझ रहे मरीजों को दो समूहों में बांटा। एक समूह ने दिन में दो बार कच्चे प्याज का रस स्कैल्प पर लगाया, जबकि दूसरे समूह ने सादा पानी इस्तेमाल किया। शोधकर्ताओं ने पाया 2 हफ्तों के अंदर ही प्याज का रस लगाने वालों में बाल दोबारा उगना शुरू हो गए थे। रिसर्च के मुताबिक 4 हफ्तों के बाद 73.9% मरीजों में बाल वापस आ गए, और 8 सप्ताह के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 86.9% हो गया। पुरुषों में इसका परिणाम महिलाओं की तुलना में थोड़ा बेहतर देखा गया।
प्याज का रस कैसे तैयार करें
एक लाल प्याज को कद्दूकस करें या ब्लेंड करें और एक साफ कपड़े की मदद से उसका रस निकाल लें। कॉटन बॉल की मदद से इस रस को बाल झड़ने वाले पैच पर लगाएं और 20–30 मिनट तक छोड़ दें। बाद में हल्के और खुशबूदार शैम्पू से बालों को वॉश करें, ताकि प्याज की गंध बनी न रहे। इस रस का इस्तेमाल हफ्ते में 2–3 बार करें। अगर आप नियमित रूप से इसे अपनाते हैं, तो इसके परिणाम काफी अच्छे हो सकते हैं।
डिस्क्लेमर:
यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शिक्षा के उद्देश्य से दी गई है। Alopecia Areata या किसी भी प्रकार की हेयर लॉस समस्या के लिए किसी भी इलाज या घरेलू उपाय को अपनाने से पहले योग्य डॉक्टर या डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह जरूर लें। बिना विशेषज्ञ की सलाह के दवाओं या उपचार का उपयोग करना हानिकारक हो सकता है। घरेलू नुस्खे हर किसी पर समान रूप से प्रभावी नहीं होते और यह मेडिकल ट्रीटमेंट का विकल्प नहीं हैं।
