जब भी आप ब्लड शुगर की जांच के लिए HbA1c टेस्ट कराते हैं तो ये टेस्ट बीते 2 से 3 महीनों का औसत शुगर लेवल बताता है। सही जानकारी के अभाव में कई लोग अपनी रिपोर्ट समझ नहीं पाते, जिससे इलाज या लाइफस्टाइल में बदलाव करने में देरी हो जाती है। बात करें HbA1c की नॉर्मल रेंज की तो HbA1c 5.7% से कम हो तो शरीर में शुगर का स्तर पूरी तरह कंट्रोल है। अगर HbA1c रिपोर्ट 5.7% से 6.4% तक है तो यह चेतावनी का स्तर है जो आपके प्री-डायबिटीज (Pre-diabetes) होने का संकेत देता है। इस स्थिति में बिना दवा केवल लाइफस्टाइल में सुधार के डायबिटीज से बचा जा सकता है। अगर HbA1c 6.5% या उससे अधिक है तो ये स्थिति डायबिटीज की श्रेणी में आती है। इस स्थिति में डॉक्टर की सलाह और नियमित इलाज की जरूरत होती है।
HbA1c 10.6% होना कितना खतरनाक?
HbA1c 10.6% होना सेहत के लिए खतरा हो सकता है। इस स्थिति में अगर ब्लड शुगर को नॉर्मल नहीं रखा जाए तो ये किडनी, आंखें और दिल को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। वहीं अगर शुगर लेवल बहुत कम हो जाए तो इस स्थिति को हाइपोग्लाइसीमिया कहा जाता है जिसमें मरीज को चक्कर आना, बेहोशी या दूसरी आपातकालीन समस्याएं हो सकती हैं। Nanavati Max Super Speciality Hospital में Consultant Diabetologist के रूप में भी जुड़े डायबिटीज और मोटापे के एक्सपर्ट डॉ. राजीव कोविल के अनुसार, HbA1c का 10.6% होना काफी ज्यादा है और यह डायबिटीज को खराब तरीके से हैंडल करने का नतीजा है। यह पिछले दो से तीन महीनों के दौरान औसत लगभग 258 mg/dL ब्लड ग्लूकोज के बराबर होता है।
डॉक्टर राजीव ने बताया हालांकि, HbA1c पूरी तस्वीर नहीं बताता। यह शरीर में ग्लूकोज के औसत स्तर की जानकारी देता है, लेकिन इससे यह पता नहीं चलता कि हाई ब्लड शुगर ने शरीर के दूसरे अंगों को कितना प्रभावित किया है। व्यक्ति को कितने समय से डायबिटीज है, यह भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बीमारी जितने लंबे समय तक रहती है, जटिलताओं का जोखिम उतना बढ़ सकता है। डॉ. कोविल के मुताबिक, इस स्तर पर अगली HbA1c जांच तक केवल इंतजार करना पर्याप्त नहीं है। डॉक्टर को फास्टिंग और खाने के बाद का ब्लड शुगर, वर्तमान दवाएं और उन्हें नियमित रूप से लेने की स्थिति, खान-पान, वजन, शारीरिक गतिविधि, नींद और दूसरे कारणों की समीक्षा करनी चाहिए।
डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए दवाओं के साथ डाइट में करें बदलाव
डॉ. कोविल कहते हैं दवा और लाइफस्टाइल एक-दूसरे की सहयोगी हैं, विकल्प नहीं। सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि आप कब और क्या खाते हैं, खासकर शाम के समय। रात का खाना जल्दी और हल्का रखने, देर रात कैलोरी लेने से बचने और पर्याप्त एवं नियमित नींद लेने से मेटाबॉलिक कंट्रोल बेहतर करने में मदद मिल सकती है। डायबिटीज में स्थिति को कंट्रोल करने के लिए आप अपनी डाइट में प्रोटीन, सब्जियों और फाइबर को शामिल करें। वहीं रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, मीठे ड्रिंक और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन कम करें। डॉक्टर केविल ने बताया अगर आप ब्लड शुगर कंट्रोल करना चाहते हैं तो सबसे पहले कार्ब-लास्ट रणनीति को अपनाएं। यानी भोजन में पहले सब्जियां, फाइबर और प्रोटीन लें और कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें बाद में खाएं।
एक्सरसाइज भी है जरूरी
डायबिटीज मैनेजमेंट में नियमित एक्सरसाइज को शामिल करना जरूरी है। एरोबिक एक्सरसाइज के साथ रेजिस्टेंस ट्रेनिंग फिटनेस सुधारने और मांसपेशियों को बनाए रखने तथा बढ़ाने में मदद कर सकती है। अगर आप चाहते हैं कि ब्लड शुगर नॉर्मल रहे तो आप खाने के बाद 10-15 मिनट की वॉक जरूर करें। खाने के बाद वॉक पोस्ट मील शुगर में होने वाली अचानक बढ़ोतरी को कम करने में मदद कर सकती है। अगर किसी व्यक्ति का वजन ज्यादा है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार वजन कम करना, तनाव को कंट्रोल करना और नियमित नींद लेना भी मेटाबॉलिक हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
HbA1c कम करने का नेचुरल तरीका क्या है?
HbA1c कम करने का नेचुरल तरीके से मतलब वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित लाइफस्टाइल में बदलाव होना चाहिए, न कि डायबिटीज की दवा की जगह जड़ी-बूटी या सप्लीमेंट लेना। डॉ. कोविल के अनुसार सबसे प्रभावी नेचुरल उपाय है पेट की अतिरिक्त चर्बी कम करना, मांसपेशियों की ताकत और फिटनेस बढ़ाना, कम से कम प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ खाना, डाइट में फाइबर बढ़ाना, बेहतर गुणवत्ता वाले कार्बोहाइड्रेट चुनना, पर्याप्त प्रोटीन लेना, नियमित एक्सरसाइज और अच्छी नींद लेना जरूरी हैं। डाइट से जुड़ी कुछ आदतों में बदलाव करके भी आप ब्लड शुगर के स्तर को नॉर्मल रख सकते हैं।
रेसिस्टेंट स्टार्च भोजन के बाद ब्लड ग्लूकोज बढ़ने को कम करने में मदद कर सकता है। यह चावल या आलू जैसे खाद्य पदार्थों को उचित तरीके से ठंडा करके और दोबारा गर्म करने पर कुछ मात्रा में बन सकता है। हालांकि, इसे संतुलित डाइट का हिस्सा बनाकर ही लेना चाहिए। भोजन को जो क्रम बताया है उसे अपनाकर, पोर्शन कंट्रोल कर और खाने के बाद कुछ देर टहलकर आप ब्लड में शुगर के स्तर को कंट्रोल कर सकते हैं। लेकिन अगर HbA1c 10.6% है, तो केवल लाइफस्टाइल में बदलाव पर्याप्त नहीं हो सकते। डॉ. कोविल के अनुसार, डॉक्टर को दवाओं की समीक्षा करनी पड़ सकती है और जरूरत होने पर उपचार को और प्रभावी बनाया जा सकता है।
HbA1c 10.6% है तो नेचुरल इलाज को लेकर रहें सावधान
डॉ. कोविल ने बताया ऐसी कोई जड़ी-बूटी, जूस या सप्लीमेंट नहीं है जो डायबिटीज उपचार की जगह ले सके। इसलिए HbA1c बहुत ज्यादा होने पर डॉक्टर की सलाह के बिना डायबिटीज की दवा बंद करना या उसकी जगह किसी घरेलू नुस्खे, हर्बल प्रोडक्ट या सप्लीमेंट का इस्तेमाल करना सही नहीं है। अगर आपका ब्लड शुगर HbA1c 10.6% है तो आप सिर्फ डायबिटीज की जांच तक सीमित नहीं रहें बल्कि डॉक्टर की सलाह के मुताबिक किडनी फंक्शन, यूरिन एल्ब्यूमिन-क्रिएटिनिन रेश्यो, आंखों की रेटिना, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और अन्य लिपिड स्तर, लिवर हेल्थ और फैटी लिवर की जांच कराएं। इसके अलावा वजन, कमर का साइज और शरीर में फैट व मांसपेशियों की स्थिति का भी आकलन किया जा सकता है। पैरों में ब्लड सर्कुलेशन, संवेदना और न्यूरोपैथी की जांच भी महत्वपूर्ण है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों और विशेषज्ञ की राय पर आधारित है। डायबिटीज की दवा, डाइट या एक्सरसाइज में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
