खराब खानपान, दिनचर्या में अनियमितता, तनाव और पानी की कमी के कारण आजकल कब्ज (Constipation) एक बेहद आम समस्या बन चुकी है। लेकिन जब यह समस्या हफ्ते या महीनों तक बनी रहे तो इसे ‘क्रॉनिक कॉन्स्टिपेशन’ (Chronic Constipation) कहा जाता है। लगातार कब्ज रहने से न सिर्फ पेट में भारीपन, गैस और ब्लोटिंग की शिकायत रहती है, बल्कि यह बवासीर (Piles) और आंतों की बीमारियों का कारण भी बन सकती है। कब्ज से तुरंत राहत पाने के लिए कई लोग बार-बार जुलाब या लैक्सेटिव (Laxatives) दवाओं का सहारा लेते हैं, जो आगे चलकर पाचन तंत्र को सुस्त बना सकती हैं या अपना मोहताज बना सकती हैं। ऐसे में आयुर्वेदिक एक्सपर्ट्स के अनुसार प्राकृतिक और रफेज (फाइबर) से भरपूर डाइट ही आंतों को दोबारा सक्रिय करने का सबसे सुरक्षित तरीका है।

मेडिकल डायरेक्टर, Ayurvedic Expert और आयुर्वेद व यूनानी चिकित्सा विशेषज्ञ डॉक्टर सलीम जैदी के मुताबिक कब्ज (Constipation) एक आम लेकिन गंभीर समस्या है, जो लंबे समय तक बनी रहे तो गैस, एसिडिटी, पेट दर्द, बवासीर (Piles) और एनल फिशर जैसी परेशानियों का कारण बन सकती है। उम्र बढ़ने के साथ पाचन तंत्र की कार्य क्षमता कम होने लगती है, इसलिए 50 वर्ष की आयु के बाद कब्ज की शिकायत लोगों को ज्यादा परेशान करती है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि कब्ज क्यों होती है और इसका देसी तरीके से इलाज कैसे कर सकते हैं।

कब्ज क्यों होती है?

कब्ज एक ऐसी परेशानी है जो सिर्फ पेट साफ न होने की समस्या नहीं है बल्कि लंबे समय तक कब्ज रहने से कई दूसरी समस्याएं भी हो सकती हैं जैसे गैस और एसिडिटी, अपच, पेट दर्द और पेट फूलना, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, शरीर में थकान, मतली, स्किन संबंधी समस्याएं, बवासीर और एनल फिशर का खतरा बढ़ सकता है। कब्ज होने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन सबसे आम कारण हैं खाने में फाइबर की कमी होना, पर्याप्त पानी न पीना, शारीरिक गतिविधि कम होना, कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट होना शामिल है। बढ़ती उम्र के कारण आंतों की गति धीमी पड़ना भी कब्ज का कारण हो सकता है।

अक्सर लोग कब्ज से राहत पाने के लिए चूर्ण,लैक्सेटिव और दूसरी गैस की दवाएं खाते हैं जो अस्थायी राहत दे सकती हैं, लेकिन कई मामलों में इन्हें लंबे समय तक लेने पर व्यक्ति इन पर निर्भर हो सकता है। डॉक्टर ने कब्ज से बचाव के लिए नेचुरल उपायों को अपनाने की, संतुलित आहार और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने की सलाह दी है। आइए जानते हैं कि कौन-कौन से ऐसे नेचुरल फल है जो क्रोनिक कब्ज का भी इलाज कर सकते हैं।

पपीता: पाचन के लिए सबसे आसान और असरदार फल

पपीता कब्ज दूर करने के लिए सबसे लोकप्रिय फलों में से एक माना जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर होता है। इसमें पपेन (Papain) नामक एंजाइम पाया जाता है, जो प्रोटीन को पचाने में मदद करता है। यह पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाता है। आयुर्वेद के अनुसार यह वात और पित्त को संतुलित करने में भी मददगार माना जाता है। आप रोजाना पका हुआ पपीता सीधे फल के रूप में खाएं। कच्चे पपीते की सब्जी भी खाई जा सकती है।

आलूबुखारा कब्ज के लिए प्रभावी फल

सूखा आलूबुखारा यानी प्रून्स कब्ज से राहत दिलाने में काफी प्रभावी माना जाता है। इनमें फाइबर भरपूर होता है। इनमें सॉर्बिटोल (Sorbitol) होता है, जो प्राकृतिक लैक्सेटिव की तरह काम करता है। इसमें फेनोलिक यौगिक (Phenolic Compounds) मौजूद होता है जो आंतों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद करता हैं। यह मल को नरम बनाकर आसानी से बाहर निकलने में मदद करता है।रात में सोने से पहले 3–5 प्रून्स खा सकते हैं। कुछ लोगों में प्रून जूस भी फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इसमें प्राकृतिक शुगर होती है, इसलिए डायबिटीज मरीज डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेकर ही इसका सेवन करें।

कीवी फाइबर और एंजाइम का बेहतरीन स्रोत

कीवी भी कब्ज से राहत दिलाने वाले फलों में शामिल है। इसमें पर्याप्त मात्रा में फाइबर होता है। इसमें एक्टिनिडिन (Actinidin) नामक एंजाइम पाया जाता है जो भोजन को पचाने में मदद करता है।  इसका सेवन करने से
गैस और अपच की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है। नियमित सेवन से मल त्याग आसान हो सकता है। रोजाना 1–2 कीवी खाना पर्याप्त माना जाता है।

अंजीर नेचुरल लैक्सेटिव

ताजा और सूखा दोनों तरह का अंजीर कब्ज में लाभकारी माना जाता है।अंजीर में फाइबर भरपूर होता है जो नेचुरल लैक्सेटिव की तरह काम करता है। ये मल को नरम बनाने में मदद करता है और आंतों की गति बेहतर करता है। रात में 2–4 सूखे अंजीर पानी में भिगो दें सुबह खाली पेट अंजीर खाएं और वही पानी भी पी लें। अंजीर का अधिक सेवन करने से दस्त या पेट संबंधी परेशानी हो सकती है। इसलिए सीमित मात्रा में ही खाएं।

नाशपाती डबल फाइबर वाला फल

नाशपाती कब्ज दूर करने में काफी मददगार मानी जाती है। इसमें सॉल्युबल और इनसॉल्युबल दोनों प्रकार का फाइबर होता है। सॉल्युबल फाइबर मल को नरम बनाता है और इन सॉल्युबल फाइबर मल का आकार बढ़ाकर उसे आसानी से बाहर निकलने में मदद करता है। नाशपाती हमेशा छिलके के साथ  खाएं, क्योंकि सबसे अधिक फाइबर उसके छिलके में ही होता है।

कब्ज से राहत पाने के लिए सिर्फ फल ही काफी नहीं। अगर कब्ज से लंबे समय तक राहत चाहिए तो सिर्फ फल खाना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ इन बातों का भी ध्यान रखें

  • रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
  • भोजन में फाइबर बढ़ाएं।
  • नियमित व्यायाम करें।
  • तनाव कम रखें।
  • लंबे समय तक मल रोककर न रखें।
  • पर्याप्त नींद लें।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से है। यदि आपको लंबे समय से कब्ज, बार-बार पेट दर्द, मल में खून, या अन्य गंभीर लक्षण हैं, तो स्वयं इलाज करने के बजाय गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट या योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।