क्या आप जानते हैं कि आपकी सेहत, मूड और इम्यूनिटी का सीधा कनेक्शन आपकी आंतों (गट) से है? आंतों में मौजूद ट्रिलियंस बैक्टीरिया का संतुलन अगर बिगड़ जाए, तो एसिडिटी, ब्लोटिंग और सुस्ती जैसी समस्याएं परेशान करने लगती हैं। अच्छी खबर यह है कि पेट की इस माइक्रोबायोम दुनिया में गुड और बैड बैक्टीरिया का सही बैलेंस बनाना आपके हाथ में है। हालिया रिसर्च भी मानती है कि सही खान-पान से आंतों के गुड बैक्टीरिया को तेजी से बढ़ाया जा सकता है। आंतों में गुड और बैड दोनों तरह के बैक्टीरिया हमेशा मौजूद रहते हैं। स्वस्थ शरीर के लिए इन दोनों के बीच 85% गुड बैक्टीरिया और 15% बैड बैक्टीरिया का सही अनुपात या संतुलन होना जरूरी है।

जब आप प्रीबायोटिक और प्रोबायोटिक फूड्स खाते हैं, तो वो आंतों में गुड बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाते हैं, जिससे खराब बैक्टीरिया हावी नहीं हो पाते और गट में सही संतुलन बना रहता है। हमारी आंतों में करोड़ों सूक्ष्मजीव मौजूद होते हैं, जिनमें कई बैक्टीरिया शरीर के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। इन्हें स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ प्रोबायोटिक फूड्स ही नहीं, बल्कि प्रीबायोटिक फाइबर भी जरूरी होता है। प्रीबायोटिक ऐसे फाइबर और अन्य यौगिक होते हैं, जिनका इस्तेमाल आंतों में मौजूद गुड बैक्टीरिया भोजन के रूप में करते हैं। डाइट में कुछ सामान्य खाद्य पदार्थों को शामिल करके आंतों के माइक्रोबायोम को सपोर्ट किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि आंतों में गुड बैक्टीरिया बढ़ाने में कौन कौन से फूड्स का सेवन असरदार साबित होता है।

लहसुन और प्याज खाएं

लहसुन में इनुलिन जैसे प्रीबायोटिक फाइबर पाए जाते हैं। ये आंतों में मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम कर सकते हैं। सब्जियों, दाल या अन्य व्यंजनों में नियमित मात्रा में लहसुन शामिल करना डाइट में प्रीबायोटिक फाइबर बढ़ाने का आसान तरीका है। प्याज में ऐसे कार्बोहाइड्रेट और फाइबर पाए जाते हैं, जो आंतों के अच्छे बैक्टीरिया के लिए उपयोगी हो सकते हैं। इसे सलाद के रूप में या सब्जी-दाल में पकाकर डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। Journal of Nutrition और British Journal of Nutrition में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक लहसुन और प्याज में इनुलिन (Inulin) और फ्रक्टोलिगोसैकेराइड्स (FOS) की प्रचुर मात्रा होती है। ये प्रीबायोटिक आंतों में Bifidobacteria और Lactobacillus जैसे फायदेमंद बैक्टीरिया की संख्या को तेजी से बढ़ाते हैं।

केला और सेब खाएं

केला भी आंतों के लिए उपयोगी फाइबर प्रदान करता है। खासकर कम पके केले में रेसिस्टेंट स्टार्च पाया जाता है, जबकि पके केले में पेक्टिन जैसे फाइबर मौजूद होते हैं। ये दोनों ही गट माइक्रोबायोम को सपोर्ट करने में भूमिका निभा सकते हैं। बात करें सेब की तो इसमें पेक्टिन नामक घुलनशील फाइबर होता है। यह आंतों में मौजूद माइक्रोबायोम के लिए उपयोगी हो सकता है। सेब को अच्छी तरह धोकर छिलके समेत खाने से डाइट में फाइबर की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। Nutrients जर्नल में छपे अध्ययन दर्शाते हैं कि सेब का पेक्टिन (Pectin) आंतों में फर्मेंट होकर शॉर्ट-चेन फैटी एसिड (SCFAs) जैसे कि ब्यूटायरेट (Butyrate) बनाता है, जो आंतों की सूजन कम करता है। Frontiers in Nutrition के शोध के मुताबिक, कच्चे या कम पके केले में रेसिस्टेंट स्टार्च होता है, जो छोटी आंत में पचे बिना बड़ी आंत में पहुंचता है और गुड बैक्टीरिया का भोजन बनता है।

ओट्स

ओट्स में बीटा-ग्लूकन नाम का घुलनशील फाइबर पाया जाता है। यह आंतों के बैक्टीरिया के लिए उपयोगी सब्सट्रेट का काम कर सकता है। नाश्ते में ओट्स को शामिल करना रोजाना फाइबर का सेवन बढ़ाने का एक आसान विकल्प है। Vascular Health and Risk Management और Microbiome जर्नल की रिसर्च बताती है कि ओट्स में पाया जाने वाला बीटा-ग्लूकन (Beta-glucan) आंत के म्यूकोसल बैरियर जो सुरक्षा परत है, उसको मजबूत करता है और गुड माइक्रोबायोम की विविधता (Diversity) को बढ़ाता है।

अलसी के बीज

अलसी के बीज फाइबर का अच्छा स्रोत हैं। इसका सेवन आंतों की नियमितता बनाए रखने और गट माइक्रोबायोम को सपोर्ट करने में मदद कर सकता है। इन्हें पीसकर दही, ओट्स या स्मूदी में थोड़ी मात्रा में मिलाया जा सकता है। Frontiers in Endocrinology (2018) में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, अलसी के बीज में मौजूद म्यूसिलेज (Soluble Fiber) और लिग्नान (Lignans) आंतों के बैक्टीरिया द्वारा फर्मेंट होते हैं, जिससे गट-ब्रेन एक्सिस और पाचन क्रिया में सुधार होता है।

दालें और फलियां

मसूर दाल, चना और राजमा जैसी फलियों में पर्याप्त मात्रा में फाइबर पाया जाता है। इनका नियमित और संतुलित सेवन आंतों के बैक्टीरिया को अलग-अलग तरह के फाइबर उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है। भारतीय भोजन में इन्हें शामिल करना इसलिए भी आसान है क्योंकि ये रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा हैं। The American Journal of Clinical Nutrition की रिसर्च के अनुसार, दालों में मौजूद रैफिनोज (Raffinose) और रेजिस्टेंट स्टार्च आंतों के बैक्टीरिया के लिए सबसे बेहतरीन आहार हैं। अलग-अलग प्रकार की दालें खाने से आंतों में बैक्टीरिया की विविधता बढ़ती है, जो एक मजबूत इम्युनिटी की निशानी है।

आंतों की सेहत के लिए सिर्फ एक फूड पर निर्भर न रहें

गट हेल्थ को बेहतर रखने के लिए किसी एक खाद्य पदार्थ को ‘जादुई उपाय’ मानने के बजाय अलग-अलग तरह के फाइबर वाले खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करना ज्यादा बेहतर है। सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, फलियां, नट्स और बीजों को संतुलित मात्रा में खाने से डाइट में फाइबर की विविधता बढ़ाई जा सकती है। साथ ही पर्याप्त पानी पीना और नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। प्रीबायोटिक फूड्स आंतों की सेहत को सपोर्ट कर सकते हैं, लेकिन इन्हें किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या, खाद्य एलर्जी या पाचन संबंधी परेशानी होने पर डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन की सलाह लें।