क्या आप जानते हैं भारत में बांझपन से जूझ रही 10-15% महिलाओं में जेनाइटल टीबी एक गुप्त कारण हो सकता है। महिलाओं में होने वाली Genital Tuberculosis एक गंभीर संक्रमण है जो प्रजनन अंगों को प्रभावित करता है। यह बीमारी आमतौर पर Tuberculosis का ही एक रूप होती है, जो शरीर के दूसरे हिस्सों से मिलकर महिला प्रजनन तंत्र तक पहुंच जाती है। ज्यादातर मामलों में यह संक्रमण सबसे पहले फैलोपियन ट्यूब को प्रभावित करता है और धीरे-धीरे गर्भाशय (uterus), अंडाशय (ovaries) और कभी-कभी वजाइना तक भी फैल सकता है। वजाइनल टीबी फैलोपियन ट्यूब में सूजन और ब्लॉकेज पैदा कर सकती है, इस टीबी की वजह से अंडाशय से निकला अंडा गर्भाशय तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाता इससे निषेचन (fertilization) में दिक्कत होती है। इन सभी कारणों की वजह से जेनिटल टीबी महिलाओं में बांझपन (infertility) का एक बड़ा कारण बन सकती है। महिलाओं में जेनाइटल टीबी फैलोपियन ट्यूब और गर्भाशय को नुकसान पहुंचा कर बांझपन का कारण बनती है। ये पुरुषों में टेस्टिस और प्रोस्टेट को प्रभावित कर बांझपन का कारण बन सकती है।

Birla Fertility and IVF की Dr Prachi Benara के मुताबिक महिलाओं में Genital Tuberculosis होने पर शारीरिक संबंध के दौरान दर्द महसूस हो सकता है। इस स्थिति में वजाइना के आसपास सूजन, रेडनेस और असहजता भी देखी जा सकती है। अगर संक्रमण ज्यादा बढ़ जाए, तो बुखार, ठंड लगना, तेजी से वजन घटना, थकान और मांसपेशियों में दर्द जैसे लक्षण भी सामने आ सकते हैं। लंबे समय तक इलाज न कराने पर यह बीमारी फैलोपियन ट्यूब को नुकसान पहुंचा कर बांझपन का कारण बन सकती है। आइए जानते हैं कि बिना लक्षण के कैसे ये बीमारी बांझपन का कारण बनती है।

फीमेल जेनिटल टीबी के कारण

Genital Tuberculosis आमतौर पर Tuberculosis के बैक्टीरिया के शरीर के दूसरे हिस्सों जैसे फेफड़ों से चलकर प्रजनन अंगों तक पहुंचने से होती है। इस बीमारी के फैलने के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं जैसे फेफड़ों की टीबी का ब्लड के जरिए फैलना, कमजोर इम्यूनिटी, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना, खांसने-छींकने से बैक्टीरिया का फैलाव, दुर्लभ मामलों में यौन संपर्क।

Dr Avantika Vaze, Nova IVF Fertility की फर्टिलिटी विशेषज्ञ, चेतावनी देती हैं कि Genital Tuberculosis का समय पर निदान न होने पर यह प्रजनन क्षमता पर गंभीर असर डाल सकती है। वह कहती हैं महिलाओं में यह फैलोपियन ट्यूब, गर्भाशय और एंडोमेट्रियम को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे ट्यूब ब्लॉकेज, पीरियड्स अनियमित होना और भ्रूण के इम्प्लांटेशन में दिक्कत हो सकती है। चूंकि इसके लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते, इसलिए कई महिलाओं को इस समस्या का पता तब चलता है जब वे बांझपन के इलाज के लिए डॉक्टर के पास जाती हैं।

महिलाओं और पुरुषों पर जेनाइटल टीबी का असर

महिलाओं में यह बीमारी फैलोपियन ट्यूब को ब्लॉक कर देती है और गर्भाशय की परत को नुकसान पहुंचाती है, जिससे गर्भधारण में दिक्कत आती है। पुरुषों में यह स्पर्म ले जाने वाली नलियों को ब्लॉक कर सकती है, स्पर्म काउंट घटा सकती है और टेस्टिस में सूजन या दर्द पैदा कर सकती है।

कब सतर्क हो जाएं?

डॉक्टर सलाह देते हैं कि अगर किसी को पहले टीबी हो चुकी है लगातार पेल्विक दर्द रहता है, पीरियड्स अनियमित हैं या बिना कारण गर्भधारण नहीं हो पा रहा तो तुरंत जांच करानी चाहिए।

इलाज और समय

इस बीमारी का इलाज आमतौर पर 6 महीने की एंटी-टीबी दवाओं से किया जाता है। इसमें शुरुआती 2 महीने में चार दवाएं दी जाती हैं, इसके बाद 4 महीने तक दो दवाएं खानी रहती हैं।

अगर टीबी दवा-प्रतिरोधी (Drug-resistant) हो, तो इलाज 9 से 20 महीने तक चल सकता है। हालांकि इलाज से संक्रमण तो ठीक हो जाता है, लेकिन अंगों को हुआ नुकसान हमेशा ठीक नहीं हो पाता। ऐसे मामलों में IVF एक प्रभावी विकल्प माना जाता है, बशर्ते गर्भाशय की परत स्वस्थ हो।

निष्कर्ष

जननांग टीबी एक गंभीर लेकिन अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली बीमारी है, जो बिना लक्षण के बांझपन का कारण बन सकती है। समय पर पहचान और सही इलाज से इसके प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

डिस्क्लेमर:

यह जानकारी केवल जागरूकता के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लें।