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फलों के दाम में 10 फीसद की कमी से हृदय रोग का खतरा कम

फलों और सब्जियों की कीमतों में 10 प्रतिशत की गिरावट समग्र रूप से पांच सालों में हृदय रोग से मरने वालों की संख्या को 1.2 प्रतिशत और अगले 20 सालों के भीतर इस संख्या को 2 प्रतिशत तक कम कर सकती हैं।

Author न्यूयार्क | March 7, 2016 16:29 pm
शोध में वैज्ञानिकों ने बताया कि कैसे समय के अनुसार कीमतों में होने वाला परिवर्तन व्यक्ति के आहार को प्रभावित करता है और उससे हृदय रोग में क्या कमी आती है।

स्वस्थ खाद्य पदार्थो की कीमतों में 10 प्रतिशत की गिरावट और अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थो की कीमत में 10 प्रतिशत की वृद्धि से संभावित हृदय रोग और स्ट्रोक से मरने वाले लोगों की संख्या घट सकती है। एक नए शोध में इसकी जानकारी मिली है।

अमेरिका की हावर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक कंप्यूटर आधारित मॉडल का उपयोग किया। वैज्ञानिकों ने बताया कि कैसे समय के अनुसार कीमतों में होने वाला परिवर्तन व्यक्ति के आहार को प्रभावित करता है और उससे हृदय रोग में क्या कमी आती है।

निष्कर्षो के अनुसार, फलों और सब्जियों की कीमतों में 10 प्रतिशत की गिरावट समग्र रूप से पांच सालों में हृदय रोग से मरने वालों की संख्या को 1.2 प्रतिशत और अगले 20 सालों के भीतर इस संख्या को 2 प्रतिशत तक कम कर सकती हैं। साथ ही अगले 20 सालों की अवधि में दिल का दौरा और स्ट्रोक में 2.6 और 4 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है।

इसके अलावा, अनाज की कीमतों में 10 प्रतिशत की कमी अगले पांच सालों में हृदय रोग को 0.2 प्रतिशत और 20 सालों में 0.3 प्रतिशत तक कम कर सकती हैं।

साथ ही मीठे पेय पर 10 प्रतिशत की मूल्य वृद्धि, दिल की बीमारियों से होने वाली मौतों को पांच सालों में लगभग 0.1 प्रतिशत और 20 सालों में 0.12 प्रतिशत तक कम कर सकती है। विशेष रूप से अगले 20 सालों में दिल का दौरा 0.25 प्रतिशत और स्ट्रोक 0.17 प्रतिशत तक कम हो सकता है। इसके साथ ही मधुमेह पांच सालों में 0.2 प्रतिशत और अगले 20 सालों में 0.7 प्रतिशत तक कम हो सकता है।

इस मॉडल से पता चलता है कि देश भर में 2035 तक कीमतों में यह छोटी सी गिरावट दिल की बीमारी से होने वाली 51 लाख 5000 मृत्यु को रोक सकते हैं, और दिल का दौरा तथा स्ट्रोक से होने वाली लगभग 67, हजार 5000 घटनाओं को रोक सकते हैं।

इस अध्ययन के प्रमुख लेखक और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर थॉमस ए. गजानियो ने कहा, “आहार में बदलाव चुनौतीपूर्ण होता है। लेकिन अगर यह निजी पसंद या बाजार के परिवर्तनों के माध्यम से हासिल हो, तो यह आपके हृदय की सेहत पर गहरा असर डाल सकता है।” यह शोध ‘अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन एपिडेमियोलॉजी/लाइफस्टाइल 2016’ वैज्ञानिक सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया।

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