डाइट में फाइबर रिच फूड्स का सेवन करने से पाचन दुरुस्त रहता है और पेट से जुड़ी बीमारियों जैसे कब्ज का इलाज होता है। डायबिटीज में भी फाइबर का सेवन दवा की तरह असर करता है। अक्सर लोग बॉडी में फाइबर की कमी को पूरा करने के लिए फाइबर सप्लीमेंट का सेवन करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि फाइबर की जरूरत को पूरा करने के लिए सप्लीमेंट लेने के बजाय प्राकृतिक फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करना ज्यादा फायदेमंद होता है। फाइबर रिच फूड्स का सेवन करने से दिल की सेहत में सुधार होता है और ब्लड शुगर का स्तर कंट्रोल रहता है। गट हेल्थ में सुधार करने में कुछ फूड्स बेहद असरदार साबित होते हैं। Nutrients और The American Journal of Clinical Nutrition में प्रकाशित शोधों के अनुसार, फाइबर का सेवन सप्लीमेंट के बजाय साबुत भोजन (Whole Foods) से करना शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है।

रिसर्च के मुताबिक नेचुरल फाइबर रिच फूड अकेले काम नहीं करते बल्कि उनमें विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट्स का एक पूरा पैकेज होता है जो बॉडी को फायदा पहुंचाता है। रिसर्च बताती है कि साबुत अनाज या सब्जियों से मिलने वाला फाइबर पेट को लम्बे समय तक भरा रखता है और शुगर के अवशोषण (Absorption) को धीरे करता है। सप्लीमेंट्स अक्सर बहुत तेजी से पच जाते हैं और वो नेचुरल भोजन की तरह ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल करने में मदद नहीं करते। आइए जानते हैं कि बॉडी में फाइबर की कमी को पूरा करने के लिए कौन-कौन से फूड्स सप्लीमेंट से बेहतर है।

कीवी (Kiwi) खाएं

रिसर्च के मुताबिक कब्ज का इलाज करने में कीवी का सेवन सिलियम (psyllium) नाम के फाइबर सप्लीमेंट से कई गुणा बेहतर है। 18 से 65 साल की उम्र के लोगों पर की गई रिसर्च के मुताबिक दो कीवी का सेवन फंक्शनल कब्ज, इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS-C) या सामान्य पाचन से जुड़ी समस्याओं का इलाज करने में मददगार साबित होता है। कीवी का सेवन  करने से टॉयलेट के दौरान कम जोर लगाना पड़ता है और ब्लोटिंग भी कंट्रोल रहती है। जबकि सिलियम लेने वाले लोगों में ब्लोटिंग ज्यादा देखी गई।

चिया सीड्स (Chia Seeds) खाएं

चिया सीड्स पोषक तत्वों से भरपूर और फाइबर का अच्छा स्रोत हैं। लगभग 2 बड़े चम्मच चिया सीड्स में करीब 10 ग्राम फाइबर होता है। चिया सीड्स में मौजूद फाइबर मल को भारी बनाता है, जिससे वो आंतों से आसानी से गुजरता है और मल त्याग नियमित और आसान हो जाता है। एक रिसर्च में चिया सीड्स की तुलना पॉलीएथिलीन ग्लाइकोल (PEG) और सिलियम सप्लीमेंट से की गई। इस अध्ययन में क्रॉनिक कब्ज से पीड़ित लोगों को 28 दिनों तक इन तीनों में से एक विकल्प दिया गया। रिसर्च में पाया गया कि कब्ज से राहत देने में चिया सीड्स उतने ही प्रभावी थे जितने PEG या सिलियम सप्लीमेंट। एक्सपर्ट का मानना है कि फाइबर का अधिकतर हिस्सा नेचुरल फूड्स से ही लेना चाहिए। फाइबर के नेचुरल सॉर्स में विटामिन, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट जैसे कई दूसरे पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं जो बॉडी को हेल्दी रखते हैं।

लेग्यूम्स (Legumes)है फाइबर का ख़ज़ाना

बीन्स, मटर और दालें सभी लेगुम्स की श्रेणी में आते हैं। ये सभी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और इनमें फाइबर के साथ कुछ मात्रा में प्रोटीन भी पाया जाता है। पोस्टमेनोपॉज़ल महिलाओं पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि रोजाना आधा कप लेगुम्स जैसे चना, किडनी बीन्स, पिंटो बीन्स, ब्लैक-आइड पीज और दाल खाने से 12 हफ्तों में कब्ज की समस्या में सुधार हुआ। इसके अलावा इन महिलाओं के पाचन में भी सुधार देखा गया और शरीर में शॉर्ट-चेन फैटी एसिड का उत्पादन बढ़ा। ये फैटी एसिड सेहत के लिए जरूरी होते हैं और डायबिटीज और दिल के रोगों के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं।

रेडी टू ईट हाई फाइबर सीरियल

रेडी-टू-ईट सीरियल प्रोसेस्ड फूड होते हैं, इसलिए इन्हें खरीदते समय न्यूट्रिशन लेबल पढ़ना जरूरी है। होल ग्रेन से बने सीरियल जैसे ओट्स, ग्रेनोला, मक्का, होल व्हीट, क्विनोआ या ब्राउन राइस में रिफाइंड ग्रेन यानी मैदा या सफेद चावल से बने सीरियल की तुलना में ज्यादा फाइबर होता है। कम शुगर और कम फैट वाले हाई-फाइबर सीरियल बेहतर विकल्प होते हैं। होल-ग्रेन फूड्स खाने से दिल की बीमारी, डायबिटीज और मोटापे का खतरा कम हो सकता है और गट हेल्थ बेहतर होती है।

एवोकाडो (Avocado) में है भरपूर फाइबर

एवोकाडो में हेल्दी प्लांट-बेस्ड फैट के साथ भरपूर फाइबर भी होता है। एक औसत एवोकाडो में लगभग 13.4 ग्राम फाइबर पाया जाता है। एक मेटा-एनालिसिस में पाया गया कि एवोकाडो खाने से हाई कोलेस्ट्रॉल (LDL) वाले लोगों में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम हो सकता है। एक दूसरे अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों ने अपनी डाइट में कार्बोहाइड्रेट की जगह एवोकाडो शामिल किया, उनमें ब्लड ग्लूकोज कंट्रोल बेहतर हुआ और हृदय रोग से जुड़े जोखिम में कमी आई। हालांकि एवोकाडो में कैलोरी ज्यादा होती है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में खाना चाहिए और ऐसे एडिटिव्स से बचना चाहिए जो अतिरिक्त कैलोरी बढ़ाते हैं लेकिन पोषण नहीं देते।

डिस्क्लेमर:

यह जानकारी शोध और सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। किसी भी गंभीर बीमारी या सप्लीमेंट छोड़ने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह जरूर लें। जिन लोगों को डॉक्टर ने मेडिकल कारणों से सप्लीमेंट लिखे हैं, वे इन्हें खुद से बंद न करें।