फैटी लिवर आज के समय में एक ऐसी आम परेशानी बन चुका है जो बच्चों से लेकर युवाओं तक को अपनी चपेट में ले रहा है। फैटी लिवर के इलाज के लिए दुनिया भर में करोड़ों लोग दवाइयों का सेवन और लाइफस्टाइल में बदलाव कर रहे हैं। हाल ही में Science Advances में प्रकाशित एक नई मेडिकल स्टडी में सामने आया है कि फैटी लिवर के कुछ विशेष इलाजों और कैंसर के जोखिम के बीच संबंध है। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी रिसर्च के शुरुआती नतीजों से घबराने की जरूरत नहीं है। आपको बता दें फैटी लिवर के इलाज को लेकर एक नई स्टडी ने चिंता बढ़ा दी है। रिसर्च में सामने आया है कि जिस एंजाइम को अब तक इस बीमारी से बचाव के लिए अहम माना जाता था, उसे दबाने से लंबे समय में लिवर को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है और कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

यह अध्ययन जर्नल Science Advances में प्रकाशित हुआ है। इसमें University of Adelaide के वैज्ञानिकों ने पाया कि Caspase-2 नाम का एंजाइम लिवर की सेहत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। Caspase-2 एक खास प्रकार का एंजाइम (enzyme) है, जो हमारी कोशिकाओं (cells) के अंदर काम करता है। यह शरीर के क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम का हिस्सा माना जाता है।

Caspase-2 क्या काम करता है?

Caspase-2 का काम खराब या डैमेज कोशिकाओं की पहचान करना है। जरूरत पड़ने पर उन्हें खत्म करना, कोशिकाओं के डीएनए (DNA) को सुरक्षित रखना है। ये कैंसर बनने के खतरे को कम करने में मदद करता है

क्या कहती है रिसर्च?

रिसर्च के मुताबिक अगर Caspase-2 को ब्लॉक या कम कर दिया जाए तो लिवर कोशिकाओं (cells) की सामान्य ग्रोथ और नियंत्रण बिगड़ जाता है। इससे शरीर में कई समस्याएं शुरू हो सकती हैं जैसे  लिवर में सूजन , फाइब्रोसिस, कोशिकाओं को नुकसान और उम्र बढ़ने के साथ कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

चूहों पर हुए प्रयोग में क्या मिला?

रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने ऐसे चूहों पर अध्ययन किया जिनमें Caspase-2 काम नहीं कर रहा था। शोधकर्ताओं ने पाया लिवर कोशिकाएं असामान्य रूप से बड़ी हो गईं और कोशिकाओं में जेनेटिक डैमेज बढ़ा और क्रॉनिक लिवर डिजीज के लक्षण दिखे। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि ऐसे चूहों में लिवर कैंसर का खतरा सामान्य चूहों की तुलना में चार गुना तक ज्यादा पाया गया।  यह कैंसर मुख्य रूप से Hepatocellular Carcinoma था, जो लिवर कैंसर का सबसे आम प्रकार है।

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

स्टडी की प्रमुख शोधकर्ता Dr. Loretta Dorstyn के मुताबिक Caspase-2 लिवर कोशिकाओं की जेनेटिक स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है। ये खराब और डैमेज कोशिकाओं को हटाने में अहम भूमिका निभाता है। एक्सपर्ट ने बताया अगर ये एंजाइम नहीं रहेगा, तो शरीर में खराब कोशिकाएं जमा होने लगती हैं, जो आगे चलकर कैंसर का कारण बन सकती हैं। अब तक वैज्ञानिक Caspase-2 को टारगेट करके फैटी लिवर का इलाज विकसित करने पर काम कर रहे थे। लेकिन इस रिसर्च के बाद ये साफ हुआ है कि शॉर्ट टर्म में यह तरीका फायदेमंद लग सकता है, लेकिन लंबे समय में इसके गंभीर नुकसान हो सकते हैं।

ये रिसर्च क्यों है जरूरी ?

मोटापा और खराब लाइफस्टाइल के कारण दुनियाभर में लिवर से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ग्लोबल आंकड़ों के मुताबिक  2022 में लिवर कैंसर से करीब 7.6 लाख मौतें हुईं।  यह दुनिया का छठा सबसे आम कैंसर है। ये रिसर्च बताती है कि किसी भी नई दवा या इलाज को अपनाने से पहले उसके लंबे समय के असर (long-term effects) को समझना बेहद जरूरी है। फैटी लिवर के इलाज के लिए Caspase-2 को टारगेट करना भले ही आसान रास्ता लगे, लेकिन यह भविष्य में लिवर कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है।

डिस्क्लेमर

यह लेख केवल जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी हालिया रिसर्च और उपलब्ध मेडिकल डेटा पर आधारित है। इसे किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, डायग्नोसिस या इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।