मानव शरीर में लिवर एक ऐसी ‘केमिकल फैक्ट्री’ की तरह काम करता है, जो भोजन को पचाने,टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकालने और ऊर्जा को स्टोर करने जैसे 500 से अधिक जरूरी काम अकेले संभालता है। लेकिन जब हमारी खराब जीवनशैली और असंतुलित खानपान के कारण इस महत्वपूर्ण अंग की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा वसा (Fat) जमा होने लगती है, तो यह ‘फैटी लिवर’ का रूप ले लेता है। शुरुआती दौर में इसके लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि किन लोगों को इसका सबसे ज्यादा खतरा होता है और इसके शुरुआती संकेत क्या हैं।

मारेंगो एशिया हॉस्पिटल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में वरिष्ठ सलाहकार एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अमित मित्तल ने बताया फैटी लिवर की बीमारी का समय पर इलाज नहीं किया जाए तो ये परेशानी बढ़कर हेपेटाइटिस या सिरोसिस की अवस्था में पहुंच जाती है। ऐसी स्थिति में मरीज को भूख कम लगना, कमजोरी, मांसपेशियों की कमजोरी और पोषण की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं,  इसलिए समय पर पहचान करना बेहद जरूरी है ताकि परेशानी से बचा जा सके। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि फैटी लिवर के लक्षण कौन-कौन से हैं और किन लोगों को इसका खतरा ज्यादा होता है और इससे बचाव कैसे करें।

फैटी लिवर के प्रमुख कारण

लिवर पर फैट चढ़ने के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं जैसे मोटापा,शारीरिक गतिविधि की कमी, खराब खानपान, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, अत्यधिक शराब सेवन, प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन, पर्यावरणीय विषाक्त पदार्थ लिवर पर फैट डिपॉजिट करने के लिए जिम्मेदार है।

फैटी लिवर के लक्षण

फैटी लिवर की शुरुआती अवस्था में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। कई लोगों को इसका पता नियमित हेल्थ चेकअप या अल्ट्रासाउंड के दौरान चलता है। अगर बॉडी के संकेतों पर ध्यान दिया जाए तो फैटी लिवर की पहचान की जा सकती है। इसके लक्षणों की बात करें तो

  • पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द या भारीपन
  • लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना
  • बिना कारण वजन कम होना
  • भूख कम लगना
  • मतली या उल्टी जैसा महसूस होना
  • पेट में सूजन होना
  • ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई या भ्रम की स्थिति
  • स्किन और आंखों का पीला पड़ना
  • पैरों और टखनों में सूजन
  • शरीर में खुजली होना

किन लोगों में फैटी लिवर का खतरा अधिक होता है?

  • जिन लोगों का मोटापा ज्यादा है या पेट पर चर्बी है उन्हें फैटी लिवर का खतरा ज्यादा है।
  • टाइप 2 डायबिटीज मरीजों को रहता है फैटी लिवर का खतरा
  • हाई कोलेस्ट्रॉल या हाई ट्राइग्लिसराइड्स के मरीजों को
  • हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को
  • शारीरिक गतिविधि की कमी वाले लोगों को
  • अत्यधिक शराब का सेवन करने वाले लोगों को
  • अनहेल्दी डाइट का सेवन करने वाले लोगों को रहता है ज्यादा खतरा

फैटी लिवर से बचाव के लिए ये रहा डाइट चार्ट

समय          क्या खाएं                                
सुबह उठते ही  गुनगुना पानी, ग्रीन टी या ब्लैक कॉफी      
नाश्ता        पोहा, दलिया, बेसन चीला, दाल चीला, फल      
मिड-मॉर्निंग  सेब, पपीता, संतरा, मौसमी, बादाम, अखरोट    
दोपहर का भोजन1-2 मल्टीग्रेन रोटी, दाल, हरी सब्जी, सलाद
शाम का नाश्ताग्रीन टी, भुने चने, स्प्राउट्स, फल        
रात का भोजन  1-2 रोटी, दाल, सब्जी, सलाद और दही

फैटी लिवर से बचाव के लिए इन उपायों को अपनाएं

  1. संतुलित और फाइबर युक्त डाइट लें। रोजाना भोजन में मौसमी फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और बीन्स शामिल करें। फाइबर युक्त आहार वजन कंट्रोल रखने और लिवर की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।
  2. हेल्दी फैट को प्राथमिकता दें। डाइट में घी, मक्खन और तले-भुने खाद्य पदार्थों की जगह सीमित मात्रा में जैतून का तेल, मेवे, बीज और एवोकाडो जैसे हेल्दी फैट्स का सेवन करें।
  3. वजन और कैलोरी पर कंट्रोल रखें। जरूरत से ज्यादा भोजन करने से शरीर में अतिरिक्त कैलोरी फैट के रूप में जमा हो सकती है। इसलिए संतुलित मात्रा में भोजन करें और स्वस्थ वजन बनाए रखने की कोशिश करें।
  4. रोजाना शारीरिक गतिविधि करें। हफ्ते में कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली एक्सरसाइज, तेज चलना, साइकिलिंग या योग करने से लिवर में जमा अतिरिक्त चर्बी कम करने में मदद मिल सकती है।
  5. प्रोसेस्ड और मीठे खाद्य पदार्थों से दूरी बनाएं। पैकेज्ड स्नैक्स, फास्ट फूड, मीठे पेय, बेकरी उत्पाद और सैचुरेटेड व ट्रांस फैट से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें। ये फैटी लिवर और मोटापे का खतरा बढ़ा सकते हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। लेख में डाइट चार्ट, फल और आयुर्वेदिक उपाय मारेंगो एशिया हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. अमित मित्तल द्वारा साझा किए गए सुझावों पर आधारित हैं। डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।