34 साल की मणि बेहल का डिलीवरी के बाद वजन बढ़ गया, उसे लगातार थकान, ब्लोटिंग और कब्ज जैसी समस्या रहने लगी जिसे अक्सर महिलाएं नजर अंदाज कर देती हैं। मणि बेहल ने डॉक्टर को दिखाया तो उन्हें फैटी लिवर डायग्नोज हुआ। मणि बहल ने लिवर के फैट को कंट्रोल करने के लिए और पाचन को दुरुस्त करने के लिए काफी रिसर्च की और रिसर्च के मुताबिक देसी नुस्खों का सहारा लिया। उन्होंने डाइट में मखाना, भुना चना, ग्रीक योगर्ट और सीड्स का सेवन किया। अपनी स्नैकिंग हेबिट्स में सुधार करके महिला ने ना सिर्फ वजन कंट्रोल किया बल्कि फैटी लिवर में भी सुधार किया। आपको बता दें कि गर्भावस्था के बाद (Post Delivery) महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल और शारीरिक बदलाव आते हैं जिनका असर लिवर पर भी पड़ता है।
सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट सिमरत कथूरिया के अनुसार, फैटी लिवर केवल एक गलत खानपान की वजह से नहीं होता, बल्कि कई लाइफस्टाइल फैक्टर्स मिलकर इसका कारण बनते हैं। नियमित व्यायाम, संतुलित और टिकाऊ खानपान, पर्याप्त नींद और तनाव कंट्रोल करके फैटी लिवर को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
भुना मखाना बना हेल्दी नाइट स्नैक
अक्सर नाइट स्नैकिंग बढ़ते वजन का कारण बनती है। मणि को भी रात में बार-बार भूख लगती थी जिसे कंट्रोल करने के लिए उसने तले-भुने और मीठे स्नैक्स की जगह भुना मखाना खाना शुरू किया। इसके साथ ही उन्होंने ग्रीन टी का सेवन करना भी शुरू किया। मखाना कम कैलोरी और पौष्टिक स्नैक्स है, जबकि ग्रीन टी में मौजूद कैटेचिन (Catechins) लिवर में फैट जमा होने और लिवर एंजाइम को कंट्रोल करने में मदद कर सकता हैं।
भुना चना से किया भूख को कंट्रोल
प्रोसेस्ड स्नैक्स और नमकीन की जगह मणि ने भुना चना खाना शुरू किया। इसमें प्रोटीन और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, जिससे लंबे समय तक भूख नहीं लगती। फाइबर वजन घटाने, इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधारने और फैटी लिवर से रिकवरी में मददगार माना जाता है।
ग्रीक योगर्ट और सीड्स से सुधरी गट हेल्थ
शाम के स्नैक में उन्होंने बिना चीनी वाला ग्रीक योगर्ट, चिया सीड्स और फ्लैक्स सीड्स शामिल किया। प्रोबायोटिक्स और फाइबर से भरपूर यह कॉम्बिनेशन पाचन तंत्र को बेहतर बनाने, सूजन कम करने और मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करने में मददगार साबित होता है।
पैकेज्ड मिठाइयों की जगह ताजे फल खाएं
दोपहर के बाद मीठा खाने की इच्छा होने पर उन्होंने पैकेज्ड डेजर्ट छोड़कर सेब, अमरूद और बेरीज़ जैसे ताजे फलों को चुना। इन फलों में फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और पॉलीफेनॉल्स होते हैं, जो ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम करने और लिवर की सेहत को बेहतर बनाने में मददगार साबित होते हैं।
चिप्स की जगह ह्यूमस और सब्जियां
चिप्स और दूसरे प्रोसेस्ड स्नैक्स की जगह उन्होंने खीरा, गाजर और शिमला मिर्च के टुकड़ों को ह्यूमस के साथ खाना शुरू किया। यह स्नैक फाइबर, प्लांट प्रोटीन और हेल्दी फैट का अच्छा स्रोत है, जो मेटाबॉलिक हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
ओट्स और पीनट बटर भी बने डाइट का हिस्सा
जब महिला को ज्यादा भूख लगती थी, तब उन्होंने हल्के पीनट बटर के साथ ओट्स खाना शुरू किया। ओट्स में मौजूद बीटा-ग्लूकान नामक घुलनशील फाइबर ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने, इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाने और फैटी लिवर के खतरे को कम करने में मददगार साबित होता है।
डिस्क्लेमर: यह एक व्यक्ति का अनुभव है। फैटी लिवर के इलाज या डाइट में बदलाव करने से पहले गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट या योग्य डायटीशियन से सलाह जरूर लें।
