फैटी लिवर एक ऐसी स्थिति है जिसमें लिवर की कोशिकाओं में अतिरिक्त वसा जमा हो जाती है। लिवर में फैट जमा होने पर बॉडी में कई तरह की परेशानियां होने लगती हैं जैसे पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द या भारीपन, लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना, भूख कम लगना, मतली या उल्टी जैसा महसूस होना, पेट में सूजन होना, वजन बढ़ना, खासकर पेट के आसपास चर्बी जमा होना, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल बढ़ना शामिल है। गंभीर मामलों में स्किन और आंखों का पीला पड़ना, पैरों में सूजन और लिवर में सूजन जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं। फैटी लिवर का इलाज करना चाहते हैं तो सबसे पहले डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करें।
एम्स के पूर्व कंसल्टेंट और साओल हार्ट सेंटर के फाउंडर एंड डायरेक्टर डॉ बिमल झांजेर के मुताबिक छाछ एक ऐसा ड्रिंक है जो हमारी बॉडी की अंदर से सफाई करता है। ये ड्रिंक शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने में सहायक माना जाता है। लिवर का फैट कंट्रोल करने के लिए छाछ का सेवन बेहद असरदार साबित होता है। छाछ जिसे कई जगह मट्ठा या बटरमिल्क भी कहा जाता है, दही से तैयार किया जाने वाला ये एक पारंपरिक ड्रिंक है। ये भारत के लगभग हर राज्य में अलग-अलग तरीकों से बनाया और पिया जाता है। आइए जानते हैं कि छाछ कैसे लिवर को डिटॉक्स करती है और लिवर की हेल्थ में सुधार करती है।
छाछ कैसे लिवर को डिटॉक्स कर फैटी लिवर का करती है इलाज
छाछ (Buttermilk) प्राकृतिक रूप से प्रोबायोटिक्स (Probiotics) का एक बेहतरीन स्रोत है। इसमें मौजूद गुड बैक्टीरिया न केवल पाचन तंत्र को सुधारते हैं, बल्कि लिवर में होने वाली सूजन (Inflammation) को कम करने में भी मददगार हो सकते हैं। कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि छाछ में मौजूद राइबोफ्लेविन (Riboflavin) लिवर के ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मददगार होते हैं। इसका सेवन करने से मेटाबॉलिज्म में सुधार होता है। ये शरीर से टॉक्सिन को बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे लिवर पर काम का बोझ कम होता है। इसमें कैलोरी बहुत कम होती है, जो वजन को कंट्रोल करने में मददगार साबित होती है। वजन कंट्रोल करने से लिवर पर अतिरिक्त फैट का जमाव नहीं होता।
The Journal of Nutrition में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक छाछ में मौजूद मिल्क फैट ग्लोब्यूल मेंब्रेन (MFGM) में ऐसे बायोएक्टिव प्रोटीन होते हैं जो शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) और ट्राइग्लिसराइड्स को कम करते हैं। ये लिवर के चारों ओर जमा होने वाले अतिरिक्त फैट (Fat) को पिघलाने में मदद करती है, जिससे नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर (NAFLD) का जोखिम कम होता है।
छाछ कैसे सेहत को फायदा पहुंचाती है?
छाछ का सेवन करने से पाचन दुरुस्त रहता है। छाछ में मौजूद प्रोबायोटिक्स आंतों के लिए फायदेमंद होते हैं। ये भोजन को पचाने में मदद करते है। इसका सेवन करने से पेट की गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। अगर छाछ में चुटकी भर नमक या भुना जीरा मिलाकर पिया जाए तो लूज मोशन में आराम मिल सकता है। यह शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। गर्मियों में छाछ शरीर को ठंडक देती है और डिहाइड्रेशन से बचाती है। यह हीट से जुड़ी परेशानियों में लाभकारी मानी जाती है। छाछ में कैल्शियम की अच्छी मात्रा होती है, जो हड्डियों और दांतों के लिए फायदेमंद है
दूध की तुलना में छाछ में फैट कम होता है। यह हल्का पेय है, जो पेट भरा रखने में मदद करता है और वजन नियंत्रण में सहायक हो सकता है। किडनी और शरीर की सफाई में भी छाछ मददगार होती है। छाछ शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने में सहायक मानी जाती है। यह किडनी के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हो सकती है आमतौर पर इसे गर्मियों का पेय माना जाता है, लेकिन सीमित मात्रा में सर्दियों में भी इसका सेवन किया जा सकता है।
छाछ पीने का सही तरीका और समय
सादे छाछ में भुना हुआ जीरा, काला नमक और पुदीना मिलाकर पिएं। जीरा और पुदीना लिवर के लिए अतिरिक्त रूप से फायदेमंद हैं। आप इसका सेवन दोपहर के भोजन के साथ कर सकते हैं। दोपहर में इसे पीने से सर्दी-खांसी का खतरा नहीं होता। रात के समय या बहुत ठंडा छाछ पीने से बचें।
डिस्क्लेमर
यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। यदि आपको कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, तो नियमित रूप से सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
