देश में तेजी से बढ़ती लिवर की बीमारियों को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बेहद महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। मंत्रालय ने देशवासियों को फैटी लिवर के शुरुआती खतरों से बचने के लिए ALT (Alanine Aminotransferase) टेस्ट कराने की नई और खास सलाह दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, खराब लाइफस्टाइल के कारण लोग अनजाने में फैटी लिवर का शिकार हो रहे हैं, जिसकी समय रहते पहचान केवल इस ब्लड टेस्ट के जरिए ही संभव है।
मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लोगों को लिवर की सेहत का ध्यान रखने की और लिवर से जुड़ी बीमारी का पता लगाने के लिए ALT टेस्ट कराने की सलाह दी है। इस टेस्ट के जरिए लीवर पर पड़ रहे शुरुआती तनाव या उसमें फैट जमा होने का पता लगाया जा सकता है। ये टेस्ट बॉडी में फैटी लीवर के लक्षण दिखने से पहले ही उसका पता लगा सकता है। मंत्रालय ने बताया एक साधारण ब्लड टेस्ट आपको लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों से एक कदम आगे रहने में मदद कर सकता है। चेतावनी संकेतों का इंतजार न करें, जागरूक रहें और स्वस्थ रहें।
ALT टेस्ट क्या है एक्सपर्ट से जानते हैं?
मुंबई के ग्लेनईगल्स हॉस्पिटल के हेपेटोलॉजी निदेशक, Dr Ameet Mandot के अनुसार लिवर शरीर के सबसे मेहनती अंगों में से एक है, जो हर दिन सैकड़ों जरूरी काम करता है। लेकिन लीवर की कई समस्याएं शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होती हैं।
मुंबई सेंट्रल स्थित वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स के लीवर ट्रांसप्लांट और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जन Dr Swapnil Sharma ने बताया कि ALT एक एंजाइम है जो खासतौर से लिवर की कोशिकाओं में पाया जाता है। एक्सपर्ट ने बताया जब लिवर में सूजन, चोट या किसी प्रकार का तनाव होता है तो ALT एंजाइम ब्लड में रिसने लगता है, जिससे इसका स्तर बढ़ जाता है। एक्सपर्ट ने बताया इस टेस्ट के जरिए लीवर से जुड़ी परेशानियों का पता लगाया जा सकता है। ये टेस्ट लिवर की स्थिति जानने के लिए एक शुरुआती चेतावनी संकेत के रूप में देखा जा सकता है। कई लीवर डिजीज बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होते हैं, इसलिए ALT की निगरानी गंभीर समस्या बनने से पहले खतरे का पता लगाने में मदद कर सकती है।
बढ़ा हुआ ALT लीवर की कौन-कौन सी बीमारियों का देता है संकेत
एक्सपर्ट के मुताबिक ALT का बढ़ा हुआ स्तर लिवर को होने वाले नुकसान के शुरुआती संकेतों में से एक हो सकता है। डॉ. मंडोत के मुताबिक ALT बढ़ने से कई गंभीर बीमारियों जैसे
- फैटी लिवर रोग
- मोटापे से जुड़ा लिवर डैमेज
- अत्यधिक शराब का सेवन
- वायरल हेपेटाइटिस
- कुछ दवाओं का प्रभाव
- मेटाबॉलिक डिजीज का पता लगाया जा सकता है।
एक्सपर्ट के मुताबिक ALT की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह थकान, पेट में असहजता या पीलिया जैसे लक्षण दिखाई देने से काफी पहले ही लिवर पर पड़ रहे तनाव का संकेत दे सकता है। डॉ. शर्मा ने बताया कि ALT रिपोर्ट असामान्य आने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को निश्चित रूप से लिवर की बीमारी है, लेकिन यह आगे की जांच और चिकित्सीय सलाह लेने का संकेत जरूर है।
किन लोगों को ALT टेस्ट खासतौर पर कराना चाहिए?
डॉ. शर्मा के अनुसार ये टेस्ट कुछ खास मेडिकल कंडीशन में कराना जरूरी है जैसे
- डायबिटीज के मरीज
- हाई कोलेस्ट्रॉल वाले लोग
- हाई ब्लड प्रेशर के मरीज
- नियमित रूप से शराब पीने वाले लोग
- अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त लोगों को ये टेस्ट जरूर कराना चाहिए।
- एक्सपर्ट ने बताया जिन लोगों की लिवर से जुड़ी फैमिली हिस्ट्री है या जो लोग लम्बे समय से दवाओं का सेवन कर रहे हैं, उन्हें भी ये टेस्ट जरूर कराना चाहिए। इस टेस्ट के अलावा लिवर की सेहत का पता लगाने के लिए एक्सपर्ट लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) कराते रहने की भी सलाह दी है। फैटी लिवर के बढ़ते मामलों को देखते हुए अब युवाओं को भी अपने लिवर का टेस्ट समय-समय पर जरूर कराना चाहिए, क्योंकि उनका लिवर भी अब सुरक्षित नहीं है।
लिवर को हेल्दी रखने के लिए क्या करें?
एक्सपर्ट ने बताया लिवर को हेल्दी रखने के लिए लिवर की समय-समय पर जांच कराना जरूरी है। एक साधारण ब्लड टेस्ट के जरिए ALT में होने वाले बदलावों का समय रहते पता लगाया जा सकता है। इससे लोगों को लाइफस्टाइल में सुधार करने और लीवर से जुड़ी बीमारियों जैसे लिवर फाइब्रोसिस, लिवर सिरोसिस और लिवर फेलियर जैसी मेडिकल इमरजेंसी से बचा जा सकता है।
लिवर को हेल्दी रखने के लिए इस तरह का रखें लाइफस्टाइल
- विशेषज्ञों का कहना है कि लिवर को हेल्दी रखना चाहते हैं तो आप अपना वजन कंट्रोल करें।
- वजन कंट्रोल करने के लिए बॉडी को एक्टिव रखना जरूरी है। बॉडी की एक्टिविटी के लिए आप वॉक और एक्सरसाइज पर ध्यान दें।
- नियमित शारीरिक गतिविधि करें
- शराब का सेवन सीमित करें
- संतुलित आहार का सेवन करें।
- डायबिटीज जैसी बीमारियों को कंट्रोल रखें
- नियमित हेल्थ चेकअप कराएं
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय या नई दिनचर्या शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
