उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि (Prostate Gland) का बढ़ना एक सामान्य समस्या है, लेकिन इसके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना सेहत पर भारी पड़ सकता है। अगर आपको भी दिन या रात के समय बार-बार पेशाब के लिए जाना पड़ता है, पेशाब की धार कमजोर महसूस होती है या रुक-रुक कर पेशाब आता है, तो सावधान हो जाने की जरूरत है। ये लक्षण बढ़े हुए प्रोस्टेट (BPH) के संकेत हो सकते हैं। VNA Hospital मालवीय नगर, नई दिल्ली में यूरोलॉजी एंड एंड्रोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. विनीत मल्होत्रा ने जनसत्ता को बताया पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने का मुख्य कारण उम्र के साथ होने वाले हार्मोनल बदलाव हैं। राहत की बात यह है कि हर मामले में सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती; शुरुआती दौर में दवाओं और सही लाइफस्टाइल में बदलावों से इसे प्रभावी ढंग से कंट्रोल किया जा सकता है। जानिए पेशाब में दिखने वाले वे 4 मुख्य बदलाव जिन्हें देखते ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और इसका बिना सर्जरी के कैसे इलाज संभव है।

बार-बार पेशाब आना सिर्फ प्रोस्टेट नहीं

डॉक्टर विनीत ने बताया बार-बार पेशाब आने या कम मात्रा में पेशाब होने की समस्या को सिर्फ प्रोस्टेट से जोड़ना सही नहीं है। डॉक्टर के मुताबिक, इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। बढ़ा हुआ प्रोस्टेट पेशाब के रास्ते में रुकावट पैदा कर सकता है, जिससे बार-बार पेशाब आने, पेशाब की धार कमजोर होने या पेशाब करने में दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं, यूरिन इंफेक्शन या पेशाब की नली में संकुचन (Stricture) होने पर भी पेशाब का फ्लो प्रभावित हो सकता है।

क्या है प्रोस्टेट और ये क्या काम करता है?

प्रोस्टेट एक छोटी ग्रंथि है, जो सिर्फ पुरुषों में होती है। यह प्रजनन तंत्र का हिस्सा है और सीमन में शामिल होने वाले कुछ महत्वपूर्ण पदार्थों का निर्माण करता है। उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट का आकार धीरे-धीरे बढ़ना आम है। हालांकि, हर व्यक्ति में इसके बढ़ने की गति और इससे होने वाले लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। किसी पुरुष में 50-60 की उम्र में लक्षण दिख सकते हैं, जबकि किसी को ज्यादा उम्र तक भी ये परेशानी नहीं होती।

उम्र बढ़ने पर क्यों बढ़ती है प्रोस्टेट की समस्या?

डॉक्टर के अनुसार, प्रोस्टेट का बढ़ना मुख्य रूप से उम्र बढ़ने की प्रक्रिया से जुड़ा है और इसमें पुरुष हार्मोन की भूमिका होती है। उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट में होने वाले बदलाव के कारण इसका आकार बढ़ सकता है। जब बढ़ा हुआ प्रोस्टेट पेशाब की नली पर दबाव डालता है, तो पेशाब से जुड़ी समस्याएं शुरू हो सकती हैं।

बढ़े हुए प्रोस्टेट और ब्लैडर की समस्या में क्या अंतर?

ब्लैडर में इंफेक्शन होने पर आमतौर पर बार-बार पेशाब आने जैसी समस्या हो सकती है, लेकिन बढ़ा हुआ प्रोस्टेट पेशाब के रास्ते में रुकावट भी पैदा कर सकता है। प्रोस्टेट ब्लैडर के नीचे स्थित होता है और पेशाब की नली के उस हिस्से को घेरता है जहां से पेशाब बाहर निकलता है। इसके बढ़ने पर पेशाब का रास्ता संकरा हो सकता है और पेशाब करने में दिक्कत हो सकती है।

प्रोस्टेट बढ़ने के लक्षण कौन-कौन से हैं

  1. पेशाब शुरू होने में देरी होना: बढ़े हुए प्रोस्टेट का एक लक्षण हिचकिचाहट (Hesitancy) है। इसमें व्यक्ति पेशाब करने के लिए जाता है, लेकिन तुरंत पेशाब शुरू नहीं होता। कुछ देर इंतजार करने के बाद पेशाब की धार शुरू होती है। इसके अलावा पेशाब की धार कमजोर या धीमी हो सकती है और कई बार पेशाब रुक-रुक कर भी आता है।
  2. पेशाब करने के बाद भी ब्लैडर खाली न होना:  प्रोस्टेट के कारण पेशाब का रास्ता बाधित होने पर ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हो पाता। व्यक्ति को पेशाब करने के कुछ समय बाद ही दोबारा पेशाब की इच्छा हो सकती है। ब्लैडर में पेशाब का बचा रहना लंबे समय तक समस्या बने रहने पर अन्य जटिलताओं का कारण भी बन सकता है।
  3. जलन और पेशाब में खून आना: बढ़े हुए प्रोस्टेट के साथ कुछ पुरुषों को पेशाब में जलन या यूरिन इंफेक्शन की समस्या हो सकती है। गंभीर स्थिति में पेशाब में खून भी दिखाई दे सकता है। अगर पेशाब के रास्ते में रुकावट बहुत ज्यादा हो जाए तो ब्लैडर पर दबाव बढ़ सकता है और कुछ मामलों में किडनी पर भी असर पड़ सकता है। लंबे समय तक रुकावट रहने पर ब्लैडर में पथरी बनने का खतरा भी बढ़ सकता है।
  4. रात में बार-बार पेशाब आना भी हो सकता है संकेत: बढ़ा हुआ प्रोस्टेट दिन और रात दोनों समय पेशाब की फ्रीक्वेंसी बढ़ा सकता है। रात में बार-बार पेशाब के लिए उठने की समस्या को नोक्टूरिया (Nocturia) कहा जाता है। हालांकि, रात में बार-बार पेशाब आना सिर्फ प्रोस्टेट की वजह से नहीं होता। डायबिटीज, यूरिन इंफेक्शन, ज्यादा तरल पदार्थ लेना और कुछ अन्य स्थितियां भी इसकी वजह हो सकती हैं।

सिर्फ उम्र नहीं, डाइट और लाइफस्टाइल भी मायने रखते हैं

प्रोस्टेट के बढ़ने में उम्र प्रमुख कारक है, लेकिन डॉक्टर ने डाइट को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, ज्यादा फैट वाली डाइट प्रोस्टेट की समस्याओं और प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम से जुड़ी हो सकती है। हालांकि, प्रोस्टेट का सामान्य रूप से बढ़ना और प्रोस्टेट कैंसर दो अलग स्थितियां हैं। हर बढ़ा हुआ प्रोस्टेट, कैंसर नहीं होता।

कैसे पता चलता है कि प्रोस्टेट बढ़ा हुआ है?

प्रोस्टेट की समस्या की जांच के लिए डॉक्टर मरीज के लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर अलग-अलग टेस्ट करा सकते हैं। अल्ट्रासाउंड से प्रोस्टेट का आकार और ब्लैडर में पेशाब कितना बचा है, इसकी जानकारी मिल सकती है। इसके अलावा यूरोफ्लोमेट्री के जरिए पेशाब की धार और उसके फ्लो की गति को मापा जाता है।

PSA टेस्ट क्या बताता है?

PSA (Prostate-Specific Antigen) एक ब्लड टेस्ट है, जिसका इस्तेमाल प्रोस्टेट से जुड़ी स्थितियों के आकलन में किया जाता है। PSA बढ़ने का मतलब अपने आप प्रोस्टेट कैंसर होना नहीं है। बढ़ा हुआ PSA प्रोस्टेट के बढ़ने, सूजन या अन्य कारणों से भी हो सकता है। इसलिए PSA की रिपोर्ट को मरीज की उम्र, लक्षणों और अन्य जांचों के साथ डॉक्टर समझते हैं।

प्रोस्टेट बढ़ना और कैंसर एक ही बीमारी नहीं

प्रोस्टेट का उम्र के साथ बढ़ना काफी आम है, जबकि प्रोस्टेट कैंसर अलग बीमारी है और हर पुरुष में नहीं होता। इसलिए प्रोस्टेट बढ़ने का मतलब कैंसर होना नहीं है। अगर डॉक्टर को कैंसर का संदेह होता है तो PSA सहित अन्य जांचों और जरूरत पड़ने पर आगे की जांच के आधार पर इसका पता लगाया जाता है।

क्या बढ़े हुए प्रोस्टेट के साथ सामान्य जिंदगी जी सकते हैं?

डॉक्टर के मुताबिक, अगर बढ़े हुए प्रोस्टेट के कारण होने वाले लक्षण दवाओं से कंट्रोल हो जाते हैं तो कई मरीजों को किसी अन्य प्रक्रिया की जरूरत नहीं पड़ती। जिन मरीजों में दवाओं से पर्याप्त फायदा नहीं होता या पेशाब की रुकावट गंभीर होती है, उनमें प्रोसीजर या सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। प्रोस्टेट का बढ़ना और दवाओं का असर व्यक्ति-दर-व्यक्ति काफी अलग हो सकता है।

इलाज के आधुनिक विकल्प भी मौजूद

प्रोस्टेट की समस्या के इलाज में पिछले कुछ वर्षों में कई बदलाव आए हैं। डॉक्टर ने Rezum, UroLift और iTIND जैसे कम इनवेसिव विकल्पों का जिक्र किया। Rezum में भाप की मदद से प्रोस्टेट के बढ़े हुए हिस्से का उपचार किया जाता है, जबकि UroLift में छोटे इम्प्लांट की मदद से पेशाब के रास्ते पर पड़ने वाली रुकावट को कम किया जाता है। iTIND एक अस्थायी डिवाइस के जरिए पेशाब के रास्ते को खोलने में मदद करता है। हालांकि, किस मरीज के लिए कौन-सा उपचार सही है, यह प्रोस्टेट के आकार, लक्षणों और अन्य मेडिकल स्थितियों पर निर्भर करता है।

इस बात का रखें ध्यान

चाय-कॉफी और ज्यादा पानी से बढ़ सकती है समस्या। चाय और कॉफी जैसे कैफीन वाले पेय, शराब और शाम के बाद ज्यादा मात्रा में पानी पीने से बार-बार पेशाब आने की समस्या बढ़ सकती है। कुछ लोगों में बहुत मसालेदार भोजन भी पेशाब संबंधी लक्षणों को बढ़ा सकता है। इसलिए जिन पुरुषों को पहले से प्रोस्टेट या पेशाब संबंधी समस्या है, उन्हें यह देखना चाहिए कि कौन-सी चीजें उनके लक्षणों को बढ़ा रही हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जागरूकता और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी यूरोलॉजिस्ट के सुझावों और चिकित्सीय सिद्धांतों पर आधारित है। पेशाब से जुड़ी समस्याएं या प्रोस्टेट का बढ़ना किसी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है, इसलिए कोई भी दवा लेने या घरेलू उपाय अपनाने से पहले किसी योग्य यूरोलोजिस्ट से परामर्श जरूर लें।