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Effect of Aging: बढ़ती उम्र के साथ बढ़ जाता है इन बीमारियों का खतरा, एक्सपर्ट से जानिए कैसे रखें सीनियर सिटीजन का ख्याल

उम्र के बढ़ने पर शरीर और दिमाग कमजोर हो जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट से जानिए उम्र के बढ़ने पर होने वाली बीमारियां (Diseases in Ageing) कौन-कौन सी हैं।

Effect of Aging: बढ़ती उम्र के साथ बढ़ जाता है इन बीमारियों का खतरा, एक्सपर्ट से जानिए कैसे रखें सीनियर सिटीजन का ख्याल
Alzheimer's Disease: उम्र के बढ़ने पर शरीर और दिमाग कमजोर हो जाता है। (Image: Freepik)

EFFECT OF AGING ON MENTAL HEALTH: बढ़ती उम्र का लोगों के मेंटल हेल्थ पर अच्छा खासा असर होता है। बुजुर्गों में कई तरह की न्यूरोलॉजिकल और साइकोलॉजिकल समस्याएं डेवलप होती हैं। न्यूरोलॉजिकल और साइकोलॉजिकल बदलाव को बढ़ती उम्र की सामान्य घटना नहीं मानी जा सकती है। इसे बीमारी के रूप में पहचान और वर्गीकृत करना जरूरी होता है। बुजुर्गों के लिए फिजिकल हेल्थ के अलावा मेंटल हेल्थ भी बहुत जरूरी होता है, तभी वे खुशहाल जीवन जी सकते हैं। आइए उनके मेंटल हेल्थ के बारे में जानते हैं केयर फॉर पैरेंट्स डॉट इन के को-फाउंडर और सर्जन डॉक्टर अमन खेरा से-

उम्र का असर लोगों के नर्वस सिस्टम पर होता है। इसके कारण दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड में प्रोग्रेसिव और डी-जेनरेटिव बदलाव देखा जाता है। नर्व सेल या तो पूरी तरह काम करना बंद कर देता है या फिर खत्म हो जाती है। नसों में इंपल्स ट्रांसमिशन धीमी हो जाती है जिसके कारण सेंसेशन और याददाश्त पर असर होता है। हर किसी में यह बदलाव अलग-अलग होते हैं।

बहुत कॉमन होती है बुजुर्गों में अल्जाइमर और डिमेंशिया की बीमारी (Alzheimer’s and Dementia)

जनसत्ता डॉट कॉम से बातचीत में डॉक्टर अमन खेरा ने बताया कि बुजुर्गों में अल्जाइमर और डिमेंशिया की बीमारी बहुत कॉमन होती है। डिमेंशिया की बीमारी में नई चीजों को सीखने की क्षमता घट जाती है। अल्जाइमर की समस्या दिमाग के बाहरी लेयर जिसे कॉर्टेक्स कहते हैं, उसमें प्लॉक निर्माण से संबंधित है। ये ऐसी समस्याएं हैं जो पूरी तरह ठीक नहीं हो पाती हैं। इसके अलावा क्रोनिक बीमारी जैसे डायबिटीज का भी नर्वस सिस्टम पर असर होता है। अगर किसी भी क्रोनिक बीमारी के लिए लंबी अवधि तक दवाई का सेवन किया जाता है तो उससे भी न्यूरोलॉजिकल नुकसान होता है।

20 से 25 प्रतिशत बुजुर्ग डिप्रेशन से प्रभावित (Effect of Aging and Depression)

डॉक्टर अमन के मुताबिक बुजुर्गों में डिप्रेशन, सिजोफ्रेनिया, बाय-पोलर डिसऑर्डर जैसी कुछ साइकोलॉजिकल समस्याएं बहुत कॉमन होती हैं। डिप्रेशन बहुत कॉमन समस्या है जिससे 20-25 फीसदी बुजुर्ग प्रभावित हैं। इसके लक्षण की बात करें तो दोस्त और परिवार से दूरी बन जाना, किसी काम में मन नहीं लगना, अच्छी एक्टिविटी से दूरी बनाना, लगातार दुखी रहना और हमेशा अपराध बोध का होना होता है। अगर यह समस्या बढ़ जाती है तो कई बार खुदकुशी करने का भी मन करने लगता है।

धीरे-धीरे विकसित होते हैं न्यूरोलॉजिकल या साइकोलॉजिकल डिस-ऑर्डर (Neurological and Psychiatric Disorders)

डॉक्टर अमन खेरा ने बताया कि अगर किसी बुजुर्ग में न्यूरोलॉजिकल या साइकोलॉजिकल डिस-ऑर्डर है तो इसकी पहचान करना और फिर इसका इलाज कराना जरूरी होता है। इसकी पहचान करना कठिन होता है, क्योंकि इसके लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं। कई बार ऐसा होता है कि बीमारी के लक्षण को पहचान नहीं पाते हैं और इसे कमजोरी या किसी दूसरी बीमारी का लक्षण मान लिया जाता है। ऐसे बदलावों को कई बार लाइफस्टाइल में बदलाव का कारण भी मान लिया जाता है।

ऐसी स्थिति में करें डॉक्टर से संपर्क

डॉक्टर अमन खेरा के मुताबिक लक्षण में इस तरह का कोई बदलाव बीमारी है या फिर इसकी कुछ और वजह है, यह पहचान केवल न्यूरोलॉजिस्ट या साइकोलॉजिस्ट और साइकियाट्रिक ही कर सकते हैं। अगर किसी में ऐसे लक्षण पाए जाते हैं तो इसे इग्नोर नहीं करें और डॉक्टर से संपर्क करें। इन बीमारियों को टैबू के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अगर समय पर साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर की पहचान कर ली जाती है तो साइकोलॉजिस्ट की मदद से इसे समय पर ठीक किया जा सकता है। हालांकि, इसमें पारिवार के सहयोग की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

हेल्थ के साथ मेंटल हेल्थ जरूरी (Importance of Mental Health)

डॉक्टर अमन खेरा ने जनसत्ता डॉट कॉम से बातचीत में बताया कि कई बार बुजुर्गों की देखभाल के लिए केयर टेकर की भी जरूरत होती है जो उनके साथ हमेशा रहे। इन बीमारी से पीड़ित लोग दूसरों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके लिए भी केयर टेकर की जरूरत होती है। परिवार के लोगों की यह जिम्मेदारी बनती है कि उनके साथ लगातार बातचीत करते हैं। उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जाए। उन्हें किसी ना किसी एक्टिविटी में उलझाए रखा जाए। ऐसे लोगों के साथ प्यार और धैर्य के साथ पेश आने की जरूरत होती है। बुजुर्ग लोगों के लिए फिजिकल हेल्थ के अलावा मेंटल हेल्थ भी जरूरी होता है, तभी वे खुशहाल रह सकते हैं।

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First published on: 28-09-2022 at 03:19:47 pm
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