कैंसर एक ऐसी गंभीर बीमारी है जिसके शुरुआती लक्षणों को अक्सर लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, और यही लापरवाही बाद में बड़े खतरे का कारण बन जाती है। कोलन कैंसर यानी मलाशय का कैंसर भी एक ऐसा ही साइलेंट किलर है, जिसके शुरुआती संकेत हमारे पाचन तंत्र और मल त्याग (Bowel Movements) की आदतों में बदलाव के रूप में दिखाई देने लगते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, अगर समय रहते इन सूक्ष्म बदलावों को पहचान लिया जाए, तो इस बीमारी का न सिर्फ सफल इलाज संभव है, बल्कि मरीज की जान भी बचाई जा सकती है।
धर्मशिला नारायण सुपरस्पेशलिटी अस्पताल दिल्ली में सीनियर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. नीरज गोयल ने बताया कि बॉडी में दिखने वाले कुछ बदलाव कोलन कैंसर का संकेत हो सकते हैं। अगर समय रहते उन्हें समझ लिया जाए तो आसानी से बीमारी को मात दी जा सकती है।
क्या होता है कोलन कैंसर?
कोलन कैंसर बड़ी आंत (कोलन) की अंदरूनी परत में शुरू होने वाला कैंसर है। शुरुआत में यह आंत की भीतरी सतह पर विकसित होता है और समय के साथ गहराई तक फैल सकता है। अगर शुरुआती अवस्था में इसकी पहचान हो जाए, तो इलाज की सफलता की संभावना काफी अधिक रहती है।
कम उम्र में कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के WONDER डेटाबेस के अनुसार, वर्ष 1999 से 2020 के बीच 10 से 44 वर्ष की आयु के लोगों में कोलोरेक्टल यानी कोलन और रेक्टम कैंसर के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं अमेरिकन कैंसर सोसायटी की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, कोलोरेक्टल कैंसर के हर पांच मरीजों में से एक की उम्र 55 साल से कम होती है। हालांकि इस बीमारी की सटीक वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि आनुवंशिक कारणों के साथ-साथ बदलता लाइफस्टाइल, असंतुलित खानपान और पर्यावरणीय कारक भी इसके बढ़ते मामलों के पीछे अहम भूमिका निभा सकते हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक कोलन कैंसर के बढ़ते मामलों के लिए कुछ कारण जिम्मेदार हो सकते हैं जैसे
- परिवार में कोलन कैंसर की फैमिली हिस्ट्री होना।
- अधिक वजन या मोटापा होना।
- रेड मीट और प्रोसेस्ड मीट का अधिक सेवन करना।
- अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और शक्कर युक्त खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन।
- धूम्रपान और शराब का सेवन करना।
- शारीरिक गतिविधि की कमी होना शामिल है।
कोलन कैंसर के मल में दिखने वाले शुरुआती लक्षण
धर्मशिला नारायणा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, नई दिल्ली के सीनियर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. नीरज गोयल के अनुसार मल त्याग की आदतों में बदलाव होना कोलन कैंसर के संकेत हो सकते हैं। लगातार कब्ज रहना, बार-बार दस्त होना या मल त्याग की आदतों में अचानक बदलाव आना कोलन कैंसर के शुरुआती लक्षणों में शामिल हो सकता है। मल में खून आना, काला मल या मल में म्यूकस (बलगम) आना गंभीर संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
कोलन कैंसर के पाचन से जुड़े लक्षण
अक्सर लोग कोलन कैंसर के लक्षणों को पाचन से जुड़ी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। अगर लंबे समय तक पेट में दर्द, गैस, ऐंठन या पेट पूरी तरह साफ न होने का एहसास बना रहे तो इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करें और तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं। पाचन से जुड़ी ये समस्याएं आम परेशानी नहीं बल्कि गंभीर कोलन कैंसर के लक्षण हो सकते हैं।
भूख कम लगना
अगर आपको बिना किसी कारण के भूख कम लग रही है तो इसे नजरअंदाज नहीं करें तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। पाचन से जुड़ी परेशानियों से साथ भूख का कम लगना कोलन कैंसर का संकेत हो सकते हैं।
बिना वजह तेजी से वजन कम होना
अगर बिना डाइटिंग या अधिक व्यायाम के आपका वजन लगातार कम हो रहा है, तो यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं।
कमजोरी और थकान होना
कोलन कैंसर के कारण शरीर में धीरे-धीरे खून की कमी हो सकती है, जिससे कमजोरी, थकान, चक्कर आना और सांस फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
कोलन कैंसर की जांच कैसे होती है?
यदि डॉक्टर को कोलन कैंसर का संदेह होता है, तो वे कोलोनोस्कोपी कराने की सलाह देते हैं। इस जांच के दौरान बड़ी आंत के अंदर कैमरे की मदद से जांच की जाती है और जरूरत पड़ने पर बायोप्सी भी ली जाती है। इसके अलावा खून की जांच, सीटी स्कैन, एमआरआई और दूसरी जांच की भी आवश्यकता पड़ सकती है।
कब तुरंत डॉक्टर से मिलें?
यदि मल में खून आए, लगातार कब्ज या दस्त रहे, बिना वजह वजन घटे, पेट दर्द लंबे समय तक बना रहे या एनीमिया के लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट या ऑन्कोलॉजिस्ट से सलाह लें। शुरुआती पहचान से इस बीमारी का इलाज अधिक प्रभावी हो सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दी गई जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। यदि आपको बताए गए लक्षण दिखाई दें, तो स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
