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पेट भर भोजन और बुनियादी सुविधाएं मिलना हो प्राथमिकता

कोरोना महामारी का दूसरा दौर कमजोर होने के बाद सरकारों के पास एक बार फिर से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने का अवसर मिला है।

सांकेतिक फोटो।

मनोज कुमार मिश्र

कोरोना महामारी का दूसरा दौर कमजोर होने के बाद सरकारों के पास एक बार फिर से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने का अवसर मिला है। साथ ही अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाकर रोजगार के अवसर बढ़ाकर लोगों के आर्थिक संकट को दूर करने की चुनौती भी सरकारों के सामने है। इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार ने इस साल दिवाली (नवंबर) तक 80 करोड़ लोगों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत मुफ्त अनाज देने का फैसला किया है। उसी योजना के तहत दिल्ली के करीब 73 लाख लोगों को मुफ्त अनाज देने के लिए 37,400 मीट्रिक टन अनाज हर महीने दिल्ली सरकार को दिया जा रहा है। इस पर 1163 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी गई।

इस योजना में केंद्र में शासन कर रही भाजपा और दिल्ली में काबिज आम आदमी पार्टी(आप) के नेता एक दूसरे पर आरोप लगा कर अपने पक्ष को सही साबित करने में लगे हुए हैं। आप सरकार का दावा था कि वे राशन माफिया को खत्म करने के लिए घर-घर राशन योजना लागू करना चाहते हैं। भाजपा का आरोप है कि दिल्ली सरकार जिस राशन माफिया से गरीब लोगों के राशन को बचाने के लिए पैकेट बनवाकर गरीब के घर पहुंचाना चाहते हैं, सात साल में उस माफिया के खिलाफ उसने क्या कारवाई की? जिस तंत्र से राशन घर पहुंचाया जाएगा, उसमें भ्रष्टाचार न होने की गारंटी कौन लेगा? जबरन इस योजना में बिचौलिए को लाने का क्या तुक है। इससे गरीब कल्याण योजना में भ्रष्टाचार होने का अवसर देने से किसका लाभ होगा? अगर दिल्ली पर माफिया काबिज हैं तो कौन-कौन शामिल हैं? दिल्ली में एक देश एक राशन कार्ड योजना लागू क्यों नहीं की है?

कोरोना संकट के समय सरकार की पूरी ताकत लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में लगी रही। देश भर में और दिल्ली में बड़ी तादाद में मौत आॅक्सीजन न मिल पाने के कारण भी हुई। केंद्र सरकार के सहयोग से दिल्ली में भी आॅक्सीजन की कमी दूर हुई। अस्थायी अस्पताल बने। अब समय है कि दिल्ली में अस्पतालों की कमी दूर की जाए। दिल्ली सरकार का सारा फोकस दिल्ली की मूलभूत ढांचे को विकसित करने पर होना चाहिए। बार-बार घोषणा करके भी डीटीसी (दिल्ली परिवहन निगम) की बसों की संख्या नहीं बढ़ पा रही है।

दिल्ली मेट्रो के चौथे चरण के काम में देरी की गई। मेट्रो अपनी क्षमता के मुताबिक सामान्य दिनों में हर रोज करीब 28 लाख लोग सफर करते हैं। बावजूद इसके दिल्ली में आमजन की सवारी तो डीटीसी ही है। यही हाल सरकारी स्कूलों और अस्पतालों का है। सड़कें ठीक करवाना, फ्लाईओवरों समेत अनेक अधूरे निर्माण कार्यों को पूरा करवाने की प्राथमिकता होनी चाहिए। शिक्षा का मूलभूत ढांचा ठीक करने शिक्षा संस्थानों की संख्या बढ़ाए जाने से ही दिल्ली के बच्चों का भविष्य बेहतर हो सकता है।

इन सभी पर ध्यान देने के बजाय वोट की राजनीति होने लगी है। अगले साल के शुरू में दिल्ली के तीनों नगर निगमों के चुनाव होने वाले हैं। लगातार तीन बार से निगमों में भाजपा काबिज है। केंद्र में भाजपा की अगुआई वाली सरकार, दिल्ली में आप की सरकार और निगमों में भाजपा का शासन, लगातार टकराव के कारण बने हुए हैं। दिल्ली की राजनीति में कांग्रेस को हाशिए पर पहुंचाने वाली आप की सारी कोशिश निगम चुनावों को जीतने की होगी, इसलिए वह हर मुद्दे पर राजनीति करने लगी है। अभी जरूरत गरीबों को अनाज उपलब्ध कराना है जिससे दिल्ली में कोई भूखा न सोए। यह मुद्दा तो राजनीति से अलग होना चाहिए था।

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