क्या आप जानते हैं कि आपके आसपास मौजूद सहजन (Drumstick/Moringa) का पेड़, उसके पत्ते, टहनियां सभी हिस्से सेहत का खजाना समेटे हुए है। आयुर्वेद में सहजन की पत्तियों को एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और मिनरल्स का बेहतरीन स्रोत माना गया है। अक्सर लोग इसे साधारण पत्तियां समझ कर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन सही तरीके से इसका सेवन करने से बॉडी को फायदा होता है। इन पत्तों को उबालकर उसका पानी बनाकर पीने से इम्युनिटी बूस्ट होती है और पाचन में सुधार होता है। आयुर्वेदिक डॉक्टर रूपाली जैन के मुताबिक सहजन की पत्तियां, उसकी जड़ सब औषधीय गुणों से भरपूर हैं, इनका सेवन काढ़ा बनाकर सही तरीके से करें तो इसका फायदा मिलता है। आइए आयुर्वेदिक एक्सपर्ट से जानते हैं कि सहजन के पत्तों में कौन-कौन से गुण मौजूद हैं और ये पत्ते कैसे सेहत को फायदा पहुंचाते हैं और इसका सेवन कैसे करें।
आयुर्वेद के मुताबिक सहजन के पत्तों के गुण
सहजन, जिसे मोरिंगा (Moringa) और अंग्रेजी में Drumstick Plant कहा जाता है, भारतीय खानपान में लंबे समय से इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। इसकी फलियों की सब्जी, सूप और दाल में इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसके पत्तों का भी सेवन किया जाता है। आयुर्वेदिक परंपरा में सहजन के अलग-अलग हिस्सों जैसे पत्ते, फलियां, छाल और जड़ को औषधि के रूप में सेवन किया जाता रहा है। मोरिंगा में मौजूद पोषक तत्वों की बात करें तो इसमें पोटैशियम, कैल्शियम और विटामिन ए जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें एंटीऑक्सीडेंट यौगिक भी मौजूद होते हैं जिसकी वजह से इसे सुपर फूड कहा जाता है।
सहजन की तासीर कैसी होती है?
आयुर्वेद के मुताबिक सहजन को लघु, रूक्ष और तीक्ष्ण गुणों वाला माना जाता है जिसकी तासीर गर्म होती है। आयुर्वेद के मुताबिक यह पत्ते वात और कफ को कम करते हैं,जबकि पित्त को बढ़ा सकते है। इसलिए जिन लोगों को शरीर में ज्यादा गर्मी, जलन या अत्यधिक पसीना आने जैसी समस्या रहती है, उन्हें इसका सेवन करते समय सावधानी रखना चाहिए।
सहजन के पत्ते सेहत पर कैसा करते हैं असर?
आयुर्वेद के मुताबिक सहजन के पत्तों का सेवन करने से पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है। यह पत्ते अग्नि को बढ़ाने, भूख में सुधार करने और भोजन के पाचन में मदद करते हैं। जिन लोगों को भूख कम लगती है या खाने का स्वाद कम महसूस होता है, उनके लिए ये पत्ते असरदार साबित होते हैं। पेट में कीड़ों की समस्या में सहजन के पत्ते असरदार साबित होते हैं।आयुर्वेद में सहजन का इस्तेमाल कृमि यानी आंतों के कीड़ों से जुड़ी समस्या में भी असरदार बताया गया है। सहजन की फलियों के रस को मिश्री के साथ खाने से पेट के कीड़ों की समस्या कंट्रोल रहती है। इन पत्तों का सेवन वजन को कंट्रोल करने में भी असरदार साबित होता है। सहजन को शरीर में बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल और फैट डिपोजिशन को कम करने में मददगार बताया गया है। आयुर्वेद के मुताबिक मोरिंगा के पत्ते जोड़ों के दर्द और सूजन को कंट्रोल करने में भी असरदार साबित होते हैं।
इसके पत्तों का लेप बाहरी रूप से लगाने से गठिया या लगातार होने वाले जोड़ों के दर्द से राहत मिलती है। ये पत्ते दिल के रोगों का इलाज करने में भी असरदार साबित होते हैं। इनका सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल रहता है और दिल हेल्दी रहता है। महिलाओं को पीरियड के दौरान होने वाले दर्द, अनियमित पीरियड और कम फ्लो जैसी समस्याओं में भी ये पत्ते असरदार साबित होते हैं। इसके अलावा पीसीओएस, पीसीओडी और गर्भाशय में फाइब्रॉएड जैसी स्थितियों में भी इसका सेवन असरदार साबित होता है। आयुर्वेद में सिर में भारीपन, सिरदर्द, चक्कर और नाक बंद होने जैसी कुछ स्थितियों में शीघ्रू के बीज या पत्तों से तैयार तेल को नाक में लगाने से फायदा होता है।
सहजन पाउडर का सेवन कैसे और कितनी मात्रा में करें?
अगर आप सहजन के पाउडर का सेवन करना चाहते हैं तो आप 1–3 ग्राम मात्रा का सेवन शुरुआत में करें। आप मात्रा बढ़ाकर लगभग 5 ग्राम तक कर सकते हैं। इसे गुनगुने पानी में मिलाकर पी सकते हैं। अगर सहजन पाउडर का स्वाद पसंद नहीं है, तो डॉक्टर के अनुसार इसे पानी में मिलाकर नींबू का रस डाल सकते हैं। इसे छाछ में मिलाकर सेंधा नमक और भुना जीरा डालकर भी इसका सेवन कर सकते हैं।
किन लोगों को सहजन का सेवन करते समय बरतना चाहिए सावधानी
सहजन की सब्जी को हफ्ते में एक-दो बार भोजन में शामिल करना सेहत के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसका बहुत अधिक मात्रा में सेवन करने से बॉडी में गर्मी, जलन या पित्त से जुड़ी परेशानी हो सकती है। जिन लोगों का पित्त अधिक है या जिन्हें शरीर में गर्मी और जलन की शिकायत रहती है, उन्हें सहजन का सेवन सावधानी से करना चाहिए। इसके अलावा गर्भावस्था, स्तनपान, बच्चों, किसी गंभीर बीमारी या नियमित दवाएं लेने वाले लोगों को सहजन के पाउडर, अर्क या सप्लीमेंट की मात्रा तय करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: सहजन के पत्तों और पाउडर से जुड़े कई स्वास्थ्य लाभ आयुर्वेदिक मान्यताओं और सीमित वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित हैं। इन्हें किसी बीमारी के इलाज या डॉक्टर द्वारा दी गई दवा का विकल्प न मानें। किसी स्वास्थ्य समस्या, गर्भावस्था, स्तनपान या नियमित दवाओं के सेवन की स्थिति में डॉक्टर की सलाह से ही इसका इस्तेमाल करें।
