Walking Benefits For Brain: अच्छी सेहत के लिए रोजाना सुबह या शाम पैदल चलना बेहद फायदेमंद माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वॉक करने का असर केवल आपके शरीर पर ही नहीं, बल्कि आपके दिमाग पर भी पड़ता है? अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि क्या महज रोजाना टहलने से याददाश्त मजबूत हो सकती है और दिमाग तेज हो सकता है? वैज्ञानिक रिसर्च और न्यूरोलॉजिस्ट के मुताबिक नियमित वॉक करने से मस्तिष्क में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, जिससे ब्रेन सेल्स को ऑक्सीजन मिलती है और कॉग्निटिव फंक्शन बेहतर होता है। 

फोर्टिस अस्पताल, फरीदाबाद में न्यूरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. विनीत बंगा ने जनसत्ता को बताया रोजाना वॉक करना ब्रेन हेल्थ के लिए कई तरह से फायदेमंद हो सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि से शरीर में ब्लड फ्लो बेहतर होता है, जिसका सकारात्मक असर ब्रेन तक पहुंचने वाले ब्लड और ऑक्सीजन की आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा एक्सरसाइज के दौरान शरीर में ऐसे केमिकल और न्यूरोट्रांसमीटर रिलीज होते हैं, जो मूड, फोकस और नींद को बेहतर करने में मदद कर सकते हैं। इन सभी कारणों से नियमित वॉकिंग को ब्रेन हेल्थ के लिए उपयोगी माना जाता है। आइए एक्सपर्ट से समझते हैं कि पैदल चलना हमारे न्यूरोलॉजिकल सिस्टम पर किस तरह काम करता है और रोजाना कितनी देर वॉक करना दिमाग के लिए फायदेमंद है।  

रोजाना वॉक करने से ब्रेन हेल्थ पर क्या असर होता है? रिसर्च और डॉक्टर की राय

जर्नल ऑफ़ अल्जाइमर डिजीज और Frontiers in Neuroscience में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक वॉक करने से शरीर में BDNF (Brain-Derived Neurotrophic Factor) नामक प्रोटीन का स्तर तुरंत बढ़ जाता है। BDNF को दिमाग का फर्टिलाइजर यानी खाद कहा जाता है। यह नई न्यूरॉन्स यानी मस्तिष्क कोशिकाओं को बनाने, पुरानी कोशिकाओं की मरम्मत करने और न्यूरोप्लास्टिसिटी (Brain Plasticity) को मजबूत करने में मदद करती है।डॉक्टर विनीत ने बताया नियमित वॉकिंग से ब्रेन की कार्यक्षमता को सपोर्ट मिल सकता है। वॉक करने से बेहतर ब्लड फ्लो, अच्छी नींद और तनाव में कमी जैसे प्रभाव दिखते हैं जिससे ध्यान केंद्रित करने और रोजमर्रा के मानसिक काम करने की क्षमता पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। लंबे समय तक नियमित शारीरिक गतिविधि ब्रेन के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

बढ़ती उम्र में कॉग्निटिव डिक्लाइन की रफ्तार हो सकती है धीमी

उम्र बढ़ने के साथ सोचने-समझने और याददाश्त से जुड़ी क्षमताओं में कुछ बदलाव आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, शारीरिक गतिविधि और हेल्दी लाइफस्टाइल इन बदलावों की रफ्तार को कम रखने में मदद कर सकते हैं। डॉक्टर के अनुसार, दो समान उम्र के लोगों की शारीरिक और मानसिक सक्रियता में अंतर उनकी जेनेटिक्स के साथ-साथ डाइट, एक्सरसाइज, नींद और पर्यावरण जैसे कारकों से भी प्रभावित हो सकता है।

क्या वॉकिंग से डिमेंशिया और अल्जाइमर का जोखिम कम हो सकता है?

नियमित शारीरिक गतिविधि को बेहतर ब्रेन हेल्थ और उम्र बढ़ने के साथ होने वाली cognitive decline के कम जोखिम से जोड़ा गया है। वॉकिंग जैसी गतिविधियां डिमेंशिया और अल्जाइमर के जोखिम को पूरी तरह खत्म नहीं करतीं, लेकिन एक्टिव लाइफस्टाइल इनके जोखिम को कम करने में महत्यपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति में बीमारी विकसित होती भी है, तो हेल्दी लाइफस्टाइल उसकी ओवरऑल हेल्थ को बनाए रखने में मदद कर सकता है।

ब्रेन हेल्थ के लिए कैसी वॉक ज्यादा फायदेमंद?

डॉक्टर विनीत के अनुसार, सिर्फ सामान्य गति से थोड़ी देर टहलना और एक्सरसाइज के उद्देश्य से की जाने वाली वॉक अलग हो सकती है। ब्रिस्क वॉकिंग में व्यक्ति अपनी सामान्य चाल की तुलना में तेज गति से चलता है और उसकी सांस व हृदय गति कुछ बढ़ सकती है। हालांकि, तेज चलने की क्षमता हर व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार अलग होती है। इसलिए जितनी तेज गति व्यक्ति आराम से और सुरक्षित तरीके से चल सकता है, उसी गति से चलना बेहतर है।

हफ्ते में कितने दिन और कितनी देर करें वॉक?

डॉक्टर ने बताया करीब 20–30 मिनट की ब्रिस्क वॉकिंग, हफ्ते में कम से कम 5 दिन जरूर करें। हालांकि, एक्सरसाइज की अवधि और तीव्रता व्यक्ति की उम्र, फिटनेस और किसी मौजूदा बीमारी के अनुसार अलग हो सकती है। जो लोग लंबे समय से शारीरिक गतिविधि नहीं करते हैं, उन्हें धीरे-धीरे शुरुआत करके अपनी क्षमता के अनुसार गतिविधि बढ़ानी चाहिए।

वॉकिंग का असर मूड और तनाव पर कैसे करता है असर

वॉकिंग का फायदा सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। नियमित एक्सरसाइज तनाव कम करने, मूड बेहतर करने और नींद को सपोर्ट करने में मदद कर सकती है। डॉक्टर के अनुसार, वॉकिंग के बाद व्यक्ति खुद को अधिक सक्रिय महसूस कर सकता है और नियमित रूप से एक्सरसाइज करने पर स्टैमिना तथा रोजमर्रा की गतिविधियों को करने की क्षमता में भी सुधार महसूस हो सकता है।

ब्रेन हेल्थ पर वॉकिंग के शॉर्ट और लॉन्ग टर्म फायदे

वॉकिंग के कुछ फायदे नियमित गतिविधि शुरू करने के बाद धीरे-धीरे महसूस हो सकते हैं, जैसे शरीर का अधिक सक्रिय रहना, स्टैमिना बढ़ना और नींद में सुधार। वहीं लंबे समय तक नियमित शारीरिक गतिविधि करने से ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, वजन और हृदय स्वास्थ्य जैसे कई कारकों को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद मिल सकती है। ये सभी कारक अप्रत्यक्ष रूप से ब्रेन हेल्थ को भी प्रभावित करते हैं।

लंबे समय तक बैठे रहना क्यों हो सकता है नुकसानदायक?

दिनभर लंबे समय तक बैठे रहना स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं माना जाता। लंबे समय तक निष्क्रिय रहने से शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है और इससे मेटाबॉलिक तथा हृदय संबंधी स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसलिए सिर्फ एक समय की वॉक पर निर्भर रहने के बजाय पूरे दिन में बैठे रहने का समय कम करना और बीच-बीच में सक्रिय रहना भी जरूरी है।

सिटिंग जॉब वालों को क्या करना चाहिए?

जो लोग ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, वे काम के बीच छोटे-छोटे एक्टिविटी ब्रेक ले सकते हैं। हर आधा घंटे में अपनी सीट से उठकर कुछ मिनट चलना, स्ट्रेचिंग करना या थोड़ी देर खड़े रहना लंबे समय तक लगातार बैठे रहने को कम करने का आसान तरीका हो सकता है। इसके साथ रोजाना नियमित वॉक को अपनी दिनचर्या में शामिल करना भी फायदेमंद है।

सिर्फ लेजर वॉक पर निर्भर न रहें

खाने के बाद आराम से कुछ मिनट टहलना या शॉपिंग के दौरान चलना भी शारीरिक गतिविधि का हिस्सा है, लेकिन इसे हर व्यक्ति के लिए पर्याप्त एक्सरसाइज मानना सही नहीं होगा। ब्रेन और पूरे शरीर की फिटनेस के लिए दिनभर की कुल शारीरिक गतिविधि बढ़ाना जरूरी है। अपनी क्षमता के अनुसार नियमित वॉकिंग के साथ दूसरी शारीरिक गतिविधियों को भी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। वॉकिंग ब्रेन और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन इसके प्रभाव व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और मौजूदा बीमारियों पर निर्भर करते हैं। किसी भी नई एक्सरसाइज या वॉकिंग रूटीन को शुरू करने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह लें।