डायबिटीज एक ऐसी क्रॉनिक बीमारी है, जिसे कंट्रोल रखना बेहद जरूरी है। इस स्थिति में मरीजों की इम्यूनिटी अक्सर कमजोर हो जाती है, जिससे संक्रमण और दूसरी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ब्लड शुगर को सामान्य स्तर पर बनाए रखने और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कई डायबिटीज मरीज अलग-अलग सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं। उनका मानना होता है कि इससे पोषण की कमी पूरी होगी और शरीर को अतिरिक्त मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज मरीजों को सप्लीमेंट लेते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि कुछ सप्लीमेंट ब्लड शुगर लेवल को प्रभावित कर सकते हैं या दवाओं के साथ इंटरैक्ट कर सकते हैं।

कैलिफोर्निया की रजिस्टर्ड डाइटीशियन और सर्टिफाइड डायबिटीज केयर एंड एजुकेशन स्पेशलिस्ट डॉन मेनिंग (Nutu हेल्दी लाइफस्टाइल ऐप से जुड़ी) के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों को कुछ खास सप्लीमेंट्स का सेवन करने से बचना चाहिए। वहीं, न्यूयॉर्क की प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी डाइटीशियन मिशेल राउथेनस्टीन (EntirelyNourished.com) और कोलोराडो की रजिस्टर्ड डाइटीशियन जॉर्डन हिल (Top Nutrition Coaching) ने भी कुछ सप्लीमेंट्स को लेकर चेतावनी दी है। कुछ सप्लीमेंट का सेवन डायबिटीज मरीजों की ब्लड शुगर का स्तर बढ़ा सकता है। आइए जानते हैं कि कौन-कौन से सप्लीमेंट हैं जो ब्लड शुगर का स्तर बढ़ाते हैं।

सप्लीमेंट्स क्या होते हैं?

सप्लीमेंट्स में विटामिन, मिनरल, जड़ी-बूटियां, अमीनो एसिड और प्रोबायोटिक्स शामिल होते हैं। इनका सेवन करने का मकसद बॉडी में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करना और ओवरऑल वेलनेस को सपोर्ट करना होता है। कुछ सप्लीमेंट इम्यूनिटी, मसल रिकवरी और हड्डियों की सेहत के लिए उपयोगी होते हैं। प्रिस्क्रिप्शन और ओवर-द-काउंटर दवाओं के विपरीत, सप्लीमेंट्स आमतौर पर बाजार में आने से पहले एफडीए (FDA) से अप्रूव नहीं होते। हालांकि, FDA इनका रेगुलेशन करता है और असुरक्षित या गलत लेबल वाले उत्पादों पर कार्रवाई कर सकता है।

डायबिटीज मरीजों के लिए जोखिम वाले सप्लीमेंट

नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार, डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए कुछ सप्लीमेंट गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकते हैं। अमेरिकन डायबिटीज स्टैंडर्ड ऑफ केयर (American Diabetes Standards of Care) के अनुसार अगर शरीर में किसी पोषक तत्व की वास्तविक कमी नहीं है, तो डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए हर्बल या नॉन-हर्बल सप्लीमेंट लेने का कोई अतिरिक्त लाभ नहीं है। जॉर्डन हिल के मुताबिक, अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ क्लिनिकल एंडोक्रिनोलॉजी (American Association of Clinical Endocrinology) सभी अनियमित न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट्स के उपयोग में सावधानी बरतने की सलाह देता है। इसका कारण है इनकी संरचना और गुणवत्ता में असंगति तथा संभावित नुकसान का खतरा। विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले डॉक्टर से जरूर परामर्श लें, ताकि यह समझा जा सके कि वह ब्लड शुगर लेवल, दवाओं या डायबिटीज मैनेजमेंट पर किस तरह असर डाल सकता है।

क्रोमियम (Chromium)

क्रोमियम (Chromium) एक सूक्ष्म खनिज है जिसकी शरीर को बहुत कम मात्रा में आवश्यकता होती है। ये साबुत अनाज, ब्रोकली, नट्स, दालें, मांस और अंडे में पाया जाता है। ये मेटाबॉलिज्म में अहम भूमिका निभाता है। इसे टाइप 2 डायबिटीज में ब्लड शुगर रेगुलेशन सुधारने के लिए प्रचारित किया जाता है, लेकिन इसके समर्थन में रिसर्च सीमित है। इसे इंसुलिन या ओरल डायबिटीज दवाओं के साथ लेने पर ये हाइपोग्लाइसीमिया (लो ब्लड शुगर) का जोखिम बढ़ा सकता है, जिससे चक्कर, थकान और बेहोशी हो सकती है।

करेला

करेला एक ऐसी सब्जी है जिसका सेवन ब्लड शुगर कम करने के लिए सप्लीमेंट के तौर पर उपयोग किया जाता हैं। इसमें पॉलीपेप्टाइड-पी जैसे कंपाउंड होते हैं, जो इंसुलिन की तरह काम कर सकते हैं। डायबिटीज दवाओं के साथ करेले का सेवन करने पर ब्लड शुगर बहुत अधिक गिर सकता है और हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा बढ़ सकता है।

विटामिन B3 सप्लीमेंट

कोलेस्ट्रॉल मैनेजमेंट के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन डायबिटीज मरीजों में यह ब्लड शुगर बढ़ा सकता है और हाइपरग्लाइसीमिया (हाई ब्लड शुगर) का जोखिम बढ़ा सकता है। मिशेल राउथेनस्टीन ने चेतावनी दी कि हाई-डोज नियासिन A1c लेवल को कंट्रोल करना मुश्किल बना सकता है। NIH के अनुसार इसकी अधिक मात्रा उन लोगों में भी ब्लड शुगर बढ़ा सकती है जिन्हें डायबिटीज नहीं है।

जिनसेंग (Ginseng)

एशियन जिनसेंग को ऊर्जा, फोकस और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए जाना जाता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं। कुछ रिसर्च में इसे प्री डायबिटीज और डायबिटीज में कार्डियो मेटाबोलिक फैक्टर सुधारने से जोड़ा गया है, लेकिन दवाओं के साथ लेने पर ये ब्लड शुगर को बहुत कम कर सकता है।

बीटा-कैरोटीन (β-carotene)

इसे एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन A के स्रोत के रूप में लिया जाता है। जॉर्डन हिल के अनुसार, अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन (ADA) डायबिटीज मरीजों को बीटा-कैरोटीन सप्लीमेंट से बचने की सलाह देता है, क्योंकि इसे फेफड़ों के कैंसर और कार्डियोवैस्कुलर मृत्यु दर बढ़ने से जोड़ा गया है।

हाई-डोज दालचीनी (Cassia Cinnamon)

दालचीनी को ब्लड शुगर कम करने और इंसुलिन रेजिस्टेंस घटाने के लिए लोकप्रिय सप्लीमेंट माना जाता है। लेकिन अधिक मात्रा में सेवन करने से ब्लड शुगर बहुत कम हो सकता है। इसके अलावा इसमें कूमारिन नामक कंपाउंड होता है, जो अधिक मात्रा में लेने पर लिवर डैमेज का कारण बन सकता है।

एलोवेरा (Aloe Vera)

एलोवेरा को डायबिटीज, वजन घटाने और इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज के लिए प्रचारित किया जाता है। लेकिन डायबिटीज दवाओं के साथ लेने पर यह ब्लड शुगर को बहुत कम कर सकता है और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं।

विशेषज्ञों की राय

डायबिटीज के मरीजों को किसी भी सप्लीमेंट का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह जरूर लेनी चाहिए, ताकि ब्लड शुगर लेवल और दवाओं पर इसके असर को समझा जा सके।

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डिस्क्लेमर:

यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है जिसमें ब्लड शुगर का सटीक संतुलन जरूरी है। लेख में बताए गए किसी भी सप्लीमेंट का सेवन शुरू करने या अपनी नियमित दवा बदलने से पहले अपने डॉक्टर या एंडोक्रिनोलॉजिस्ट से परामर्श जरूर लें। जंसत्ता लेख में दिए गए दावों की पुष्टि नहीं करता है।