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Diabetes के मरीज इन एक्सरसाइज को डेली रूटीन में करें शामिल, इन बातों का ध्यान रखना भी जरूरी

Diabetes Lifestyle: मरीजों को इन व्यायामों को करते वक्त सावधानी बरतनी चाहिए। जरूरत से ज्यादा व्यायाम करना भी खतरनाक हो सकता है

diabetes, diabetes exercise, exercise for diabetes, diabetes type 2, type 2 diabetesअमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के अनुसार भी डायबिटीज के प्रबंधन के लिए एरोबिक व स्ट्रेंथ ट्रेनिंग दोनों तरह के व्यायाम करना अच्छा रहता है

Diabetes Exercise: स्वस्थ शरीर के लिए नियमित रूप से एक्सरसाइज करना बहुत जरूरी है। शारीरिक असक्रियता कई बीमारियों से पीड़ित होने का खतरा बढ़ाती है। डायबिटिक्स यानी मधुमेह रोगियों के लिए भी व्यायाम करना बेहद जरूरी है। ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में कई व्यायाम मददगार साबित होते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार डायबिटीज एक जीवन शैली से संबंधित रोग है। इसका सीधा मतलब है कि अगर मरीजों की जीवन शैली सेहतमंद नहीं रहेगी तो इस बीमारी के कारण होने वाली दिक्कतें बढ़ जाती हैं। रोजाना एक्सरसाइज करने से कैलोरी बर्न करने में मदद मिलती है। इससे मोटापा कम करने में मदद मिलती है। मोटापा डायबिटीज समेत हार्ट और किडनी डिजीज के मरीजों के लिए भी नुकसानदायक है।

एरोबिक एक्सरसाइज: आमतौर पर माना जाता है कि एरोबिक एक्सरसाइज करने से हमारे पूरे शरीर की एक्सरसाइज हो जाती है। इसे कार्डियोवास्कुलर एक्सरसाइज भी कहते हैं। ब्रिस्क वॉकिंग, स्विमिंग, डांसिंग, जॉगिंग और साइकलिंग को एरोबिक एक्सरसाइज में शामिल किया जाता है। इससे शरीर में इंसुलिन को मैनेज करना आसान हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार ये एक्सरसाइज डायबिटीज के मरीजों को कम से कम आधे घंटे करना ही चाहिए।

स्ट्रेंथ एक्सरसाइज: अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के अनुसार भी डायबिटीज के प्रबंधन के लिए एरोबिक व स्ट्रेंथ ट्रेनिंग दोनों तरह के व्यायाम करना अच्छा रहता है। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शरीर को इंसुलिन के प्रति सेंसेटिव बनाता है और खून में शुगर का स्तर कम करने में मदद करता है। इस व्यायाम को रेसिसटेंस ट्रेनिंग भी कहते हैं। फ्री वेट लिफ्टिंग, सिट-अप्स, स्क्वैट्स और पुश-अप्स को स्ट्रेंथ एक्सरसाइज में शामिल किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार दिन भर में 20 से 30 मिनटों तक हफ्ते में 2 से 3 दिन इसे करना चाहिए।

स्ट्रेचिंग: डायबिटीज के मरीजों के लिए स्ट्रेचिंग करना भी फायदेमंद होगा। इससे शरीर में लचीलापन आता है और किसी भी एक्सरसाइज को करने के बाद मसल डैमेज का खतरा भी कम होता है।

इन बातों का रखें ध्यान: मरीजों को इन व्यायामों को करते वक्त सावधानी बरतनी चाहिए। जरूरत से ज्यादा व्यायाम करना भी खतरनाक हो सकता है। वर्क आउट करने से पहले और बाद में मरीजों का पल्स रेट चेक करना चाहिए। अगर मरीज थका हुआ या फिर भ्रमित महसूस करें तो उन्हें एक्सरसाइज करना बंद कर देना चाहिए।

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