Milk For Diabetes Patients: डायबिटीज (Diabetes) से पीड़ित मरीजों को अपने खानपान की आदतों का खास ध्यान रखना पड़ता है, क्योंकि जरा सी लापरवाही ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ा सकती है। अक्सर शुगर के मरीजों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या उन्हें दूध पीना चाहिए या नहीं, और अगर पीना भी चाहिए तो कौन सा दूध उनके लिए सुरक्षित है? बात करें दूध की तो दूध को संपूर्ण आहार माना जाता है जिसमें बॉडी के लिए जरूरी सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं।  दूध में प्रोटीन, कैल्शियम और कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो बॉडी को फायदा पहुंचाते हैं, लेकिन इसमें कार्बोहाइड्रेट और वसा (Fat) भी मौजूद होती है जो डायबिटीज मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। 

आयुर्वेदिक और यूनानी दवाओं के एक्सपर्ट डॉक्टर सलीम जैदी के मुताबिक डायबिटीज होने पर दूध को पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं है बस सही दूध का चयन करना जरूरी है। दूध में प्राकृतिक रूप से लैक्टोज नामक शुगर होती है, जो शरीर में पचने के बाद ग्लूकोज और गैलेक्टोज में टूटती है। इसलिए दूध का सेवन ब्लड शुगर पर कुछ असर डाल सकता है लेकिन इससे परहेज करने की जरुरत नहीं है। डायबिटीज मरीज दूध का सेवन कर सकते हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि दूध का सेवन कैसे डायबिटीज मरीजों की सेहत को प्रभावित कर सकता है और कौन सा दूध डायबिटीज मरीज पी सकते हैं।

दूध पीने से शरीर पर कैसा होता है असर?

दूध में प्राकृतिक रूप से लैक्टोज नामक शुगर होती है, जो पाचन के दौरान ग्लूकोज और गैलेक्टोज में टूटती है। ये शरीर के लिए ऊर्जा का स्रोत बनते हैं, लेकिन डायबिटीज वाले लोगों में इनसे ब्लड शुगर बढ़ सकती है। हालांकि, सिर्फ लैक्टोज की मौजूदगी के कारण डायबिटीज में दूध को पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं है। डायबिटीज मरीज दूध का सेवन कर सकते हैं। दूध में मौजूद प्रोटीन और फैट भी इसके पाचन और ब्लड शुगर पर असर डालते हैं, इसलिए दूध का प्रभाव व्यक्ति और उसकी मात्रा के अनुसार अलग हो सकता है।

डायबिटीज में कितना दूध पीना चाहिए?

डायबिटीज वाले व्यक्ति को दूध की मात्रा अपनी कुल डाइट और ब्लड शुगर के स्तर के अनुसार तय करनी चाहिए। करीब 200 मिलीलीटर दूध का रोजाना सेवन डायबिटीज मरीज कर सकते हैं। हालांकि, इसे हर व्यक्ति के लिए निश्चित मात्रा नहीं माना जाना चाहिए। अगर दूध पीने के बाद ब्लड शुगर बढ़ता है, तो डॉक्टर या डाइटिशियन से मात्रा को लेकर सलाह लेना बेहतर है।

टोंड या फुल-क्रीम, डायबिटीज में कौन सा दूध?

टोंड और फुल-क्रीम दूध के बीच मुख्य अंतर उनके फैट की मात्रा का है। टोंड दूध में फैट कम होता है, जबकि फुल-क्रीम दूध में फैट ज्यादा होता है। डायबिटीज मरीजों के लिए फुल क्रीम दूध को बेहतर विकल्प नहीं माना जाता। अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, ज्यादा ट्राइग्लिसराइड या हृदय संबंधी जोखिम है, तो कम फैट वाला दूध उसके लिए अधिक उपयुक्त हो सकता है। इसलिए दूध का चुनाव केवल ब्लड शुगर नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य और डाइट को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

गाय या भैंस का दूध, कौन से दूध का करें चुनें?

गाय और भैंस के दूध की पोषण संरचना अलग होती है। आमतौर पर भैंस के दूध में फैट अधिक होता है, जबकि गाय के दूध में फैट कम होता है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को कैलोरी और सैचुरेटेड फैट सीमित करने की जरूरत है, तो कम फैट वाला विकल्प उपयोगी हो सकता है।

डायबिटीज मरीज दूध का सेवन कैसे करें?

डायबिटीज मरीज अगर दूध का सेवन करना चाहते हैं तो वो दूध के साथ बादाम, चिया सीड्स या किसी प्रोटीन रिच फूड्स के साथ कॉम्बिनेशन में कर सकते हैं। इन खाद्य पदार्थों में प्रोटीन, फैट और फाइबर होते हैं, जो भोजन के बाद ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ने नहीं देते।

डायबिटीज में दूध पीते समय किन बातों का ध्यान रखें?

डायबिटीज में दूध को डाइट में शामिल करते समय मात्रा, दूध का प्रकार और कुल डेली कार्बोहाइड्रेट सेवन पर ध्यान देना जरूरी है। दूध में चीनी, फ्लेवर्ड पाउडर या मीठे सिरप मिलाने से बचना चाहिए।

शुगर के मरीज किस तरह से डायबिटीज कर सकते हैं कंट्रोल?

  • डायबिटीज मरीज ब्लड शुगर नॉर्मल रखने के लिए समय पर दवाइयों का सेवन करें और रोजाना शुगर चेक करें।
  • शुगर हाई है तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।
  • खाने में मीठी चीजों से परहेज करें। नमक का कम सेवन करें।
  • संतुलित डाइट का सेवन करें। डाइट में 50-60 % कॉम्पलेक्स शुगर, 20-30% फैट और 30-40 फीसदी प्रोटीन का सेवन करें।
  • डाइट में आलू और मैदा से परहेज करें। शराब का सेवन नहीं करें।
  • डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए बॉडी को एक्टिव रखें। योगा, वॉक और एक्सरसाइज करने से बॉडी एक्टिव रहती है और तनाव कम होता है।

डिस्क्लेमर: डायबिटीज में दूध की मात्रा और प्रकार व्यक्ति की ब्लड शुगर, दवाइयों, वजन, लिपिड प्रोफाइल और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के अनुसार अलग हो सकते हैं। यहां दी गई जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। दूध या डाइट में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर या रजिस्टर्ड डाइटिशियन की सलाह लें।