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अब अमीरों की बिमारी नहीं रही डायबिटीज, गरीब भी आ रहे हैं तेजी से चपेट में

उच्च कार्बोहाइड्रेट वाले ये अनाज देश में मधुमेह की एक नई और बेहद चिंताजनक लहर पैदा कर रहे हैं।

Author नई दिल्ली | June 12, 2017 1:46 AM
दिनचर्या में छोटे-मोटे बदलाव और कुछ चीजों को अपने नियमित भोजन में शामिल कर मधुमेह के जोखिम से काफी हद तक बचा जा सकता है।

हाल ही में एक अध्ययन में दावा किया गया है कि गरीब लोगों का तेजी से मधुमेह की चपेट में आना चेताने वाला है क्योंकि ये लोग उस वर्ग से आते हैं, जो गुणवत्तापूर्ण इलाज नहीं करवा पाते और अनाज के लिए जन वितरण प्रणाली के तहत चलने वाली राशन की दुकानों पर निर्भर करते हैं। अधिकतर राशन की दुकानें चावल और गेहूं का वितरण कर रही हैं। उच्च कार्बोहाइड्रेट वाले ये अनाज देश में मधुमेह की एक नई और बेहद चिंताजनक लहर पैदा कर रहे हैं। हरित क्रांति और अस्वास्थ्यकर आहार के बीच के संबंध को समझने की अभी शुरुआत भर है। भारत को विश्व में मधुमेह की राजधानी कहा जाता है। यहां लगभग सात करोड़ लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं। लेकिन इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि अभी तक मधुमेह को अमीरों की बीमारी माना जाता था लेकिन ‘द लांसेट डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलॉजी’ में प्रकाशित नए शोधपत्र का कहना है कि भारत की मधुमेह की महामारी स्थानांतरित हो रही है और यह आर्थिक रूप से कमजोर समूहों को प्रभावित कर सकती है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि इन नतीजों से भारत जैसे देश में चिंता पैदा होनी चाहिए, क्योंकि वहां इलाज का खर्च मरीजों की जेब से जाता है। शोधकर्ता इस बीमारी से बचने के लिए रोकथाम के प्रभावी उपायों की तत्काल जरूरत को रेखांकित करते हैं। मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन की उपाध्यक्ष और इस अध्ययन की प्रमुख लेखिका आरएम अंजना ने कहा, ‘यह चलन गहरी चिंता का विषय है क्योंकि यह बाकी पेज 8 पर कहता है कि मधुमेह की महामारी उन लोगों तक फैल रही है, जो इसके प्रबंधन के लिए धन खर्च करने का बहुत कम सामर्थ्य रखते हैं।’इंडियन काउंसिल आॅफ मेडिकल रिसर्च-इंडिया डायबिटीज का अध्ययन भारत में मधुमेह के अध्ययन का राष्ट्रीय तौर पर सबसे बड़ा प्रतिनिधि अध्ययन है। इसमें देश के 15 राज्यों में से 57 हजार लोगों का डेटा है। अंजना ने कहा, ‘अस्वास्थ्यकर आहार और शारीरिक तौर पर निष्क्रियता अकेले ही मधुमेह की महामारी में 50 प्रतिशत का योगदान दे रही है। इसके अलावा पश्चिमी आहार शैली को अपनाने से मधुमेह की समस्या बढ़ रही है।’ जंक फूड अ‍ैर फास्ट फूड अब अधिकतर शहरी झुग्गियों और गांवों में उपलब्ध है। सड़क किनारे बनी खाने की दुकानों में पिज्जा, चाउमीन और मोमोज मिलना आम बात है।

अध्ययन में शामिल लगभग आधे लोग ऐसे थे, जिन्हें परीक्षण से पहले तक यह पता ही नहीं था कि उन्हें मधुमेह है। भारतीयों की बदलती जीवनशैली उन्हें पारंपरिक स्वास्थ्यप्रद भोजन से दूर लेकर जा रही है। अंजना का कहना है, ‘जंक फूड की उपलब्धता, आसान पहुंच और उनका किफायती होना भारत की सबसे बड़ी समस्या है।’ उन्होंने कहा कि सौभाग्यवश सही तरह की जागरूकता लाकर यह सब बदला जा सकता है। फलों, सब्जियों और स्वास्थयप्रद अनाज को राशन की दुकानों पर उपलब्ध करवाकर ऐसा किया जा सकता है।

 

 

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