भारत को अक्सर दुनिया की डायबिटीज कैपिटल कहा जाता है। इसकी बड़ी वजह ये है कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिन्हें डायबिटीज होने के बावजूद इसकी जानकारी नहीं होती। कई मामलों में बीमारी का पता तब चलता है जब आंखों, किडनी या नसों को गंभीर नुकसान पहुंच चुका होता है। डायबिटीज अचानक होने वाली बीमारी नहीं है बल्कि ये धीरे-धीरे शरीर में अपने पैर पसारती है इसीलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। इसके कई शुरुआती संकेत शरीर पहले से देने लगता है। अगर इन संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए तो गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
Diabetes Care जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, शुगर का कोशिकाओं तक न पहुंचना शरीर को ‘एनर्जी क्राइसिस’यानी ऊर्जा संकट में डाल देता है। पर्याप्त नींद के बाद भी बहुत ज्यादा थकान महसूस होना और बिना बात के गुस्सा या चिड़चिड़ापन आना हाई शुगर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। Redcliffe Labs में Lab Head और Consultant Pathologist डॉक्टर अरविंद कुमार ने बताया अगर आपका वजन बेवजह कम हो रहा है और बार-बार गलाह सूख रहा है तो आपको डायबिटीज की बीमारी हो सकती है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि डायबिटीज क्या है और इसके शुरुआती लक्षण कौन-कौन से हैं।
डायबिटीज क्यों बढ़ती है?
हम जो भोजन करते हैं, शरीर उसे ग्लूकोज में बदल देता है। इस ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाने का काम पैनक्रियाज द्वारा बनने वाला हार्मोन इंसुलिन करता है। इंसुलिन एक तरह से चाबी की तरह काम करता है जो कोशिकाओं का दरवाजा खोलकर ग्लूकोज को अंदर जाने देता है। लेकिन डायबिटीज में या तो इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता या शरीर की कोशिकाएं उस पर ठीक से प्रतिक्रिया नहीं देतीं। नतीजतन ग्लूकोज खून में जमा होने लगता है और यही बढ़ी हुई शुगर कई लक्षण पैदा करती है।
डायबिटीज के 10 शुरुआती संकेत
बार-बार पेशाब आना
डायबिटीज का सबसे सामान्य संकेत बार-बार पेशाब आना है। जब खून में शुगर का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है तो किडनी उसे बाहर निकालने की कोशिश करती है। इसके कारण पेशाब की मात्रा और बार-बार पेशाब जाने की समस्या बढ़ जाती है।
बहुत ज्यादा प्यास लगना
बार-बार पेशाब आने के कारण शरीर से पानी कम होने लगता है, जिससे तेज प्यास लगती है। कई बार पानी पीने के थोड़ी देर बाद ही फिर से प्यास महसूस होने लगती है।
अत्यधिक भूख लगना
भले ही व्यक्ति ठीक से खाना खा रहा हो, लेकिन अगर शरीर की कोशिकाओं तक ग्लूकोज नहीं पहुंच पा रहा तो शरीर ऊर्जा के लिए भूख का संकेत देता रहता है ऐसे में मरीज को बार-बार भूख लगती है।
गर्दन या स्किन का काला पड़ना
गर्दन, बगल या जांघों के बीच की त्वचा का मोटा और काला पड़ना इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकता है। इसे मेडिकल भाषा में एकैंथोसिस नाइग्रिकन्स कहा जाता है।
पैरों में झुनझुनी या जलन
लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर नसों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके कारण पैरों में झुनझुनी, जलन या सुई चुभने जैसा अहसास हो सकता है।
धुंधला दिखाई देना
खून में शुगर बढ़ने से आंखों के लेंस में सूजन आ सकती है, जिससे नजर धुंधली होने लगती है। कई बार चश्मे का नंबर भी अचानक बदल सकता है।
घाव का देर से भरना
डायबिटीज में ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसके कारण छोटे घाव या कट भी देर से ठीक होते हैं।
बिना कारण वजन कम होना
अगर शरीर ग्लूकोज से ऊर्जा नहीं बना पा रहा तो वह मांसपेशियों और चर्बी को ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करने लगता है। इससे बिना कोशिश के वजन कम होने लगता है।
मसूड़ों की समस्या और मुंह से बदबू
उच्च शुगर स्तर मुंह में बैक्टीरिया के बढ़ने को बढ़ावा देता है। इससे मसूड़ों से खून आना, सूजन या सांस से दुर्गंध जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
ब्रेन फॉग और चिड़चिड़ापन
ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव का असर दिमाग पर भी पड़ सकता है। इससे ध्यान लगाने में कठिनाई, भूलने की समस्या और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है।
डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए क्या करें?
डाइट में बदलाव
खाने में फाइबर से भरपूर सब्जियां जैसे पालक, मेथी, करेला और लौकी शामिल करें। चीनी, मैदा और सफेद चावल की जगह ओट्स, रागी या ब्राउन राइस जैसे कॉम्प्लेक्स कार्ब्स चुनें।
शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं
खाना खाने के बाद 10–15 मिनट टहलना ब्लड शुगर स्पाइक को कम करने में मदद कर सकता है। हफ्ते में कुछ दिन हल्की वेट ट्रेनिंग या योग भी फायदेमंद हो सकता है।
अच्छी नींद और तनाव कंट्रोल
कम नींद और ज्यादा तनाव शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ाते हैं, जो ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकता है। रोजाना 7–8 घंटे की नींद और तनाव कम करने के लिए प्राणायाम या ध्यान करना फायदेमंद हो सकता है।
अगर किसी व्यक्ति को इनमें से तीन या चार लक्षण भी महसूस हो रहे हैं तो उसे डॉक्टर की सलाह लेकर ब्लड शुगर और HbA1c टेस्ट जरूर कराना चाहिए।
डिस्क्लेमर:
यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी तरह से पेशेवर मेडिकल सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। अगर आपको डायबिटीज या इससे जुड़े किसी भी लक्षण का संदेह है, तो सही जांच और इलाज के लिए योग्य डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
