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Diabetes: शरीर में इस एक विटामिन के कारण बढ़ जाता है डायबिटीज का खतरा, जानिए लक्षण और बचाव के तरीके

Diabetes Cure: मेटाबॉलिक सिंड्रोम के अन्य पहलू भी टाइप 2 मधुमेह के साथ होते हैं, जिनमें मोटापा, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग शामिल हैं।

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अगर आप डायबिटीज के शिकार हैं तो आपको शुगर बढ़ने और घटने की स्थिति से अवगत होना जरूरी है।(Image: Freepik)

Type 2 diabetes: WHO की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में साल 2025 तक डायबिटीज रोगियों की संख्या में 170 फीसदी तक बढ़ जाएगी। वहीं डायबिटीज के कारण व्यक्तियों में हृदय रोग, जिसमें दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा गुर्दे की बीमारी और गुर्दे की विफलता,आंखों की समस्याएं और दृष्टि हानि हो सकती है।

टाइप 2 डायबिटीज वाले व्यक्ति का इंसुलिन हार्मोन ठीक से काम नहीं करता। इससे शरीर में ग्लूकोज लेवल बढ़ जाता है। ऐसे में अगर आप अपना खान-पान ठीक रखें तो डायबिटीज 2 के खतरे से बचा जा सकता है। आपको जानकर हैरानी शरीर में विटामिन डी (D) की कमी डायबिटीज (Diabetes) के खतरे को बढ़ा सकती है। आइए विस्तार से जानते हैं –

विटामिन डी और डायबिटीज का संबंध

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर सही तरीके से फंक्शन करने के लिए सभी प्रकार के विटामिन जरूरी है और शरीर में किसी भी Vitamin की कमी कई बीमारियों की वजह बन सकती है। विटामिन डी से संबंधित शोध के मुताबिक विटामिन डी टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह दोनों को रोकने में मदद कर सकता है। वहीं कुछ अन्य अध्ययनों के अनुसार, विटामिन डी का की कमी के कारण टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह दोनों के बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।

क्यों विटामिन की कमी के कारण डायबिटीज का बढ़ जाता है खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक अगर शरीर में विटामिन डी की कमी होती है तो पैन्क्रियाटिक क्रिया सही से नहीं हो पाती है। शरीर में इंसुलिन बनने की क्रिया पर भी प्रभाव पड़ता है। डायबिटीज डॉट को डॉट यूके के मुताबिक, शरीर में विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा इंसुलिन के प्रति शरीर की Sensitivity को बेहतर करती है। इंसुलिन एक तरह का हार्मोन है जो शरीर में ब्लड शुगर लेवल को रेगुलेट करता है। जिसके कारण शरीर में इंसुलिन रजिस्टेंस का खतरा कम होता है। टाइप 2 डायबिटीज की स्थिति में बॉडी इंसुलिन को लेकर रिएक्ट नहीं करती।

विटामिन डी की कमी को कैसे दूर करें

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक हर व्यक्ति के शरीर में विटामिन डी का लेवल अलग-अलग हो सकता है। जरूरी नहीं है कि सभी में विटामिन D का एक ही लेवल हो। जब आपके शरीर में विटामिन डी की कमी होती है, तब शरीर के अंदर होने वाली कई प्रक्रियाएं धीमी पड़ने लगती हैं। आपको बता दें कि विटामिन डी, सूरज की रोशनी से मिलने वाला सबसे अच्छा सोर्स है।

जब आपकी त्वचा पर सूरज की रोशनी पड़ती है, तब इससे शरीर को विटामिन D मिलता है। इसलिए विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए हर दिन कुछ देर तक धूप में बैठें। इससे हड्डियां और मांसपेशियां भी मजबूत रहेंगी। इसके अलावा खाने की कई चीजों में भी विटामिन डी होता है। जैस- ऑयली फिश, कॉड लिवर ऑयल, रेड मीट और अंडे के पीले भाग जैसी कई चीजों में विटामिन डी (Vitamin D) की अच्छी मात्रा होती है; उनका सेवन करें।

विटामिन डी कमी के लक्षण

विटामिन डी की कमी के लक्षण जो शरीर में दिखाई देते हैं, उनमें से थकान, हड्डियों और पीठ में दर्द, ​चोट ठीक होने में वक्त लगना,​डिप्रेशन, बालों का झड़ना, हड्डियां कमजोर, बीमार पड़ना, त्वचा पर असर और साथ ही विटामिन डी कम होने पर ऐजिंग की समस्या शुरू हो जाती है।

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