किचन में मौजूद कई मसालों का इस्तेमाल सदियों से पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में हेल्थ से जुड़ी समस्याओं के लिए किया जाता रहा है। दालचीनी भी ऐसा ही एक मसाला है, जिसमें कई बायोएक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं। आयुर्वेद समेत पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इसका इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। आधुनिक रिसर्च में भी दालचीनी के फायदों पर अध्ययन किए गए हैं। कुछ अध्ययनों में संकेत मिला है कि दालचीनी में मौजूद एक्टिव कंपाउंड इंसुलिन सेंसिटिविटी और ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकते हैं।

आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सा के विशेषज्ञ डॉक्टर सलीम जैदी के मुताबिक, दालचीनी इंसुलिन सेंसिटिविटी और ग्लूकोज के इस्तेमाल को बेहतर करने में मदद कर सकती है। हालांकि, दालचीनी को डायबिटीज की दवा या इलाज का विकल्प नहीं माना जा सकता। आइए एक्सपर्ट्स और उपलब्ध रिसर्च के आधार पर समझते हैं कि दालचीनी ब्लड शुगर को किस तरह प्रभावित कर सकती है और इसका सेवन करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

दालचीनी ब्लड शुगर पर कैसे करती है असर?

कुछ क्लिनिकल स्टडी और रिव्यू में दालचीनी के इंसुलिन सेंसिटिविटी और ब्लड ग्लूकोज पर संभावित सकारात्मक प्रभाव के संकेत मिले हैं। इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर होने का मतलब है कि शरीर इंसुलिन का इस्तेमाल अधिक प्रभावी तरीके से कर सकता है, जिससे कोशिकाओं को ग्लूकोज का इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, दालचीनी के प्रभाव को लेकर उपलब्ध रिसर्च के परिणाम पूरी तरह एक जैसे नहीं हैं और इसका असर व्यक्ति, डाइट तथा सेवन की मात्रा के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

दालचीनी में मौजूद कुछ यौगिक कार्बोहाइड्रेट के पाचन और ग्लूकोज के अवशोषण को प्रभावित कर सकते हैं। इससे भोजन के बाद ब्लड शुगर बढ़ने की गति पर कुछ असर पड़ने की संभावना हो सकती है।

दालचीनी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट भी हो सकते हैं फायदेमंद

दालचीनी में पॉलीफेनॉल जैसे एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड पाए जाते हैं। ये शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में भूमिका निभा सकते हैं। डायबिटीज में लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन से जुड़ा हो सकता है। ऐसे में एंटीऑक्सीडेंट युक्त खाद्य पदार्थ संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकते हैं। 

दालचीनी का इस्तेमाल कैसे करें?

दालचीनी को सामान्य मसाले की तरह भोजन में शामिल किया जा सकता है। इसे बिना ज्यादा चीनी वाली चाय या दूसरे ड्रिंक में थोड़ी मात्रा में मिलाया जा सकता है। इसके अलावा ओट्स, दही या अन्य भोजन में भी थोड़ी मात्रा में दालचीनी पाउडर का इस्तेमाल किया जा सकता है।

डायबिटीज वाले लोग दालचीनी को सीमित मात्रा में अपने भोजन का हिस्सा बना सकते हैं, लेकिन केवल इसके सेवन से ब्लड शुगर को सामान्य बनाए रखने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। अगर आप पहले से शुगर की दवा या इंसुलिन ले रहे हैं, तो उसे डॉक्टर की सलाह के बिना बंद या कम न करें। दालचीनी को केवल संतुलित डाइट और निर्धारित इलाज के साथ एक उपयोगी मसाले के रूप में लिया जा सकता है।

दालचीनी का कितना सेवन करें?

दालचीनी की ऐसी कोई सार्वभौमिक रूप से तय खुराक नहीं है, जिसे हर डायबिटीज मरीज के लिए सुरक्षित और प्रभावी माना जाए। अलग-अलग रिसर्च में इसकी अलग-अलग मात्रा का इस्तेमाल किया गया है। इसलिए केवल ब्लड शुगर कम करने के उद्देश्य से रोजाना अधिक मात्रा में दालचीनी का सेवन बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करना चाहिए।

किन लोगों को दालचीनी लेने में सावधानी रखनी चाहिए?

लिवर की बीमारी वाले लोगों, नियमित रूप से कई दवाएं लेने वालों और डायबिटीज की दवा या इंसुलिन इस्तेमाल करने वालों को दालचीनी की अधिक मात्रा लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। खासकर कैसिया दालचीनी का लंबे समय तक अधिक मात्रा में सेवन करने से बचना चाहिए। अगर आप दालचीनी को सप्लीमेंट या अधिक मात्रा में लेने के बारे में सोच रहे हैं, तो डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लेना बेहतर है।

क्या दालचीनी ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल भी कम करती है?

कुछ अध्ययनों में दालचीनी के सेवन के साथ ब्लड प्रेशर और लिपिड प्रोफाइल में सुधार के संकेत मिले हैं, लेकिन इन प्रभावों के प्रमाण अभी सीमित और असंगत हैं। इसलिए दालचीनी को ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल की दवा के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता और न ही डॉक्टर की बताई दवाओं को इसके लिए बंद करना चाहिए।

डिस्क्लेमर: दालचीनी डायबिटीज मैनेजमेंट में संभावित रूप से मददगार खाद्य मसाला हो सकती है, लेकिन इसे “नेचुरल इलाज” या ब्लड शुगर कंट्रोल करने वाली दवा कहना सही नहीं है। डायबिटीज को मैनेज करने के लिए संतुलित डाइट, नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वजन बनाए रखना, ब्लड शुगर की नियमित मॉनिटरिंग और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं सबसे महत्वपूर्ण हैं।