दिल्ली में मरीजों की बढ़ती तादाद को देखते हुए सरकार ने तीन बड़े अस्पतालों को मिलाकर एक सुपर हॉस्पिटल बनाने की योजना तैयार की है। इस योजना के तहत Guru Teg Bahadur Hospital (GTB), Institute of Human Behaviour and Allied Sciences (IHBAS) और Rajiv Gandhi Super Speciality Hospital (RGSSH) का विलय किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि दिल्ली के मरीजों को All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) की तर्ज पर एक बड़ा और बेहतर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल उपलब्ध कराया जाए। इन अस्पतालों की मौजूदा स्थिति पर नजर डालें तो कहीं डॉक्टरों की कमी है, तो कहीं वार्ड खाली पड़े हैं। कई जगह मरीज पर्याप्त संख्या में नहीं पहुंचते, और जहां पहुंचते भी हैं, वहां उन्हें पूरी तरह से इलाज नहीं मिल पाता।

संक्षेप में कहें तो एक अस्पताल पर जरूरत से ज्यादा दबाव है, दूसरा लगभग खाली रहता है, जबकि Delhi State Cancer Institute (DSCI) अपने स्तर पर संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। यही असंतुलन दूर करने के लिए सरकार ने इन संस्थानों को एकीकृत करने का फैसला लिया है, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके और मरीजों को एक ही जगह पर बेहतर इलाज मिल सके।

तीनों अस्पतालों को मिलाकर एक बड़ा संस्थान बनाने की योजना

दिल्ली सरकार ने इन तीनों अस्पतालों को मिलाकर All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) की तर्ज पर एक स्वायत्त (Autonomous) सुपर-संस्थान बनाने का प्रस्ताव रखा है। दिल्ली की  मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, GTB को मुख्य संस्थान बनाकर बाकी दो अस्पतालों को इसके साथ जोड़ा जाएगा। ये तीनों अस्पताल एक-दूसरे से 1-2 किलोमीटर की दूरी पर हैं, जिससे उनका एकीकरण संभव है।

तीनों अस्पतालों को मर्जर करने का मकसद क्या है?

दिल्ली सरकार के मुताबिक इन तीनों अस्पतालों को एक साथ मर्ज करने का मकसद GTB पर मरीजों का दबाव कम करना, RGSSH के खाली पड़े संसाधनों का उपयोग करना और सेवाओं के duplication को खत्म करना है। इन तीनों अस्पतालों के मर्जर होने से महंगे उपकरणों का बेहतर इस्तेमाल होगा, मेडिकल छात्रों के लिए सीटें बढ़ेंगी और मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा।  IHBAS अपनी 75 एकड़ जमीन इस नए अस्पताल के निर्माण के लिए देगा जिसे मानसिक स्वास्थ्य के लिए National Institute of Mental Health and Neurosciences (NIMHANS) जैसा संस्थान बनाने की योजना है।

विलय के बाद क्या बदलाव होंगे?

RGSSH → सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं का केंद्र बनेगा
DSCI → सभी कैंसर सेवाएं यहां होंगी
GTB → मुख्य अस्पताल और एंडोक्रिनोलॉजी मजबूत होगी
UCMS + GTB → लैब और पढ़ाई से जुड़े विभाग
यह मॉडल AIIMS की तरह होगा, जहां अलग-अलग स्पेशियलिटी सेंटर एक ही प्रशासन के तहत काम करते हैं।

इस मर्जर से मरीजों को क्या फायदा होगा?

  • इस विलय से मरीज को एक अस्पताल से दूसरे में रेफर होने पर नया रजिस्ट्रेशन नहीं करना पड़ेगा।
  • मेडिकल रिकॉर्ड साथ में ट्रांसफर होंगे
  • इलाज में देरी कम होगी
  • बेहतर और तेज़ उपचार मिलेगा
  • मेडिकल शिक्षा में सुधार
  • फैकल्टी को मिलाने से PG सीटें बढ़ेंगी

गरीब मरीजों के लिए यह बदलाव तभी मायने रखेगा, जब जमीन पर वास्तविक सुधार नजर आए। पूर्वी दिल्ली में All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) जैसा संस्थान बनाने का विचार मजबूत माना जा रहा है। सरकार का तर्क है कि तीनों अस्पताल पास-पास स्थित हैं और एक-दूसरे की कमियों को पूरा कर सकते हैं। हालांकि, इस ‘एम्स जैसे’ सुपर अस्पताल की सफलता तभी सुनिश्चित होगी जब कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा, जरूरी मेडिकल मशीनें उपलब्ध होंगी और पर्याप्त संख्या में डॉक्टरों की भर्ती की जाएगी।

डिस्क्लेमर:

यह एक प्रशासनिक बदलाव है और वर्तमान उपचार प्रक्रियाओं के लिए अस्पताल की आधिकारिक वेबसाइट देखें ।