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प्रदूषण: सेहत के लिए घातक है विषैला स्मॉग, जानिए क्या है इसका कारण, प्रभाव और इससे बचने के उपाय

Delhi Air Pollution Level 2017, Smog Causes: स्मॉग एक तरह का वायु प्रदूषण ही है। यह स्मोक और फॉग से मिलकर बना है जिसका मतलब है स्मोकी फॉग, यानी कि धुआं युक्त कोहरा।

भयंकर धुंध की वजह से सांस लेने में तकलीफ और सड़कों पर कम होती दृश्यता लोगों की परेशानी का सबब बनी हुई है।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र-दिल्ली पिछले कुछ महीनों से भयानक विषैली हवाओं की चपेट में है। दिवाली से पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस स्थिति से निपटने के लिए पटाखों पर बैन का फैसला सुनाया था लेकिन हालात में कोई भी बदलाव नजर नहीं आ रहा। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने दिल्ली की वर्तमान हालत को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। उसने सरकार को एक पत्र लिखकर सभी तरह के आउटडोर एक्टिविटीज तथा स्कूलों में स्पोर्ट्स एक्टिविटीज को तत्काल रोकने का सुझाव दिया है। साथ ही साथ उसने सभी दिल्लीवासियों को घरों से बाहर न निकलने की सलाह भी दी है। भयंकर धुंध की वजह से सांस लेने में तकलीफ और सड़कों पर कम होती दृश्यता लोगों की परेशानी का सबब बनी हुई है। ऐसे में यह जानना-समझना बहुत जरूरी है कि ये स्मॉग है क्या और इसके कारण और दुष्प्रभाव क्या हैं? आखिर यह किसी को बीमार कैसे बना सकता है।

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क्या है स्मॉग – स्मॉग एक तरह का वायु प्रदूषण ही है। यह स्मोक और फॉग से मिलकर बना है जिसका मतलब है स्मोकी फॉग, यानी कि धुआं युक्त कोहरा। इस तरह के वायु प्रदूषण में हवा में नाइट्रोजन ऑक्साइड्स, सल्फर ऑक्साइड्स, ओजोन, स्मोक और पार्टिकुलेट्स घुले होते हैं। हमारे द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों से निकलने वाला धुआं, फैक्ट्रियों और कोयले, पराली आदि के जलने से निकलने वाला धुआं इस तरह के वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण होता है।

क्या है स्मॉग का कारण – एनसीआर-दिल्ली की सीमाएं पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से लगती हैं जहां बहुतायत मात्रा में कृषि की जाती है। यहां के लोग फसल कटने के बाद उसके अवशेषों को जला देते हैं जिससे स्मॉग की समस्या उत्पन्न होती है। इसके अलावा इस बार सुप्रीम कोर्ट से बैन होने के बावजूद राजधानी के बहुत से इलाकों में भारी मात्रा में पटाखे आदि फोड़े गए। स्मॉग के बनने में इनका भी योगदान कम नहीं है। राजधानी की सड़कों पर उतरने वाली कारें, ट्रक्स, बस तो बहुत सालों से स्वच्छ पर्यावरण की राह में रोड़ा हैं। इसके अलावा औद्योगिक प्रदूषण भी स्मॉग का मुख्य जिम्मेदार कारक है। सर्दी के मौसम में हवाएं थोड़ी सुस्त होती हैं। ऐसे में डस्ट पार्टिकल्स और प्रदूषण वातावरण में स्थिर हो जाता है जिससे स्मॉग जैसी समस्याएं सामने आती हैं।

स्मॉग के दुष्प्रभाव –
खांसी और गले तथा सीने में जलन – जब आप स्मॉग के संपर्क में आते हैं तो हवाओं में हाई लेवल का ओजोन मौजूद होने की वजह से आपके श्वसन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है। इससे सीने में जलन होती है तथा खांसी की भी समस्या उत्पन्न हो जाती है। ओजोन आपके फेफड़ों को तब भी नुकसान पहुंचाती है जब इसके लक्षण गायब हो चुके होते हैं।

अस्थमा में हानिकारक – अगर आप अस्थमा के मरीज हैं तो स्मॉग आपके लिए ज्यादा घातक हो सकता है। स्मॉग में मौजूद ओजोन की वजह से अस्थमा का अटैक आ सकता है।

सांस लेने में तकलीफ और फेफड़े खराब होना – स्मॉग की वजह से सांस लेने में तकलीफ तो होती ही है साथ ही साथ इसकी वजह से अस्थमा, एम्फीसिमा, क्रोनिक ब्रोंकाइटिस और अन्य श्वांस संबंधी समस्याएं अपनी गिरफ्त में ले लेती हैं। इसकी वजह से फेफड़ों में संक्रमण भी हो सकता है।

क्या है बचाव का तरीका –
1. सबसे पहले आपको अपने इलाके का ओजोन स्तर पता होना चाहिए।
2. घर से ज्यादा देर तक के लिए बाहर रहने से बचें।
3. बाहर जाने का प्रोग्राम तभी बनाएं जब ओजोन का स्तर कम हो।
4. स्मॉग के दिनों में कम से कम एक्टिव रहने की कोशिश करें। ऐसे मौसम में आप जितना एक्टिव रहेंगे आपको श्वसन संबंधी रोग होने का 5. खतरा उतना बढ़ जाएगा।
6. वायु प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करें। ऊर्जा संरक्षण, कार पूलिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे अभियानों में सहयोग दें।

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