पिछले कुछ सालों से कम उम्र में लोगों में दिल के रोगों का खतरा बढ़ता जा रहा है। हार्ट अटैक से बचाव के लिए एस्पिरिन (Aspirin) को एक असरदार ब्लड थिनर दवा के रूप में देखा जाता रहा है। हालांकि चिकित्सा विज्ञान की नई रिसर्च और कार्डियोलॉजिस्ट्स का मानना है कि हर व्यक्ति के लिए रोज एस्पिरिन खाना सुरक्षित नहीं है। बिना डॉक्टरी सलाह के इसे नियमित रूप से लेने पर पेट में ब्लीडिंग (Internal Bleeding) और दूसरे गंभीर हेल्थ रिस्क हो सकते हैं। अमेरिकी प्रिवेंटिव सर्विसेज टास्क फोर्स (USPSTF) और प्रमुख हृदय विशेषज्ञों की नई गाइडलाइन के अनुसार 60 साल से अधिक उम्र के ऐसे लोग जिन्हें कभी दिल का दौरा या स्ट्रोक नहीं पड़ा है, उनके लिए बिना डॉक्टर की सलाह एस्पिरिन का सेवन करना फायदेमंद से ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है। तो सवाल उठता है कि रोज एस्पिरिन लेना किन मरीजों के लिए बेहद जरूरी है और किन लोगों को इससे दूरी बनानी चाहिए?

सीके बिड़ला अस्पताल, पंजाबी बाग, नई दिल्ली में कार्डियक साइंसेज (हृदय रोग विभाग) के निदेशक और वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अंशुल कुमार जैन ने बताया जिन लोगों को पहले हार्ट अटैक, स्ट्रोक हो चुका है या जांच में धमनियों (जैसे कैरोटिड आर्टरी) में बीमारी की पुष्टि हो चुकी है, उनके लिए एस्पिरिन बेहद असरदार दवा है। यह खून के थक्के बनने का जोखिम कम करके दोबारा हार्ट अटैक या स्ट्रोक से बचाने में मदद करती है। ऐसे मरीजों में यह दवा जान बचाने वाली साबित हो सकती है, बशर्ते उन्हें इससे एलर्जी न हो।

क्या हर व्यक्ति को रोजाना एस्पिरिन लेनी चाहिए?

डॉक्टर अंशुल ने स्पष्ट किया कि एस्पिरिन हर व्यक्ति के लिए नहीं है। केवल हार्ट अटैक के डर से या बिना डॉक्टर की सलाह के इसे रोजाना लेना सही नहीं है। डॉक्टर  मरीज के हार्ट अटैक के 10 साल के संभावित जोखिम का आकलन करने के बाद ही यह तय करते हैं कि एस्पिरिन की जरूरत है या नहीं।

मौजूदा मेडिकल गाइडलाइंस क्या कहती हैं?

JAMA Network में प्रकाशित US Preventive Services Task Force (USPSTF) की Recommendation Statement के मुताबिक, जिन लोगों को पहले कभी हार्ट अटैक या स्ट्रोक नहीं हुआ है, उनमें रोजाना लो-डोज एस्पिरिन शुरू करने का फैसला उम्र, 10 साल से हृदय रोग के जोखिम और ब्लीडिंग के खतरे को ध्यान में रखकर व्यक्तिगत आधार पर किया जाना चाहिए। 40–59 वर्ष के ऐसे वयस्क जिनमें 10 साल में हृदय रोग का जोखिम 10% या उससे अधिक है, डॉक्टर उनके लिए एस्पिरिन शुरू करने का निर्णय लेते हैं। वहीं 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में पहली बार हार्ट अटैक या स्ट्रोक की रोकथाम के लिए एस्पिरिन शुरू करने की सिफारिश नहीं की जाती, क्योंकि इससे होने वाले संभावित नुकसान लाभ से अधिक हो सकते हैं।

जिन लोगों को पहले कभी हार्ट अटैक या स्ट्रोक नहीं हुआ

40–59 वर्ष के ऐसे लोग जिनमें अगले 10 वर्षों में हृदय रोग का जोखिम 10% अधिक है, उनके लिए एस्पिरिन शुरू करने का फैसला व्यक्तिगत जोखिम और डॉक्टर की सलाह के आधार पर होना चाहिए। अगर ब्लीडिंग का खतरा ज्यादा है, तो एस्पिरिन शुरू नहीं करनी चाहिए।

60 वर्ष या उससे अधिक उम्र

  1. 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में पहली बार हार्ट अटैक या स्ट्रोक से बचाव के लिए एस्पिरिन शुरू करने की सलाह नहीं दी जाती, क्योंकि इस दवा से संभावित नुकसान फायदे से ज्यादा हो सकते हैं।

जिन लोगों को पहले हार्ट अटैक, स्ट्रोक या कोरोनरी आर्टरी डिजीज हो चुकी है (Secondary Prevention)

  • ऐसे मरीजों में एस्पिरिन अभी भी इलाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे बिना डॉक्टर की सलाह के बंद नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे दोबारा हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।

किन लोगों में एस्पिरिन से ब्लीडिंग का खतरा ज्यादा होता है?

  • पेट का अल्सर या पहले गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग हो चुकी हो
  • ब्लड थिनर (Anticoagulants) ले रहे हों
  • अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर
  • अधिक उम्र
  • प्लेटलेट या ब्लीडिंग डिसऑर्डर

एस्पिरिन शुरू करने से पहले मरीज की मेडिकल हिस्ट्री है जरूरी

डॉक्टर मरीज का ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, उम्र, धूम्रपान की आदत, कोलेस्ट्रॉल और दूसरे जोखिम कारकों के आधार पर हार्ट अटैक का जोखिम मापते हैं। इसके लिए विभिन्न रिस्क कैलकुलेटर और स्कोरिंग सिस्टम का उपयोग किया जाता है। अगर मरीज इंटरमीडिएट या हाई-रिस्क श्रेणी में आता है, तभी एस्पिरिन पर विचार किया जाता है।

एस्पिरिन के क्या खतरे हैं?

एस्पिरिन खून को पतला करती है, इसलिए इसके साथ ब्लीडिंग का खतरा भी जुड़ा रहता है। इससे पेट में अल्सर, पाचन तंत्र से खून आना और कुछ मामलों में मस्तिष्क में ब्लीडिंग (हेमरेजिक स्ट्रोक) जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए इसे बिना जरूरत और बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं खाना चाहिए।

क्या जेब में हमेशा एस्पिरिन की गोली रखनी चाहिए?

डॉक्टर अंशुल ने बताया हेल्दी लोगों को एहतियात के तौर पर जेब में एस्पिरिन लेकर चलने की जरूरत नहीं है। हालांकि जिन लोगों में हार्ट अटैक का जोखिम अधिक है, जैसे कम उम्र में परिवार के किसी सदस्य को हार्ट अटैक हुआ हो और साथ में हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज जैसे जोखिम कारक भी हों, उनके मामले में डॉक्टर एस्पिरिन को हमेशाा साथ रखने की सलाह देते हैं।

हार्ट अटैक से बचाव का सबसे अच्छा तरीका क्या है?

हार्ट अटैक से बचाव के लिए केवल दवा पर निर्भर रहने के बजाय हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाना ज्यादा जरूरी है। वजन कंट्रोल रखना, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को कंट्रोल में रखना, धूम्रपान से दूरी बनाना, नियमित व्यायाम करना और संतुलित आहार लेना हार्ट अटैक से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय हैं।

प्राइमरी और सेकेंडरी प्रिवेंशन में क्या अंतर है?

यदि किसी व्यक्ति को पहले कभी हार्ट अटैक या स्ट्रोक नहीं हुआ है, लेकिन भविष्य में होने का खतरा अधिक है, तो इसे प्राइमरी प्रिवेंशन कहा जाता है। ऐसे मामलों में एस्पिरिन केवल चुनिंदा मरीजों को ही दी जाती है। वहीं, जिन लोगों को पहले हार्ट अटैक, स्ट्रोक या एंजियोप्लास्टी या बायपास हो चुका है, उनके लिए इसे सेकेंडरी प्रिवेंशन कहा जाता है और ऐसे मरीजों में एस्पिरिन आमतौर पर लंबे समय, अक्सर जिंदगी भर दी जाती है।

हार्ट अटैक के मरीज एस्पिरिन कब तक लेते हैं?

डॉक्टर अंशुल ने बताया जिन लोगों को हार्ट अटैक हो चुका है, स्ट्रोक, एंजियोप्लास्टी या बायपास हो चुका है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार एस्पिरिन लंबे समय तक, कई मामलों में जीवनभर लेनी पड़ती है। ऐसे मरीजों को अपनी मर्जी से दवा बंद नहीं करनी चाहिए।

क्या सिर्फ डायबिटीज होने पर एस्पिरिन जरूरी है?

सिर्फ डायबिटीज होना एस्पिरिन शुरू करने का कारण नहीं है। डायबिटीज वाले लोगों में एक ओर हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है, वहीं दूसरी ओर ब्लीडिंग का जोखिम भी अधिक हो सकता है। इसलिए ऐसे मरीजों में भी डॉक्टर पहले कुल कार्डियोवैस्कुलर रिस्क और ब्लीडिंग रिस्क का आकलन करते हैं, उसके बाद ही एस्पिरिन की सलाह देते हैं।

कार्डियोलॉजिस्ट ने बताया कि पहले लोगों में यह धारणा बन गई थी कि एस्पिरिन खाने से हार्ट अटैक नहीं होगा, इसलिए कई लोग इसे खुद से लेने लगे। लेकिन वर्तमान वैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं कि हेल्दी लोगों में बिना जोखिम का आकलन किए एस्पिरिन शुरू करना उचित नहीं है। इसलिए अब इसका इस्तेमाल केवल चुनिंदा मरीजों में डॉक्टर की सलाह पर ही किया जाता है।

डॉक्टर की खास सलाह

कार्डियोलॉजिस्ट ने बताया कोई भी स्वस्थ व्यक्ति केवल हार्ट अटैक के डर से एस्पिरिन लेना शुरू न करे। एस्पिरिन तभी लें जब डॉक्टर आपकी जांच, जोखिम और ब्लीडिंग की संभावना का आकलन करने के बाद इसकी सलाह दें। वहीं, जिन मरीजों को हार्ट अटैक, स्ट्रोक या एंजियोप्लास्टी हो चुकी है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना एस्पिरिन बंद नहीं करनी चाहिए।

डिस्क्लेमर: बिना कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह के खुद से एस्पिरिन शुरू या बंद न करें।