बढ़ती उम्र का मतलब कमजोरी या दूसरों पर निर्भर होना नहीं है। अगर सही लाइफस्टाइल और नियमित शारीरिक गतिविधि अपनाई जाए तो 80 साल की उम्र के बाद भी व्यक्ति फिट, ऊर्जावान और आत्मनिर्भर रह सकता है। मैं होलिस्टिक हेल्थ एक्सपर्ट और FIT India Movement Champion डॉ. मिकी मेहता हूं और मेरे हिसाब से हेल्दी एजिंग के लिए साइकिलिंग सबसे सुरक्षित और प्रभावी एक्सरसाइज में से एक है। साइकिलिंग न केवल हृदय, फेफड़ों और मांसपेशियों को मजबूत बनाती है, बल्कि जोड़ों की गतिशीलता, संतुलन, मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक कार्य करने की क्षमता को भी लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करती है। हाल ही में 80 वर्ष की उम्र में हॉलीवुड अभिनेता हैरिसन फोर्ड की साइकिल चलाते हुए तस्वीर सामने आई, तस्वीरें इस बात का उदाहरण हैं कि एक्टिव लाइफस्टाइल उम्र बढ़ने के बावजूद शरीर को फिट और मजबूत बनाए रख सकता है।
80 साल से ज़्यादा की उम्र के लोगों के लिए, कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस, मांसपेशियों की सहनशक्ति, जोड़ों की गतिशीलता, संतुलन बनाए रखने के लिए साइकिल चलाना सबसे सुरक्षित और असरदार तरीकों में से एक है। 80 की उम्र के बाद साइकिल चलाने का मकसद जवानी को वापस पाना नहीं, बल्कि काम-काज के लिहाज़ से फिट और ऊर्जावान बने रहना और आत्मविश्वास के साथ ज़िंदगी का आनंद लेना है। हम सभी जानते हैं कि हमारे शरीर के निचले हिस्से को ज़्यादा स्टिमुलेशन की जरूरत होती है क्योंकि यह हमारे शरीर का एक-तिहाई हिस्सा है; और जब हम निचले हिस्से को सही तरीके से स्टिमुलेट करते हैं, तो हमारा एनर्जी मैनेजमेंट बेहतर होता है। लोअर पार्ट को एक्टिव रखने के लिए आप स्टेशनरी बाइक से शुरुआत कर सकते हैं।
क्यों जरूरी है लोअर बॉडी को मजबूत रखना?
शरीर का निचला हिस्सा यानी लोअर बॉडी सबसे बड़े मसल ग्रुप का घर होता है। इसमें ग्लूट्स, क्वाड्रिसेप्स, हैमस्ट्रिंग और पिंडलियों की मांसपेशियां शामिल हैं। यही मांसपेशियां शरीर की ताकत, संतुलन और मूवमेंट की आधारशिला हैं। जब हम साइकिल चलाते हैं तो ये सभी मांसपेशियां लगातार काम करती हैं। इससे रक्त संचार बेहतर होता है, शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन अधिक मात्रा में पहुंचती है और मेटाबॉलिज्म सक्रिय रहता है।
नियमित साइकिलिंग पाचन में सुधार, अच्छी नींद, ऊर्जा के बेहतर उपयोग और इम्यूनिटी को इंप्रूव करने के लिए बेहद मददगार साबित होती है। साइकिलिंग शुरू करने के लिए उम्र नहीं, बल्कि व्यक्ति की फंक्शनल फिटनेस ज्यादा मायने रखती है। कई बार 80 साल के लोग भी 50 साल के निष्क्रिय लोगों से अधिक फिट होते हैं। कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि 80 और 90 वर्ष की उम्र में भी नियमित व्यायाम और रेजिस्टेंस ट्रेनिंग से मांसपेशियों की ताकत और उनका आकार कुछ हद तक बढ़ाया जा सकता है। हालांकि बढ़ती उम्र में मांसपेशियों का प्राकृतिक रूप से कम होना सार्कोपेनिया और हार्मोन में कमी जैसी वजहों से युवाओं जैसी बॉडी बनाना न तो आसान है और न ही जरूरी।
क्या किसी भी उम्र में साइकिलिंग शुरू की जा सकती है?
उम्र कोई तय करने वाली बात नहीं है, बल्कि फंक्शनल फिटनेस मायने रखती है। मैंने 80 साल की उम्र के ऐसे लोगों को देखा है जो 50 साल के लोगों से ज़्यादा काबिल हैं, क्योंकि वे ज़िंदगी भर एक्टिव रहे हैं। रिसर्च से पता चला है कि 80 और 90 साल के बुजुर्ग भी रेजिस्टेंस ट्रेनिंग से अपनी मांसपेशियों की ताकत और मांसपेशियों का द्रव्यमान बढ़ा सकते हैं। हालांकि, उम्र के साथ होने वाले बदलावों जैसे कि सार्कोपेनिया यानी मांसपेशियों का कम होना, एनाबोलिक रेजिस्टेंस (मांसपेशियां बनाने की क्षमता में कमी) और हार्मोन के स्तर में प्राकृतिक गिरावट के कारण, युवा बॉडी बिल्डर जैसी बहुत ज्यादा मस्कुलर बॉडी पाना आम बात नहीं है और अक्सर यह न तो प्रैक्टिकल होता है और न ही ज़रूरी।
साइकिलिंग कैसे फायदेमंद है
साइकिलिंग बुजुर्गों के लिए सबसे अच्छी कम-ज़ोर वाली (low-impact) एरोबिक एक्सरसाइज में से एक है। यह जोड़ों पर ज्यादा दबाव डाले बिना दिल और फेफड़ों को हेल्दी रखती है। साइकिलिंग से दिल, फेफड़ों और ब्लड सर्कुलेशन सिस्टम की कार्यक्षमता बेहतर होती है, जिससे शरीर ऑक्सीजन का बेहतर इस्तेमाल कर पाता है। लोग अक्सर साइकिलिंग से अच्छा फ़ायदा उठाते हैं क्योंकि बार-बार पैडल मारने की गति से साइनोवियल फ्लूइड का सर्कुलेशन आसान होता है, जोड़ों की जकड़न कम होती है और घुटने व कूल्हे को सहारा देने वाली मांसपेशियां मज़बूत होती हैं। हालांकि गंभीर ऑस्टियोआर्थराइटिस, ज़्यादा विकृति या लगातार दर्द होने पर शुरू करने से पहले हमेशा जांच करवानी चाहिए। मांसपेशियों की सेहत उतनी ही ज़रूरी है जितनी दिल की सेहत।
साइकिलिंग आपके मूड को भी बेहतर बनाती है। कई मानसिक मरीज़ों ने, जब उन्हें देख-रेख में साइकिलिंग की सलाह दी गई, तो बेहतर परिणाम पाए क्योंकि इसका मतलब था खुली हवा में निकलना और पर्यावरण से जुड़ना, जिससे जीवन के प्रति उनका उत्साह बढ़ा। धूप में आसमान, पेड़ों, पक्षियों और मधुमक्खियों के साथ लंबी दूरी तक धीरे-धीरे साइकिलिंग करने से हमारी ऊर्जा का स्तर बढ़ता है और सचमुच हमें जीवन की ज्यादातर समस्याओं का समाधान मिल जाता है। आराम से साइकिल चलाते समय हमें कई अच्छे विचार आते हैं।
80 की उम्र के बाद साइकिल की शुरुआत करते समय इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप 80 की उम्र के बाद साइकिल चलाना शुरू कर रहे हैं, तो जल्दबाजी या बड़े लक्ष्य के बजाय धैर्य से काम लें। पहले स्टेशनरी बाइक का इस्तेमाल करें और अगर आप फिट महसूस करें, तो छोटी राइड पर जाएं। सही फिटिंग वाली साइकिल और धीरे-धीरे आगे बढ़ना, स्पीड या दूरी से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है। अगर आप साइकिल चलाना शुरु कर रहे हैं तो हेलमेट पहनें, शरीर में पानी की कमी न होने दें, हर राइड से पहले वार्म-अप करें और साइकिलिंग के साथ-साथ स्ट्रेंथ, बैलेंस और फ्लेक्सिबिलिटी वाली एक्सरसाइज भी करें। अगर साइकिल चलाने के दौरान सीने में दर्द, चक्कर आना, सांस लेने में असामान्य तकलीफ़, जोड़ों में बढ़ती सूजन या लगातार दर्द रहे तो आप उसे नजरअंदाज नहीं करें और डॉक्टर से सलाह लें।
डिस्क्लेमर: यह लेख विशेषज्ञ की राय और उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी पर आधारित है। यदि आपकी उम्र अधिक है या आप किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित हैं, तो साइकिलिंग या कोई भी नया व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
(डॉ. मेहता एक होलिस्टिक हेल्थ एक्सपर्ट हैं)
