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COVID-19: A ब्लड ग्रुप वालों को कोरोना संक्रमण का अधिक खतरा, जानिये- एक्सपर्ट्स ने क्या कहा

Coronavirus Research: इसी रिसर्च से पता चला है कि ओ ब्लड ग्रुप के लोगों में कोरोना वायरस के घातक बनने का खतरा सबसे कम होता है।

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Coronavirus Research: वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। देश में संक्रमितों की कुल संख्या 2.5 लाख के करीब पहुंच चुकी है जबकि करीब 7 हजार लोगों की मौत इस वायरस के कारण हो चुकी है। इटली व स्पेन जैसे देशों को पछाड़कर भारत इस वायरस से प्रभावित देशों की सूची में छठे स्थान पर आ चुका है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में वैज्ञानिक कोरोना वायरस को लेकर अध्ययन कर रहे हैं जिसमें कई बातें सामने आ रही हैं। इस बीच जर्मनी के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि ए ब्लड ग्रुप के लोगों को इस वायरस के संक्रमण का अधिक खतरा है। आइए जानते हैं क्या बता रहे हैं एक्सपर्ट्स-

स्टडी में ये चला है पता: जर्मनी की कील यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं मे हाल में किए गए एक रिसर्च में दावा किया है कि इस वायरस का संबंध DNA के एक खास हिस्से से है। बता दें कि रिसर्चर्स ने इटली और स्पेन के गंभीर कोरोना मरीज जिन्हें सांस लेने में समस्या हो रही थी उन्हें अपने शोध में शामिल किया था। इन मरीजों के जीनोम सीक्वेंस को इस रिसर्च में जांचा गया जिसके बाद शोधकर्ताओं ने बताया कि मरीजों के डीएनए रिपोर्ट में एक कॉमन पैटर्न दिखा। उनके अनुसार ये पैटर्न लोगों में मौत का खतरा बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हो सकता है।

A ब्लड ग्रुप वालों को खतरा अधिक: शोधकर्ताओं के अनुसार इस ब्लड ग्रुप के लोगों में दूसरों की तुलना में संक्रमण का खतरा 6 प्रतिशत तक अधिक होता है। उनके मुताबिक A ब्लड ग्रुप के लोगों को सांस लेने में तकलीफ ज्यादा हो सकती है। यहां तक कि 50 प्रतिशत खतरा होता है कि इन मरीजों को वेंटिलेटर पर रखने की नौबत आ जाए।

O ब्लड ग्रुप वालों को खतरा कम: इसी रिसर्च से पता चला है कि ओ ब्लड ग्रुप के लोगों में कोरोना वायरस के घातक बनने का खतरा सबसे कम होता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि ए ब्लड ग्रुप वालों के अधिक संवेदनशील होने के पीछे इम्युन सिस्टम का हाथ भी हो सकता है। उनके अनुसार इम्युनिटी जब ओवर-ऐक्टिव हो जाती है तो फेफड़ों में सूजन बढ़ जाता है और बाकी अंग भी इससे प्रभावित होते हैं।

WHO ने जारी की नई गाइडलाइन: WHO ने फेस मास्क पहनने से जुड़ी नई गाइडलाइन जारी की है जिसके अनुसार स्वस्थ लोगों को भी तीन परतों वाली फैब्रिक मास्क पहनने की जरूरत होगी। इसमें कॉटन, पॉलिस्टर और बीच में पोलिप्रोपायलीन की परत होनी चाहिए। इसके अलावा, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड यहां तक कि दुकानों जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में मास्क पहनना अनिवार्य होगा। वहीं, जहां पर संक्रमण ज्यादा है वहां सभी लोगों को मेडिकल-ग्रेड का मास्क ही इस्तेमाल करना चाहिए। WHO ने मास्क के नुकसान को बताते हुए कहा है कि गीला होने पर मास्क बदल लेना चाहिए। साथ ही, डब्ल्यूएचओ ने बताया कि कोरोना से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग और बार-बार हाथों को धोना भी बेहद जरूरी है।

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