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कोविड-19 की चपेट में आए बच्चों को टाइप-1 डायबिटीज होने का अधिक खतरा, रिसर्च में हुआ खुलासा

कोविड से प्रभावित बच्चों को टाइप-1 डायबिटीज का रिस्क ज्यादा हो सकता है इसलिए शुगर की जांच कराएं।

कोविड-19 की चपेट में आए बच्चों को टाइप-1 डायबिटीज होने का अधिक खतरा, रिसर्च में हुआ खुलासा
कोविड-19 की चपेट में आए 18 साल से कम उम्र के बच्चों को टाइप-1 डायबिटीज हो सकती है। photo-freepik

कोरोना महामारी आज भी दुनिया से पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। इसने करोड़ों लोगों को अपनी चेपट में लिया। बच्चे भी कोरोना बीमारी से अछूते नहीं रहे। हालांकि वयस्कों के मुकाबले बच्चे और किशोरों में कोविड-19 संक्रमण कम देखा गया लेकिन अब नई रिसर्च में चिंता करने वाली बात सामने आई है। एक ताजा अध्ययन में दावा किया गया है कि जिन बच्चों या किशोरों को कोविड-19 हुआ है उनमें टाइप-1 डाइबिटीज का जोखिम कई गुना बढ़ सकता है।

अध्ययन के नतीजे को जामा ओपन नेटवर्क जर्नल में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन के मुताबिक 18 साल से कम उम्र के बच्चों में टाइप 1 डाइबिटीज के इलाज में 72 प्रतिशत का लंबा उछाल आया है। हालांकि अभी इसमें और अधिक शोध करने की जरूरत है क्योंकि अभी यह पूरी तरह साबित नहीं हुआ है कि कोरोना की वजह से ही इन बच्चों में टाइप- 1 डाइबिटीज हुआ है।

कोविड-19 ने बढ़ाया टाइप-1 डायबिटीज का जोखिम:

अमेरिका में वेस्टर्न रिजर्व स्कूल ऑफ मेडिसीन की प्रोफेसर पामेला डेविस ने बताया कि टाइप 1 डाइबिटीज एक ऑटोइम्युन डिजीज है। इसमें शऱीर की रक्षात्मक प्रणाली सेल पर आक्रमण कर देती है जिसके कारण इंसुलिन नहीं बन पाता है। उन्होंने बताया कि हमारे अध्ययन में भी यह बात साबित हुई है कि कोविड ने ऑटोइम्युन प्रतिक्रियाओं को बढ़ाने का काम किया है। अध्ययन के मुताबिक कोविड के कारण बच्चों में टाइप 1 डाइबिटीज का जोखिम बढ़ा है।

टाइप-1 डायबिटीज और कोविड का संबंध:

अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 18 साल से कम उम्र के 11 लाख बच्चे के हेल्थ रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इसमें अमेरिका सहित 13 देशों के बच्चों को शामिल किया गया था। इन बच्चों को मार्च 2020 से दिसंबर 2021 के बीच कोरोना हुआ था और इनका इलाज किया गया था। इसमें कुछ ऐसे मरीजों को भी शामिल किया था जिन्हें कोरोना तो नहीं हुआ था लेकिन सांस संबंधित दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।

अध्ययन में पाया गया कि जो लोग कोरोना से पीड़ित हुए थे उनमें 123 मरीजों में टाइप-1 डायबिटीज के लक्षण मौजूद थे। ये लोग टाइप 1 डाइबिटीज का इलाज करा रहे थे। वहीं बिना कोरोना वाले मरीजों में 72 ने टाइप 1 डायबिटीज का इलाज कराया। इस तरह पहले के मुकाबले 72 प्रतिशत अधिक बच्चों ने टाइप 1 डाइबिटीज का इलाज कराया। इलाज कराने वाले ये लोग पहले कोरोना से पीड़ित थे।

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First published on: 27-09-2022 at 06:26:08 pm
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