अक्सर लोग घर में बुखार होने पर माथे पर बर्फ के ठंडे पानी की पट्टी रखते हैं। घरेलू नुस्खों में इसे बुखार उतारने का बेस्ट तरीका माना जाता है लेकिन आप जानते हैं कि मेडिकल साइंस बर्फ के ठंडे पानी की स्पंजिंग करने की इजाज़त नहीं देता। डॉक्टरों के मुताबिक ठंडे पानी की पट्टी से स्पंजिंग मरीज की हालत को और ज्यादा बिगाड़ सकती है। मेडिकल साइंस के अनुसार, बुखार उतारने का यह पारंपरिक तरीका न केवल गलत है, बल्कि खतरनाक भी साबित हो सकता है। जब किसी व्यक्ति को बुखार होता है, तो अक्सर शरीर को जल्दी ठंडा करने की कोशिश की जाती है जिसके लिए कभी-कभी ठंडे पानी से भी माथा और बॉडी को साफ किया जाता है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह तरीका उल्टा असर कर सकता है।

आर्टेमिस अस्पताल में कंसल्टेंट Dr Meenal Thakral ने बताया बुखार उतारने के लिए रूम टेम्परेचर या गुनगुने पानी का इस्तेमाल करना न सिर्फ ज्यादा सुरक्षित है, बल्कि ज्यादा प्रभावी भी है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि बुखार उतारने के लिए ठंडे पानी की पट्टी कैसे नुकसान पहुंचाती है? क्या ठंडा पानी बुखार बढ़ा सकता है जानिए।

ठंडे पानी की पट्टी क्यों नहीं करना चाहिए?

डॉ. ठकराल बताती हैं कि बुखार उतारने के लिए रूम टेम्परेचर या गुनगुना पानी बेहतर होता है क्योंकि यह शरीर को धीरे-धीरे ठंडा करता है और उसे तनाव में नहीं डालता। बुखार के दौरान शरीर का आंतरिक तापमान पहले से ही बढ़ा हुआ होता है ऐसे में ठंडा पानी स्किन को झटका देता है, जिससे ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाते हैं और कंपकंपी शुरू हो जाती है, जो उल्टा शरीर में ज्यादा गर्मी पैदा करती है। अगर आप मरीज का बुखार उतारना चाहते हैं तो गुनगुने पानी की पट्टी माथे पर लगाएं। गुनगुना पानी शरीर के साथ तालमेल बनाकर काम करता है। यह स्किन के जरिए धीरे-धीरे गर्मी को बाहर निकलने देता है, जिससे तापमान नेचुरल तरीके से कम होता है। यह तरीका खासकर बच्चों के लिए ज्यादा आरामदायक होता है, जिससे प्रक्रिया शांत और प्रभावी बनती है।

क्या ठंडा पानी बुखार बढ़ा सकता है?

बुखार में जब मरीज के माथे पर या शरीर पर ठंडे पानी की पट्टी लगाई जाती है तो शरीर गर्मी को बचाने की कोशिश करता है। डॉ. ठकराल कहती हैं इससे कंपकंपी और वेसोकंसट्रिक्शन यानी रक्त वाहिकाओं में सिकुड़न होती है, जिससे शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती और अंदर ही दब जाती है। ठंडे पानी की पट्टी का असर सिर्फ थोड़े समय के लिए रहता है, उसके बाद बुखार जल्द वापस आ जाता है जिससे मरीज ज्यादा असहज और तनाव महसूस करता है। ठंडे पानी की पट्टी से स्पंज करने से शरीर का आंतरिक तापमान और बढ़ सकता है।

बच्चों और बुजुर्गों को लिए जरूरी है ये सावधानी

डॉ. ठकराल बताती हैं कि बच्चों और बुजुर्गों में शरीर का तापमान कंट्रोल करने की क्षमता कम स्थिर होती है। बच्चों में जल्दी कंपकंपी शुरू हो जाती है, जिससे तापमान और बढ़ सकता है। बुजुर्गों में ब्लड सर्कुलेशन कमजोर हो सकता है और शरीर की प्रतिक्रिया धीमी होती है। एक्सपर्ट ने बताया बच्चों और बुजुर्गों को ठंडे पानी से स्पंज बाथ देने पर उन्हें कमजोरी, ठंड लगना या अनहेल्दी महसूस हो सकता है, इसलिए इनके लिए हल्की और नियंत्रित ठंडक देना जरूरी है।

स्पंज बाथ देने का सबसे सुरक्षित तरीका

डॉ. ठकराल के अनुसार स्पंजिंग का सही तरीका अपनाना बहुत जरूरी है। सामान्य नल के पानी या हल्के गुनगुने पानी (Tepid Water) का इस्तेमाल करके आप मरीज के बदन पर या माथे पर स्पंज करें। इसे पूरे शरीर पर स्पंज करने से वाष्पीकरण (Evaporation) के जरिए बुखार धीरे-धीरे और सुरक्षित तरीके से कम होता है। स्पंज करने के लिए मुलायम कपड़ा और गुनगुना पानी का इस्तेमाल करें। स्पंज करने के लिए पहले माथे, गर्दन, बगल (armpits) और पीठ जैसे हिस्सों को धीरे-धीरे साफ करें, जहां से गर्मी आसानी से निकलती है।

इन बातों का रखें ध्यान

  • बहुत ठंडा पानी न इस्तेमाल करें।
  • पूरे शरीर को एक साथ न भिगोएं।
  • कमरे का तापमान आरामदायक रखें।
  • अगर व्यक्ति को कंपकंपी शुरू हो जाए, तो तुरंत रोक दें।
  • डॉक्टर ने बताया स्पंजिंग बाथ बॉडी को ठंडा करना नहीं बल्कि आराम देने का तरीका है।
  • इसके साथ मरीज को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार पैरासिटामोल जैसी दवाएं लें।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सार्वजनिक स्रोतों और विशेषज्ञों पर आधारित है। किसी भी उपचार को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।