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Coronavirus: आखिर किस तरह कोरोना वायरस फेफड़ों में घुसता है और सांस लेने में दिक्कत पैदा करता है? जानिये…

Coronavirus Pandemic: कोरोना वायरस आपके फेफड़ों को संक्रमित करता है, कई बार इसके कारण व्यक्ति को सांस लेने में भी दिक्कत पेश आती है।

अगर आपको खांसी में बलगम आता है तो ये चिंता की बात हो सकती है क्योंकि ये वायरस फेफड़ों में अधिक बलगम जमा देता है

Coronavirus Pandemic: वैश्विक महामारी बन चुके कोरोना वायरस से दुनिया भर में अब तक लगभग 14 लाख लोग संक्रमित हैं जिनमें से 80 हजार के करीब लोगों की मौत हो चुकी है। इस घातक वायरस के कुछ मामले ऐसे भी हैं जिनमें कोई भी लक्षण नहीं देखा गया था। हालांकि, सूखी खांसी और बुखार इसके आम शुरुआती लक्षणों में से हैं। इस वायरस से पीड़ित अधिकांश लोगों की मौत निमोनिया या फिर सांस लेने में परेशानी के वजह से हुई है। इससे साफ पता चलता है कि ये वायरस शरीर में जाकर फेफड़ों पर हमला करता है। कोरोना वायरस की चपेट में आए लोगों के फेफड़ों में म्यूकस यानि कि बलगम जम जाता है जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। आइए जानते हैं कि शरीर के अंदर जाने के बाद ये वायरस फेफड़ों को कैसे करता है प्रभावित-

फेफड़ों को यूं करता है प्रभावित: यह वायरस जब शरीर में जाता है तो फेफड़ों में मौजूद एयर पैसेज की लाइनिंग को चोट पहुंचाता है। एयर पैसेज फेफड़ों में हवा की आवाजाही के लिए जिम्मेदार होता है। जब वायरस इन्हें चोटिल करती हैं तो इससे सूजन हो जाता है। इस सूजन के चलते फेफड़ों की नसों में इरिटेशन होता है। एयर पैसेज में सूजन के परिणामस्वरूप ही लोगों को बार-बार खांसी आती है। जब एयर पैसेज ब्लॉक होता है तो लोगों की सांस लेने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

ऐसे बढ़ता है खतरा: ये वायरस अगर एयर पैसेज के लाइनिंग से गुजर कर उसके एयर सैक यानि कि वायु थैली तक पहुंच जाए तो और गंभीर रूप ले सकता है।  इस वायु थैली को आम भाषा में एल्वियोली (Alveoli) भी कहा जाता है। ये थैली फेफड़ों में गैस के आदान-प्रदान के लिए जिम्मेदार हैं। एल्वियोली के संक्रमित होने पर इसमें कुछ इंफ्लामेट्री तरल पदार्थ भर जाते हैं जिससे निमोनिया होने का खतरा अधिक हो जाता है। ऐसी स्थिति में फेफड़ों की ऑक्सीजन ट्रांसफर करने की क्षमता कम हो जाती है। जब कोई व्यक्ति पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं ले पाता है और पर्याप्त कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकाल सकता है, तो निमोनिया से मृत्यु हो सकती है।

लक्षण दिखने से पहले फेैल जाता है: WHO के एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार कोरोना के लक्षण दिखने से तीन दिन पहले से कोरोना वायरस दूसरों में फैल सकता है। ऐसे मरीजों की बड़ी संख्या है जो लक्षण दिखाई देने से पहले फैले वायरस का शिकार हो जाते हैं। वहीं, खांसी-बुखार के अलावा कोरोना के कुछ मरीजों में कार्डियक से संबंधित लक्षण भी देखे गए हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक न्यूयॉर्क, इटली से आए डाटा में देखा गया है कि कुछ कोरोना के मरीज हार्ट संबंधी दिक्कतों के साथ भी आ रहे हैं।

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