जल्द नहीं खत्म होने वाली है कोरोना महामारी : विशेषज्ञ

दुनिया का हर व्यक्ति जब तक कोरोना विषाणु से संक्रमित न हो जाए या कोरोना रोधी टीका न लगवा ले, तक तक दुनिया से यह महामारी नहीं जाने वाली है।

सांकेतिक फोटो।

दुनिया का हर व्यक्ति जब तक कोरोना विषाणु से संक्रमित न हो जाए या कोरोना रोधी टीका न लगवा ले, तक तक दुनिया से यह महामारी नहीं जाने वाली है। दुनिया के बड़े महामारी विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसा अभी जल्द नहीं होने वाला है। यानी यह बीमारी अभी जाने वाली नहीं है। एक वेबसाइट के मुताबिक अमेरिका के मिनेसोटा विश्वविद्यालय में संक्रामक बीमारी शोध एवं नीति केंद्र की निदेशक मिशेल आॅस्टेर्होल्म के अनुसार दुनिया में अभी अरबों की संख्या में लोगों को कोरोना रोधी टीका नहीं लगा है। ऐसे में अर्थव्यवस्थाओं के खुलने के साथ आने वाले समय में कक्षाओं, सार्वजनिक परिवहनों और दफ्तरों में कोरोना के नए मामले देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसे भी बहुत सारे लोग हैं जो टीका लगवाना ही नहीं चाहते हैं। ऐेसे लोग संक्रमण को बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

मिशेल कहती हैं कि अगले कुछ महीने बहुत की महत्त्वपूर्ण हैं। सबसे बड़ा खतरा तो कोरोना रोधी टीके के बाद सामने आ सकने वाले विषाणु के नए स्वरूपों का कहा है। मिशेल कहती हैं कि कोरोना विषाणु संक्रमण एक जंगल की आग की तरह है, जब तक यह जंगल के सभी पेड़ों तक नहीं पहुंचेगी, इसका बुझना असंभव है। यानी दुनिया का हर व्यक्ति जब तक कोरोना विषाण्ुा से संक्रमित न हो जाए या कोरोना रोधी टीका न लगवा ले, तक तक दुनिया से यह महामारी नहीं जाने वाली है।

डेनमार्क के रोस्किल्डे विश्वविद्यालय में महामारी विशेषज्ञ लोन सिमोनसेन का कहना है कि दुनिया में जब तक 90 से 95 फीसद लोग कोरोना विषाण्ुा से संक्रमित न हो जाएं या उन्हें कोरोना रोधी टीके न लग जाएं, तब तक यह महामारी दुनिया से नहीं जाएगी। वर्तमान में संक्रमण को रोकने के लिए टीकाकरण सबसे महत्त्वपूर्ण नीति है। दुनिया भर में अब तक कोरोना रोधी टीके की 5.66 अरब खुराक लग चुकी हैं। इस मामले में अब तक यूरोपीय यूनियन के देश, उत्तरी अमेरिका और चीन ही सफल दिख रहे हैं। अधिकतर अफ्रीकी देशों में अभी तक कुल पांच फीसद ही टीकाकरण हुआ है। वहीं, भारत इस मामले में थोड़ा आगे है जिसने अपनी 26 फीसद आबादी का टीकाकरण पूर्ण कर दिया है।

ब्रिटेन के आॅक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में ‘हिस्ट्री आॅफ मेडेसिन’ की प्रोफेसर एरिका चार्टर्स का कहना है कि पूरी दुनिया से कोरोना महामारी एक साथ समाप्त नहीं होगी। यह महामारी अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग समय पर खत्म होगी जैसे इससे पहले दुनिया में फैली महामारियों के साथ हुआ। अब यह देशों की सरकारों का तय करना है कि वे कब अपने देश से इस महामारी को खत्म करना चाहती हैं या उन्हें वे इस बीमारी के साथ जीने में कोई समस्या नहीं है। कुल मिलाकर कहें तो यह लंबे समय तक दुनिया में बनी रहने वाली है।

एरिका कहती हैं कि डेनमार्क और सिंगापुर ने अपने यहां संक्रमण के मामलों को नियंत्रित किया है और कुछ सावधानी के साथ वे कोरोना के पहले की स्थिति में पहुंच रहे हैं। दूसरी ओर, अमेरिका और ब्रिटेन अपने देशों की सीमाओं को अन्य देशों के नागरिकों के लिए खोल रहे हैं जबकि इन दोनों देशों में अभी भी मामले अच्छी खासी सख्या में आ रहे हैं। वहीं, चीन, हांगकांग और न्यूजीलैंड बहुत निगरानी के साथ काम कर रहे हैं और संक्रमण को स्थानीय स्तर पर ही दबाने का कार्य कर रहे हैं। एरिका कहती हैं कि महामारी की समाप्ति एक जैसी नहीं होने वाली है।

उनका कहना है कि कोरोना विषाण्ुा संक्रमण सिर्फ बायोलॉजिकल घटना नहीं है, इसके राजनीति और सामाजिक मायने भी हैं। एरिका कहती हैं कि कोई यदि यह सोचे की वह इस महामारी पर अगले कुछ दिनों या महीनों में काबू पा लेगा तो यह उसकी गलतफहमी ही होगी। जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय के मुताबिक दुनिया में अब तक 23.2 करोड़ से अधिक लोग कोरोना विषाण्ुा से संक्रमित हो चुके हैं। वहीं, 47.58 लाख लोगों की अब तक इस संक्रमण की वजह से जान जा चुकी है। अकेले अमेरिका में ही करीब 4.29 करोड़ संक्रमित हो चुके हैं जबकि 6.89 लाख से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। भारत में अब तक 3.37 करोड़ से ज्यादा लोग संक्रमित और 4.47 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। ब्राजील में 2.13 करोड़, ब्रिटेन में 77 लाख, रूस में 73 लाख और फ्रांस व तुर्की में 70-70 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं।

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