कोरोना के स्वदेशी टीके ‘कोवैक्सीन’ पर क्यों खड़े हो रहे हैं सवाल? जानिये- क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

मुंबई के केईएम हॉस्पिटल के डीन डॉ हेमंत देशमुख ने कहा कि अगर सरकार हमें विकल्प देती है तो हम ‘कोवैक्सीन’ के उपर ‘कोविशील्ड’ को तरजीह देंगे…

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सांकेतिक तस्वीर।

भारत में कोरोना से निपटने के लिए दो वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल को मंजूरी मिली है। ड्रग रेगुलेटर ने जिन दो वैक्सीन को मंजूरी दी है, उसमें सिरम इंस्टीट्यूट द्वारा तैयार की गई ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की ‘कोविशील्ड’ और भारत बायोटेक द्वारा निर्मित स्वदेशी ‘कोवैक्सन’ शामिल हैं। हालांकि इनको लेकर एक नया विवाद भी शुरू हो गया है। खासकर ‘कोवैक्सीन’ पर तमाम तरह के सवाल खड़े किए जा रहे हैं और आरोप लगाया जा रहा है कि बगैर परीक्षण पूरा किए ही इसे मंजूरी दी गई। ‘कोवैक्सीन’ के परीक्षण डाटा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स? मुंबई के केईएम हॉस्पिटल के डीन डॉ हेमंत देशमुख ने एनडीटीवी पर एक डिबेट के दौरान कहा कि अगर सरकार हमें विकल्प देती है तो हम ‘कोवैक्सीन’ के उपर ‘कोविशील्ड’ को तरजीह देंगे। उन्होंने कहा कि ‘कोविशील्ड’ को ही प्राथमिकता देनी चाहिए। वहीं, आईएलबीएस के चेयरमैन डॉ एसके सरीन ने कहा कि कोवैक्सीन ट्रायल के पुराने रिजल्ट को देखें तो यह वैक्सीन कारगर साबित हो सकती है और होनी चाहिए, लेकिन मैं यह नहीं कह रहा हूं की होगी ही।

उधर, और कई एक्सपर्ट्स ने भी कोवैक्सीन पर सवाल उठाए हैं। इसमें चर्चित संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर जयप्रकाश मुलयिल भी शामिल हैं। उन्होंने वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी देने वाले कदम को जल्दबाजी भरा करार दिया है। बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा कि आखिर सरकार समय से पूर्व (बगैर परीक्षण पूरा हुए) इस वैक्सीन को क्यों लॉन्च करना चाहती है?

भारत में मेडिसिन के इस्तेमाल पर नजर रखने वाले एनजीओ के संगठन ‘ऑल इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क’ की सह संयोजक मालिनी आइसोला ने सरकार के इस कदम को चौंकाने वाला बताया है और लिखा कि यह कदम केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की गाइडलाइंस का भी उल्लंघन है।

एम्स डायरेक्टर के बयान पर विवाद: ‘कोवैक्सीन’ को लेकर खड़े हो रहे तमाम सवालों के बीच एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा था कि कोवैक्सीन का इस्तेमाल एक बैकअप की तरह किया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि अगर कोरोनावायरस के मरीजों की संख्या बढ़ी तो हमें वैक्सीन की जरूरत पड़ेगी और कोवैक्सीन का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि वैक्सीन की निर्माता कंपनी भारत बायोटेक के निदेशक ने गुलेरिया के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि ऐसे बयानों से बचना चाहिए। कोवैक्सीन बैकअप नहीं, बल्कि फुल वैक्सीनेशन में यूज होगी।

विवाद पर क्या है सरकार का रुख? कोवैक्सीन को लेकर खड़े किए जा रहे तमाम सवालों के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने सिलसिलेवार ट्वीट में लिखा कि कोवैक्सीन को शर्त के साथ आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दी गई है। जो लोग अफवाह फैला रहे हैं, वे जान लें कि कोवैक्सीन जिन लोगों को लगेगी उनको ट्रैक किया जाएगा और मॉनिटरिंग की जाएगी।

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