हमारा पेट सिर्फ खाना पचाने का काम नहीं करता बल्कि ये हमारी बॉडी का दूसरा ब्रेन है। आधुनिक विज्ञान और World Gastroenterology Organisation की शोध रिपोर्टों के मुताबिक हमारे शरीर की 70% इम्यूनिटी हमारी आंतों में होती है। हमारी आंतों में अरबों गुड बैक्टीरिया मौजूद होते हैं जिन्हें गट माइक्रोबायोम कहा जाता है। जब गट माइक्रोबायोम का संतुलन बिगड़ता है तो पेट में कई तरह की समस्याएं जैसे पेट में गैस, एसिडिटी, अपच जैसी समस्याएं होने लगती हैं जिसका सीधा असर हमारे मूड से लेकर स्किन और मानसिक हेल्थ पर देखने को मिलता है। अगर लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव किया जाए तो गट माइक्रोबायोम को बैलेंस में रखा जा सकता है।
डॉ. जोसेफ सलहाब (Dr. Joseph Salhab) जो एक प्रसिद्ध अमेरिकी गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट हैं और जिन्हें सोशल मीडिया पर The Stomach Doc के नाम से जाना जाता है। जोसेफ सोशल मीडिया पर रिसर्च बेस्ड वीडियों के जरिए लोगों की गट हेल्थ, लिवर और पोषण के बारे में जानकारी देते हैं। डॉ. जोसेफ सलहाब ने बताया कुछ फूड्स ऐसे हैं जो आपकी आंतों को हेल्दी रखने में बेहद मददगार साबित होते हैं। कुछ फूड ऐसे हैं जो आंतों के गुड बैक्टीरिया को पोषण देते हैं और आपकी बॉडी को हेल्दी रखते हैं। आइए जानते हैं कि गट हेल्थ में सुधार करने के लिए कौन से फूड्स का सेवन करें।
ताज़े खजूर खाएं पेट के लिए सॉफ्ट और नेचुरल मिठास है
एक्सपर्ट ने बताया अगर आप गट हेल्थ में सुधार करना चाहते हैं तो आप रोज खजूर खाएं। खजूर में घुलनशील फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, जो प्रीबायोटिक की तरह काम करता है। इन फूड्स का सेवन करने से पेट के गुड बैक्टीरिया को पोषण मिलता है। ये फूड बिना ब्लोटिंग के पाचन को दुरुस्त करता है। न्यूट्रिशन एक्सपर्ट गट हेल्थ में सुधार करने के लिए खजूर का सेवन करने की सलाह देते हैं। इनमें पोटैशियम, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मौजूद होते हैं जो शरीर में हाइड्रेशन और मांसपेशियों की रिकवरी में मददगार हैं।
फर्मेंटेड अचार का करें सेवन
फर्मेंटेड अचार का सेवन आपकी गट हेल्थ में सुधार कर सकता है। गाजर, खीरा जैसी सब्जियों को सिरके की जगह जब नमक के घोल में डाला जाता है तो उसमें गुड बैक्टीरिया विकसित होते हैं जो गट बैलेंस में सुधार करते हैं और पाचन को बेहतर करते हैं। Journal of Physiological Anthropology के अनुसार जब सब्जियों को नमक के घोल में फर्मेंट किया जाता है, तो उसमें लैक्टोबैसिलस जैसे गुड बैक्टीरिया पैदा होते हैं। ये जीवित बैक्टीरिया हमारी आंतों में पहुंचकर गट माइक्रोबायोम के संतुलन को सुधारते हैं। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जिन्हें लैक्टोज इनटोलरेंस है और वे दही नहीं खा सकते। दोपहर के भोजन के साथ एक-दो चम्मच अचार न सिर्फ स्वाद बढ़ाता है, बल्कि पाचन भी बेहतर करता है। समय के साथ ये आदत गट की विविधता (gut diversity) बढ़ाने में मदद कर सकती है।
ग्रीक योगर्ट खाएं
ग्रीक योगर्ट में प्रचुर मात्रा में प्रोबायोटिक्स होते हैं, जो पाचन तंत्र में गुड बैक्टीरिया को दोबारा बसाने में मदद करते हैं। इसकी गाढ़ी बनावट का मतलब है ज्यादा प्रोटीन और कम लैक्टोज, जिससे ये संवेदनशील पेट के लिए भी बेस्ट रहता है। सादा और बिना शक्कर वाला ग्रीक योगर्ट में ऊपर से थोड़ा शहद या कुछ बेरीज़ डालकर खाएं गट हेल्थ में सुधार होगा। Journal of Dairy Science के अनुसार, ग्रीक योगर्ट को बनाने की प्रक्रिया में इसका अतिरिक्त पानी निकाल दिया जाता है, जिससे इसमें लाइव बैक्टीरिया जैसे Lactobacillus और Bifidobacterium की सघनता दही के मुकाबले ज्यादा होती है। ये बैक्टीरिया आंतों के हानिकारक बैक्टीरिया से लड़ते हैं और माइक्रोबायोम के संतुलन को बहाल करते हैं, जिससे पेट फूलने और कब्ज की समस्या कम होती है।
तरबूज और नींबू का करें सेवन
तरबूज पर नींबू का रस डालकर खाना गर्मी के लिए बेस्ट फूड है जो गर्मी में बॉडी को हाइड्रेट करता है और पाचन में सुधार करता है। तरबूज शरीर को तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स देता है, जबकि नींबू पाचन एंजाइम की गतिविधि को बढ़ाता है। नींबू और तरबूज का सेवन बॉडी में हाइड्रेशन, डिटॉक्स और पाचन क्रिया में सुधार करता है।
ब्रोकली खाएं
ब्रोकली का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद होता है,लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि ये सब्जी आंत की हेल्थ सुधारने में भी असरदार साबित होती है। इसमें मौजूद फाइबर पाचन को हेल्दी रखता है। इसमें पाया जाने वाला सल्फोराफेन (Sulforaphane) नामक यौगिक आंत की अंदरूनी परत को मजबूत बनाता है और सूजन से बचाने में मदद करता है। ब्रोकली को हल्का स्टीम करना बेहतर होता है, क्योंकि इससे इसके पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। ऊपर से थोड़ा ऑलिव ऑयल और नींबू डालने से स्वाद भी बढ़ता है और विटामिन का अवशोषण भी आसान हो जाता है।
डिस्क्लेमर:
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। अपनी डाइट या जीवनशैली में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें, विशेषकर यदि आप किसी पुरानी बीमारी, एलर्जी या अन्य स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं।
