बिगड़ती लाइफस्टाइल, कम शारीरिक गतिविधि और असंतुलित खानपान के कारण कब्ज की समस्या आम हो सकती है। कभी-कभार होने वाला कब्ज आमतौर पर चिंता का विषय नहीं होता, लेकिन अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे या बार-बार हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लंबे समय तक कब्ज रहने से बवासीर (पाइल्स), एनल फिशर और मल त्याग के दौरान दर्द या जोर लगाने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लगातार कब्ज के साथ पेट में दर्द, मल में खून या अचानक वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें सकते हैं। कब्ज का इलाज करना है तो डाइट से लेकर लाइफस्टाइल तक में सुधार करें। डाइट में पर्याप्त फाइबर, पानी और नियमित शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। कब्ज में गंभीर लक्षण दिखने पर आप तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। अगर आपको कब्ज हमेशा रहता है तो कुछ योगासन आपकी मदद कर सकते हैं। बॉडी एक्टिविटी कब्ज को दूर करने में बेहद असरदार साबित होती है।
आयुर्वेदिक एक्सपर्ट और योग गुरु बाबा रामदेव के मुताबिक कुछ योगासन पेट और पेल्विक एरिया की मांसपेशियों की हल्की सक्रियता बढ़ाने, शरीर को रिलैक्स करने और आंतों की सामान्य गति को सपोर्ट करने में मदद कर सकते हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि भी कब्ज से राहत पाने में उपयोगी मानी जाती है। योग गुरु बाबा रामदेव के अनुसार, कुछ खास योगासन पाचन तंत्र को सक्रिय कर पेट की मांसपेशियों को मजबूती देते हैं, जिससे मल त्याग की प्रक्रिया आसान हो जाती है। आइए जानते हैं कि कौन-कौन से योगासन कब्ज से राहत दिलाने में मददगार हैं और उन्हें करने का सही तरीका क्या है।
पवनमुक्तासन करें
पवनमुक्तासन में पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ते हुए पैरों को पेट की ओर लाया जाता है। दोनों हाथों से घुटनों को पकड़कर उन्हें शरीर की ओर खींचा जाता है। इस दौरान सांस लेते और छोड़ते हुए शरीर को रिलैक्स रखने की कोशिश की जाती है। यह आसन पेट और कमर के आसपास की मांसपेशियों में खिंचाव पैदा करता है। कब्ज की समस्या में इसे नियमित योग अभ्यास का हिस्सा बनाया जा सकता है। इस आसन को अपनी क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए और शरीर को जबरदस्ती नहीं खींचना चाहिए। अगर कमर में ज्यादा दर्द है, तो केवल पैरों को मोड़कर हल्का स्ट्रेच किया जा सकता है।
सेतु बंधासन करेगा मदद
सेतु बंधासन करने के लिए पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन पर रखें। इसके बाद सांस लेते हुए कूल्हों और कमर को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं। कुछ समय इसी स्थिति में रहने के बाद धीरे-धीरे वापस सामान्य स्थिति में आएं। इस आसन में पेट, कमर और कूल्हों की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ यह आसन कब्ज की समस्या में मददगार हो सकता है।
उत्तानपादासन
उत्तानपादासन में पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को सीधा रखा जाता है। इसके बाद पैरों को धीरे-धीरे ऊपर उठाकर कुछ समय तक इस स्थिति में रखने की कोशिश की जाती है और फिर धीरे-धीरे नीचे लाया जाता है। इस दौरान पेट की मांसपेशियों पर दबाव और सक्रियता महसूस होती है। शुरुआत में पैरों को उतना ही ऊपर उठाएं, जितना आसानी से किया जा सके।
नौकासन
नौकासन में शरीर को नाव के आकार की स्थिति में रखा जाता है। इसमें पीठ के बल लेटकर शरीर के ऊपरी हिस्से और पैरों को ऊपर उठाने की कोशिश की जाती है, जिससे शरीर का संतुलन कूल्हों के आसपास बनता है। यह पेट और कोर की मांसपेशियों को सक्रिय करने वाला अभ्यास है। इसे करते समय सांस को सहज रखें और अपनी क्षमता से अधिक देर तक स्थिति बनाए रखने की कोशिश न करें।
पादवृत्तासन
पादवृत्तासन में पीठ के बल लेटकर पैरों को ऊपर उठाया जाता है और पैरों से गोलाकार गति की जाती है। इसे धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से करना चाहिए। इससे पेट और पैरों की मांसपेशियों की सक्रियता बढ़ती है और शरीर को शारीरिक गतिविधि मिलती है। शुरुआत में कम चक्कर लगाएं और थकान या दर्द होने पर रुक जाएं।
योग करते समय किन बातों का ध्यान रखें?
योग अभ्यास हमेशा अपनी क्षमता के अनुसार करना चाहिए। दर्द होने पर शरीर को जबरदस्ती मोड़ने या खींचने से बचें। खासकर जिन लोगों को कमर दर्द, स्लिप डिस्क, हिप या रीढ़ से जुड़ी समस्या, हाल की सर्जरी या कोई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, उन्हें योग शुरू करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। कब्ज लंबे समय से बना हुआ हो, मल में खून आए, वजन तेजी से घटे, तेज पेट दर्द हो या मल त्याग की आदत में अचानक बदलाव आए, तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। योगासन कब्ज से राहत में सहायक हो सकते हैं, लेकिन इन्हें किसी बीमारी का इलाज न माना जाए। योगासन अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार और सही तकनीक से ही करें। कमर, रीढ़, हिप या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर योग शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य योग विशेषज्ञ की सलाह लें।
