डायबिटीज से पीड़ित लोगों में कब्ज एक आम समस्या है। इस परेशानी की वजह शरीर में पानी की कमी, असंतुलित खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी, कुछ दवाओं का सेवन या लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से नसों को होने वाला नुकसान हो सकता है। अक्सर लोग डायबिटीज में केवल मीठे खान-पान और इंसुलिन पर ही ध्यान देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपका पेट और पाचन तंत्र भी ब्लड शुगर लेवल को सीधे प्रभावित कर सकता है?

बेंगलुरु स्थित साइट केयर हॉस्पिटल के GI & HPB Surgery विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. आदित्य वी. निर्गुंडी के अनुसार कब्ज और ब्लड शुगर कंट्रोल के बीच संबंध जरूर है, लेकिन कब्ज को सीधे तौर पर ब्लड शुगर बढ़ाने का कारण नहीं माना जाता। डॉक्टरों और हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक लंबे समय तक रहने वाली कब्ज (Constipation) और पेट की खराबी शरीर में मेटाबॉलिज्म को सुस्त कर सकती है, जिससे शुगर स्पाइक का खतरा बढ़ जाता है। आमतौर पर कब्ज को केवल पाचन से जुड़ी समस्या माना जाता है, जबकि ब्लड शुगर कंट्रोल को पैंक्रियाज, इंसुलिन और डायबिटीज से जोड़कर देखा जाता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि कब्ज और ब्लड शुगर का क्या कनेक्शन है। क्या पेट की खराबी शुगर को ट्रिगर करती है।

कब्ज और हाई ब्लड शुगर के लिए जिम्मेदार कारक

  • कब्ज और हाई ब्लड शुगर दोनों ऐसी बीमारियां हैं जिनके लिए लगभग एक जैसे कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। डायबिटीज और कब्ज दोनों के लिए ही बॉडी की कम एक्टिविटी जिम्मेदार हो सकती है।
  • फाइबर का कम सेवन डायबिटीज और कब्ज दोनों का कारण है।
  • शरीर में पानी की कमी ना सिर्फ डिहाइड्रेशन बढ़ाती है बल्कि कब्ज भी करती है। पानी की कमी डायबिटीज का जोखिम बढ़ाती है।
  • मोटापा और मेटाबॉलिक गड़बड़ियां भी डायबिटीज और कब्ज के लिए जिम्मेदार हैं।
  • डॉ. नरगुंड बताते हैं कि कुछ वर्षों में हुई रिसर्च ये बात साबित करती हैं कि गट हेल्थ में होने वाले बदलाव मल त्याग की आदतों और ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म दोनों को प्रभावित कर सकते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों के बीच दो-तरफा संबंध हो सकता है।

गट हेल्थ कैसे करती है ब्लड शुगर को प्रभावित?

हमारा पाचन तंत्र केवल भोजन पचाने का काम नहीं करता, बल्कि यह मल त्याग और शरीर के मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आंतों में मौजूद गट माइक्रोबायोम भोजन में मौजूद फाइबर को शॉर्ट-चेन फैटी एसिड (SCFAs) में बदलते हैं। ये तत्व आंतों की गति को बेहतर बनाते हैं और सूजन को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। ये माइक्रोबायोम इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाने में सहायक होते हैं। डॉ. नरगुंड बताते हैं कि भोजन के दौरान बनने वाले GLP-1 जैसे गट हार्मोन भी ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के साथ-साथ पेट खाली होने की गति और आंतों की गतिविधियों को प्रभावित करते हैं। अगर गट माइक्रोबायोम असंतुलित हो जाए या भोजन में फाइबर की मात्रा कम हो, तो व्यक्ति को कब्ज की समस्या के साथ-साथ ब्लड शुगर कंट्रोल में भी दिक्कत हो सकती है।

गट हेल्थ में कैसे करें सुधार

कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि डाइट में अगर फाइबर से भरपूर फल और सब्जियों का सेवन किया जाए, बॉडी को एक्टिव रखने के लिए नियमित एक्सरसाइज,वॉक और योग किया जाए तो आसानी से कब्ज का इलाज किया जा सकता है और गट हेल्थ में सुधार किया जा सकता है। भरपूर पानी का सेवन और प्लांट बेस्ट फूड का सेवन कब्ज से राहत दिलाने के साथ-साथ ब्लड शुगर कंट्रोल में भी मदद करता है।

डायबिटीज और प्रीडायबिटीज में कब्ज से कैसे बचें?

डायबिटीज या प्री डायबिटीज से पीड़ित लोगों में कब्ज से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि वो ब्लड शुगर को कंट्रोल रखें। रोज पर्याप्त मात्रा में फाइबर युक्त भोजन करें। दिनभर पर्याप्त पानी पिएं। नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियां और व्यायाम करें। अगर कब्ज लंबे समय तक बनी रहे या बार-बार हो, तो डॉक्टर से सलाह लें। इन आदतों को अपनाने से न केवल कब्ज की समस्या कम हो सकती है, बल्कि ब्लड शुगर कंट्रोल और संपूर्ण मेटाबॉलिक हेल्थ में भी सुधार हो सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी विशेषज्ञों की राय और उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित है। इसे चिकित्सीय सलाह का विकल्प न मानें। यदि आपको लगातार कब्ज, ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव या डायबिटीज से जुड़ी कोई समस्या है, तो सही जांच और उपचार के लिए अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।