दांतों को साफ-चमकदार बनाए रखने के लिए हम रोज ब्रश करते है, मुंह को फ्रेश रखने के लिए माउथ वॉश का भी इस्तेमाल करते हैं, तो भी आए दिन दांत में ठंडा-गरम कुछ भी खाओ लगने लगता है। कभी मसूड़ों से खून आता है तो कभी दाढ़ दर्द करने जैसी समस्याएं होने लगती है। ओरल हेल्थ का ध्यान रखने के बाद भी मुंह की सेहत दुरुस्त नहीं रहती, इसकी  वजह आपकी सफाई करने का गलत तरीका है। आप जानते हैं कि जाने-अनजाने में की गई कुछ छोटी गलतियां आपकी ओरल हेल्थ को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। डेंटिस के मुताबिक ब्रशिंग से जुड़ी कुछ गलतियां दांतों की सुरक्षा परत यानी इनेमल (Enamel) को घिस देती हैं और मसूड़ों में सूजन या खून आने की समस्या पैदा कर सकती हैं।

अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित डेंटिस्ट और ओरल हेल्थ एजुकेटर Mark Burhenne के मुताबिक लोग अक्सर ब्रश करते समय ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो धीरे-धीरे दांतों की ऊपरी परत (Enamel), मसूड़ों और पूरे मुंह की सेहत को प्रभावित कर सकती हैं। डॉ. मार्क बर्हेने की बात को जब हमने Krown Hub Dental Clinic में प्रोस्थो डेंटिस्ट नियाति अरोड़ा से डिस्कस किया तो उन्होंने मार्क की बात से सहमति जताते हुए बताया सही ब्रशिंग तकनीक अपनाने के साथ-साथ फ्लॉसिंग और नियमित डेंटल चेकअप भी ओरल हेल्थ के लिए बेहद जरूरी हैं। सुबह उठते ही और रात में सोने से पहले दांत साफ करना अच्छी आदत मानी जाती है, लेकिन अगर ब्रश करने का तरीका सही न हो, तो यही आदत दांतों और मसूड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि हम दांतों की सफाई करते समय कौन -कौन सी गलतियां करते हैं और उनमें सुधार कैसे करें।

दांतों को जोर-जोर से आगे-पीछे रगड़कर ब्रश करना

कई लोग दांत साफ करने के लिए ब्रश को तेजी से आगे-पीछे रगड़ते हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक यह तरीका दांतों की एनामेल को घिस सकता है और मसूड़ों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसकी जगह ब्रश को हल्के हाथों से गोलाकार (Circular Motion) में चलाना बेहतर माना जाता है। अगर आप इलेक्ट्रिक टूथब्रश का इस्तेमाल करते हैं, तो उसे दांतों पर हल्के से रखें और मशीन को अपना काम करने दें।

ब्रश करने के तुरंत बाद कुल्ला कर लेना

ब्रश करने के तुरंत बाद पानी से कुल्ला करने की आदत भी सही नहीं मानी जाती। ऐसा करने से टूथपेस्ट में मौजूद फ्लोराइड या अन्य सक्रिय तत्व दांतों पर पर्याप्त समय तक नहीं रह पाते। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ब्रश करने के बाद अतिरिक्त टूथपेस्ट को थूक दें और तुरंत कुल्ला करने से बचें।

सख्त ब्रिसल वाला टूथब्रश इस्तेमाल करना

अक्सर लोग दांतों को साफ करने के लिए हार्ड ब्रश का इस्तेमाल करते है जो दांतों के लिए गलत है। Medium या हार्ड ब्रिसल वाले ब्रश का लगातार इस्तेमाल मसूड़ों में कटाव (Gum Recession) और दांतों की संवेदनशीलता (Sensitivity) बढ़ा सकता है। इसलिए हमेशा सॉफ्ट या अल्ट्रा-सॉफ्ट ब्रिसल वाला टूथब्रश चुनें।

लंबे समय तक एक ही टूथब्रश का इस्तेमाल करना

कई लोग महीनों तक एक ही टूथब्रश इस्तेमाल करते रहते हैं। इससे ब्रश के रेशे घिस जाते हैं और सफाई प्रभावी ढंग से नहीं हो पाती। विशेषज्ञ हर तीन महीने में या ब्रिसल खराब होने पर टूथब्रश बदलने की सलाह देते हैं।

सिर्फ ब्रश करना ही काफी नहीं

डॉ. नियति अरोड़ा के मुताबिक, केवल ब्रश करने से दांतों की सभी सतहों की सफाई नहीं हो पाती। दांतों के बीच फंसे भोजन और बैक्टीरिया को हटाने के लिए फ्लॉसिंग, इंटरडेंटल ब्रश और समय-समय पर डेंटल स्केलिंग भी जरूरी है। इससे कैविटी और मसूड़ों की बीमारियों का खतरा कम होता है।

मुंह की सेहत कैसे ओवरऑल हेल्थ से जुड़ी है?

एक्सपर्ट के मुताबिक खराब ओरल हेल्थ केवल दांतों तक सीमित नहीं रहती। लंबे समय तक मसूड़ों की बीमारी रहने पर बैक्टीरिया रक्त प्रवाह में पहुंच सकते हैं, जिससे हृदय रोग, स्ट्रोक और दूसरी हेल्थ प्रॉब्लम का जोखिम बढ़ सकता है। कई रिसर्च में खराब ओरल हेल्थ और अल्जाइमर जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के बीच संबंध पाया गया है। इसलिए दांतों और मसूड़ों की नियमित देखभाल पूरे शरीर की सेहत के लिए भी जरूरी मानी जाती है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जागरूकता और जानकारी के लिए है। लेख में दिए गए सुझावों को किसी योग्य डेंटिस्ट या चिकित्सा विशेषज्ञ की व्यक्तिगत सलाह का विकल्प न माना जाए। दांतों या मसूड़ों में किसी भी प्रकार की तकलीफ होने पर डॉक्टर से संपर्क अवश्य करें।