दिल से जुड़ी बीमारियों के मामले दिन-ब-दिन तेजी से बढ़ रहे हैं। कम उम्र में ही लोग हार्ट अटैक, स्ट्रोक और दिल के रोगों का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में दिल को स्वस्थ बनाए रखने के लिए हेल्दी डाइट का सेवन बेहद जरूरी हो जाता है। दिल की सेहत के लिए जिस पोषक तत्व को सबसे अहम माना जाता है, वह है ओमेगा-3 फैटी एसिड। यह फैटी एसिड हार्ट हेल्थ के लिए अहम भूमिका निभाता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर फूड्स की बात करें तो मछली इसका बेहतरीन स्रोत है। मछली में भी कुछ ऐसी किस्म हैं जिनमें ओमेगा-3 बहुत ज्यादा पाया जाता है।
न्यूट्रिशन, मोटापा, मेटाबॉलिज्म और डाइजेस्टिव हेल्थ के विशेषज्ञ और रजिस्टर्ड डाइटिशियन जोनाथन पर्टेल ने बताया ओमेगा-3 के लिए सैल्मन और कॉड फिश का सेवन बेहद उपयोगी है। दोनों ही पोषण से भरपूर हैं और रेड या प्रोसेस्ड मीट के हेल्दी विकल्प माने जाते हैं। अब सवाल ये उठता है दोनों में से सबसे ज्यादा ओमेगा-3 किस मछली में पाया जाता है, डायटीशियन से समझते हैं पोषण मूल्य के हिसाब से कौन सी मछली है ज्यादा बेहतर।
सैल्मन मछली
सैल्मन एक ऑयली फिश है, जिसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड की मात्रा काफी ज्यादा होती है। दोनों मछली में किसमें ज्यादा है ओमेगा-3 और पोषक तत्व हैं टेबल से जानिए।
| पोषक तत्व | कॉड (3 औंस) | सैल्मन (3 औंस) |
| कैलोरी | 89 | 155 |
| प्रोटीन | 19.4 ग्राम | 21.6 ग्राम |
| कुल फैट | 0.73 ग्राम | 6.91 ग्राम |
| संतृप्त वसा | 0.143 ग्राम | 1.07 ग्राम |
| मोनोअनसैचुरेटेड फैट | 0.105 ग्राम | 2.3 ग्राम |
| पॉलीअनसैचुरेटेड फैट | 0.248 ग्राम | 2.77 ग्राम |
| कोलेस्ट्रॉल | 46.8 मि.ग्रा | 60.4 मि.ग्रा |
| कैल्शियम | 11.9 मि.ग्रा | 12.8 मि.ग्रा |
| आयरन | 0.416 मि.ग्रा | 0.875 मि.ग्रा |
| मैग्नीशियम | 35.7 मि.ग्रा | 31.4 मि.ग्रा |
| फॉस्फोरस | 117 मि.ग्रा | 218 मि.ग्रा |
| पोटैशियम | 207 मि.ग्रा | 534 मि.ग्रा |
| सोडियम | 66.3 मि.ग्रा | 47.6 मि.ग्रा |
| जिंक | 0.493 मि.ग्रा | 0.697 मि.ग्रा |
| सेलेनियम | 32 माइक्रोग्राम | 39.8 माइक्रोग्राम |
| विटामिन B12 | 0.892 माइक्रोग्राम | 2.59 माइक्रोग्राम |
ओमेगा-3 में कौन सी मछली है ज्यादा बेहतर?
ओमेगा-3 फैटी एसिड के मामले में सैल्मन साफ तौर पर आगे है। सैल्मन में ओमेगा-3 की मात्रा कॉड की तुलना में कई गुना ज्यादा होती है।
ओमेगा-3 के फायदे
ओमेगा-3 फैटी एसिड शरीर के लिए बेहद जरूरी होता है क्योंकि ये दिल और ब्लड वेसल्स को हेल्दी रखता है। ट्राइग्लिसराइड्स कम करने में ये फैटी एसिड मदद करता है। ओमेगा-3 का सेवन करने से गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है और बीपी नॉर्मल रहता है। ये फैटी एसिड खून के थक्के बनने का जोखिम कम करता हैं, हार्ट अटैक और अनियमित धड़कन (Arrhythmia) का खतरा घटाता हैं। इसे खाने से शरीर में सूजन कंट्रोल रहती है। इसके अलावा, DHA दिमाग, आंखों और शिशुओं के विकास के लिए भी बेहद जरूरी है।
कॉड और सैल्मन के अन्य फायदे
- दोनों मछलियां बॉडी के लिए जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं। दोनों में मौजूद पोषक तत्वों की बात करें तो इसमें
- हाई क्वालिटी प्रोटीन
- आयोडीन
- सेलेनियम
- आयरन
- विटामिन D और B12 मौजूद होता है।
जहां कॉड फिश कम फैट होने की वजह से वजन कंट्रोल करने वालों के लिए बेस्ट है वहीं सैल्मन हार्ट हेल्थ के लिए ज्यादा फायदेमंद मानी जाती है। सैल्मन में विटामिन D भी भरपूर होता है, इस मछली की हड्डियां भी कैल्शियम का अच्छा स्रोत हैं। कॉड फिश में हाई क्वालिटी प्रोटीन होता है। हल्की और आसानी से पचने वाली ये मछली रेड या प्रोसेस्ड मीट का हेल्दी विकल्प मानी जाती है।
मछली खाने का सही तरीका
- हफ्ते में कम से कम 2 बार मछली खाएं। एक बार ऑयली फिश जैसे सैल्मन का जरूर सेवन करें।
- रोजाना 450–500 mg ओमेगा-3 लेने की कोशिश करें।
- मछली को बेक, ग्रिल या सॉटे करके खाएं।
- मक्खन या ज्यादा तेल का सेवन करने से बचें।
- लो-सोडियम विकल्प चुनें
किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?
ऑयली फिश में कुछ प्रदूषक (pollutants) भी हो सकते हैं। गर्भवती महिलाएं, प्रेग्नेंसी प्लान कर रही महिलाएं, स्तनपान कराने वाली महिलाएं मछली का सेवन करने से परहेज करें।
निष्कर्ष
अगर आपका फोकस खासतौर पर दिल की सेहत और ओमेगा-3 पर है, तो सैल्मन बेहतर विकल्प है। वहीं अगर आप कम फैट और कम कैलोरी वाली डाइट चाहते हैं, तो कॉड भी एक अच्छा विकल्प है।
डिस्क्लेमर:
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं है। अपनी डाइट या स्वास्थ्य से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले डॉक्टर या योग्य न्यूट्रिशनिस्ट से परामर्श जरूर लें।
