कोलेस्ट्रॉल एक मोम जैसा (waxy) पदार्थ है जो शरीर में मुख्य रूप से लिवर द्वारा बनाया जाता है और खून में पाया जाता है। यह शरीर के लिए जरूरी भी है, क्योंकि इससे नई कोशिकाओं का निर्माण होता है और हार्मोन बनाने में मदद मिलती है। लेकिन जब कोलेस्ट्रॉल का स्तर जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है, तो ये सेहत के लिए खतरा बन सकता है। बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल खून की नसों में जमने लगता है, जिससे ब्लॉकेज हो सकता है और Heart Disease, हार्ट अटैक और Peripheral Artery Disease का खतरा बढ़ जाता है।

भारतीय योग गुरु, लेखक, शोधकर्ता और टीवी पर्सनालिटी डॉक्टर हंसा योगेंद्र (Hansa Yogendra) के मुताबिक कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के लिए सही खानपान और लाइफस्टाइल बेहद जरूरी है। इसके साथ ही अगर कुछ योग का सहारा लिया जाए तो आसानी से कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल किया जा सकता है। Indian Journal of Physiology and Pharmacology में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, 8-12 सप्ताह तक नियमित योग करने वाले व्यक्तियों में LDL कोलेस्ट्रॉल और Triglycerides के स्तर में 15-20% तक की कमी देखी गई। योग के दौरान होने वाले खिंचाव और संकुचन से लिपोप्रोटीन लाइपेज एंजाइम सक्रिय होता है, जो खून में मौजूद फैट को तोड़ने में मदद करता है। वहीं ये HDL कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मददगार होता है। आइए जानते हैं कि कोलेस्ट्ऱॉल कंट्रोल करने के लिए कौन-कौन से योग करना असरदार साबित होता है।

कोलेस्ट्रॉल के प्रकार और कारण

कोलेस्ट्रॉल दो तरह का होता है एक गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) जो शरीर के लिए फायदेमंद होता है और खराब कोलेस्ट्रॉल को हटाने में मदद करता है। जबकि बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) नसों में जमकर ब्लॉकेज का कारण बनता है। अब सवाल ये उठता है कि खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का कारण क्या है? ज्यादा तला-भुना और फैटी फूड, शारीरिक गतिविधि की कमी, बढ़ता वजन और आनुवांशिक कारणों की वजह से कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है।

सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) करें

सूर्य नमस्कार एक संपूर्ण योग क्रम है, जिसमें 12 अलग-अलग आसनों का संयोजन होता है। यह न केवल शरीर को लचीला बनाता है, बल्कि मेटाबॉलिज्म को भी बेहतर करता है। रोजाना सूर्य नमस्कार करने से ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है और शरीर में जमा अतिरिक्त फैट कम होने में मदद मिलती है, जो कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने में सहायक होता है। यह दिल, फेफड़ों और मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। साथ ही ये मानसिक तनाव को कम करता है और शरीर को ऊर्जा से भर देता है, जिससे ओवरऑल हेल्थ बेहतर होती है।

हस्तपादांगुष्ठासन (Hasta Padangusthasana) करें

हस्तपादांगुष्ठासन एक ऐसा योगासन है जिसमें शरीर का संतुलन और लचीलापन दोनों बेहतर होते हैं। इस आसन में खड़े होकर एक पैर को ऊपर उठाकर हाथ से पकड़ने की कोशिश की जाती है। यह पेट, जांघों और पैरों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और पाचन तंत्र को सक्रिय करता है। नियमित अभ्यास से शरीर में फैट कम होता है, जिससे कोलेस्ट्रॉल लेवल को संतुलित रखने में मदद मिलती है। यह आसन शरीर की स्थिरता बढ़ाता है और मानसिक एकाग्रता को भी मजबूत करता है, जिससे शरीर और मन दोनों को फायदा मिलता है।

अर्धमत्स्येन्द्रासन (Ardha Matsyendrasana)

अर्धमत्स्येन्द्रासन एक बैठकर किया जाने वाला ट्विस्टिंग योगासन है, जो रीढ़ की हड्डी को लचीला और मजबूत बनाता है। इस आसन से पेट के अंगों पर दबाव पड़ता है, जिससे लिवर और पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करते हैं। यह शरीर से टॉक्सिन्स निकालने में मदद करता है और मेटाबॉलिज्म को तेज करता है। नियमित अभ्यास से ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है और शरीर में जमा अतिरिक्त फैट कम होता है, जिससे कोलेस्ट्रॉल लेवल नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। यह आसन तनाव कम करने और शरीर को रिलैक्स रखने में भी प्रभावी है।

डिस्क्लेमर:

यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। योग के अभ्यास से कोलेस्ट्रॉल प्रबंधन में मदद मिल सकती है, लेकिन यह डॉक्टरी इलाज या दवाओं का विकल्प नहीं है। यदि आपको हृदय रोग, उच्च रक्तचाप या कोई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, तो कोई भी नया योग अभ्यास शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर और प्रमाणित योग प्रशिक्षक से सलाह जरूर लें।