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सही समय पर इलाज से कैंसर को हरा पाए युवराज सिंह, जानें क्या है कैंसर पहचानने और उसे रोकने का तरीका

कैंसर आज के दौर की ऐसी जटिल समस्या है जिसके मरीजों की संख्या तो दिनोदिन बढ़ रही है लेकिन उसके गंभीर स्थिति में इलाज का कोई फॉर्मूला नहीं मिल रहा।

प्रतीकात्मक चित्र

भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह का आज जन्मदिन है। युवराज भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। साल 2003, 2007 और 2011 के क्रिकेट विश्व कप टूर्नामेंट में उनके बेहतर प्रदर्शन की बदौलत भारत ने विश्व क्रिकेट में नए-नए मुकाम हासिल किए थे। 2011 के विश्व कप मैचों के दौरान युवराज मीडियास्टिनल सेमिनोमा डिसीज के शिकार हो गए थे। मीडियास्टिनल सेमिनोमा एक तरह का कैंसर है जो सामान्यतः पुरुषों के जननांगो में होता है। युवराज के मामले में यह उनके दिल से बाएं फेफड़े के बीच के हिस्से में था। युवराज ने कीमोथेरेपी के जरिए इस घातक बीमारी पर जीत हासिल कर ली। कैंसर आज के दौर की ऐसी जटिल समस्या है जिसके मरीजों की संख्या तो दिनोदिन बढ़ रही है लेकिन उसके गंभीर स्थिति में इलाज का कोई फॉर्मूला नहीं मिल रहा।

युवराज सिंह कैंसर के खतरे वाले निशान तक नहीं पहुंचे थे लेकिन दुनिया भर में ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें कैंसर के शुरुआती लक्षणों का पता ही नहीं चलता और जब उन्हें पता चलता है तब स्थिति अनियंत्रित रूप से गंभीर हो चुकी होती है। कैंसर का इलाज भी काफी महंगा होता है। ऐसे में अगर आप इसके शुरुआती लक्षणों के बारे में जान रहे हों तो समय रहते इससे बचाव कर सकते हैं।

कैंसर के शुरुआती लक्षणः शुरुआती दौर में कैंसर जो लक्षण प्रकट करता है उनमें सबसे प्रमुख है पेशाब और शौच के दौरान खून का आना। शरीर में खून की कमी हो जाने की वजह से एनीमिया की भी समस्या सामने आती है जिसकी वजह से थकान, कमजोरी, तेज बुखार आना और बुखार ठीक न होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इसके अलावा खांसी के दौरान खून भी आ सकता है। लंबे समय तक कफ और फिर कफ के साथ म्यूकस का आना भी कैंसर का ही लक्षण है। अगर आपको कुछ भी निगल पाने में दिक्कत हो रही है या फिर गले में किसी तरह का गांठ है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। यह कैंसर हो सकता है। शरीर के किसी भी भाग में गांठ होना कैंसर का संकेत हो सकता है। ऐसे में अगर आप तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें तो कैंसर को घातक बनने से रोका जा सकता है।

इसलिए होता है कैंसर – आयुर्वेद के आचार्य बालकृष्ण बताते कैंसर की वजह हमारी अनियमित दिनचर्या, कलर्ड फूड्स का सेवन और फसलों में कीटनाशकों का धड़ल्ले से उपयोग है। उनके मुताबिक तंबाकू के सेवन के अलावा फ्रीज में रखे गए बासी खाने को बार बार गरम कर खाने की वजह से भी कैंसर होता है। कैंसर के रोगियों के लिए बालकृष्ण गिलोय और व्हीट ग्रास जूस का सेवन करने की सलाह देते हैं। गेहूं को अंकुरित कर उसके घास को गिलोय की जड़ के साथ पीसकर जूस बना लें और इसका सेवन करें। यह कैंसर को ड़ से खत्म करने में बेहद प्रभावशाली औषधि है।


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