डायबिटीज में ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने के लिए दवाओं के साथ बैलेंस डाइट,रेगुलर बॉडी एक्टिविटी और तनाव को कंट्रोल करना बेहद जरूरी है। बॉडी को एक्टिव रखने के लिए रोजाना वॉक, एक्सरसाइज और प्राणायाम बेहद असरदार साबित होता हैं। रेगुलर बॉडी की एक्टिविटी ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल करने में मददगार साबित होती है। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट और योग गुरु बाबा रामदेव ने एक वीडियो में बताया कि बॉडी को हेल्दी रखने के लिए रोजाना 5 प्राणायाम करना बहुत जरूरी है।
रोजाना प्राणायाम करने से इम्यूनिटी स्ट्रांग होती है और बिना दवा के बॉडी हेल्दी रह सकती है। डायबिटीज मरीज अगर रोजाना अनुलोम-विलोम और मंडूकासन समेत 5 योगासन करें तो आसानी से अपनी ब्लड शुगर को नार्मल रख सकते हैं। रोजाना नियमित रूप से योग करने पर तनाव कम होता है और बॉडी एक्टिव रहती है। आइए योग गुरु से जानते हैं कि डायबिटीज मरीज ब्लड शुगर नॉर्मल करने के लिए कौन कौन से योगासन कर सकते हैं।
शशांकासन (Shashankasana) कीजिए
डायबिटीज मरीज ब्लड शुगर के स्तर को नॉर्मल करने के लिए रोजाना शशांकासन कीजिए। शशांकासन के दौरान धीमी और नियंत्रित सांस लेने से शरीर रिलैक्स महसूस करता है और तनाव कंट्रोल रहता है। बाबा रामदेव ने बताया नियमित योगाभ्यास बॉडी को एक्टिव रखने में मदद करता है और इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर बनाता है जिससे शुगर कंट्रोल करना आसान होता है। ये योगाभ्यास मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है और वेट लॉस करने में मदद करता है। इसे करने के दौरान पेट के अंगों पर दबाव पड़ता है जो पैंक्रियास को एक्टिव करके इंसुलिन का उत्पादन बढ़ाता है।
योगमुद्रासन (Yoga Mudrasana) रोज़ करें
योगमुद्रासन करने से डायबिटीज मरीजों को काफी राहत मिलती है। इसे करने के दौरान शरीर आगे की ओर झुकता है, जिससे पेट और कमर के आसपास हल्का दबाव बनता है। ये योग पाचन तंत्र और पेट के अंगों के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है। बाबा रामदेव ने बताया धीमी और नियंत्रित सांसों के साथ इसका अभ्यास तनाव और मानसिक बेचैनी कम करने में मदद करता है। तनाव कम होने से ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद मिलती है। नियमित योगाभ्यास बॉडी की एक्टिविटी बढ़ाने के लिए मददगार है। ये इंसुलिन की संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए उपयोगी है।
वक्रासन
वक्रासन एक सरल और बैठकर किया जाने वाला आसन है, जिसमें रीढ़ और धड़ को एक दिशा में मोड़ा जाता है। यह शरीर के कोर और रीढ़ के आसपास की मांसपेशियों को सक्रिय करने में मदद करता है। योगाभ्यास के दौरान सांस पर ध्यान केंद्रित करने से तनाव कम करने में भी मदद मिल सकती है। तनाव और शारीरिक निष्क्रियता ब्लड शुगर मैनेजमेंट को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए नियमित योग को हेल्दी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाया जा सकता है। वक्रासन करने से पैंक्रियाज सीधे उत्तेजित होकर ज्यादा इंसुलिन बनाता है। ऐसा करने से शरीर में इंसुलिन की संवेदनशीलता बढ़ जाती है।
मंडूकासन
मंडूकासन यानी Frog Pose में शरीर को आगे की ओर झुकाया जाता है, जिससे पेट के हिस्से पर हल्का दबाव पड़ता है। योग परंपरा में इसे पाचन और पेट से जुड़े अंगों के लिए उपयोगी माना जाता है। नियमित योगाभ्यास शरीर को सक्रिय रखने और तनाव कम करने में मदद कर सकता है, जिसका ब्लड शुगर मैनेजमेंट पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। मंडूकासन पैंक्रियाज को सक्रिय करके इंसुलिन का उत्पादन बढ़ाता है और ब्लड शुगर को नॉर्मल करने में मदद करता है। इसे डायबिटीज मैनेजमेंट के लिए एक सहायक गतिविधि के रूप में किया जा सकता है।
भुजंगासन
भुजंगासन में पेट के बल लेटकर शरीर के ऊपरी हिस्से को ऊपर उठाया जाता है। यह मुख्य रूप से पीठ, कंधों और पेट के आसपास की मांसपेशियों को सक्रिय करता है। योग के नियमित अभ्यास से शरीर की शारीरिक सक्रियता बढ़ सकती है और तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। तनाव कम होना ब्लड शुगर मैनेजमेंट के लिए उपयोगी हो सकता है। भुजंगासन को डायबिटीज के लिए सहायक योगाभ्यास के तौर पर किया जा सकता है।
गोमुखासन (Gomukhasana)
गोमुखासन में शरीर की कई मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि मांसपेशियों द्वारा ग्लूकोज के इस्तेमाल को बढ़ा सकती है और इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर कर सकती है। योग के दौरान धीमी और नियंत्रित सांस लेने से तनाव और मानसिक बेचैनी कम करने में मदद मिल सकती है। तनाव कम रखना डायबिटीज मैनेजमेंट के लिए जरूरी है। यह योगासन कंधों, बाजुओं, कूल्हों और पैरों के आसपास की मांसपेशियों को सक्रिय करता है और शरीर के लचीलेपन को बेहतर करने में मदद कर सकता है। नियमित योग, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि और संतुलित खान-पान मिलकर वजन कंट्रोल करते है और मेटाबॉलिक हेल्थ को बेहतर बनाते हैं।
डिस्क्लेमर:डायबिटीज में योग को दवा, संतुलित डाइट और डॉक्टर की सलाह के साथ सहायक गतिविधि के रूप में अपनाना चाहिए। अगर आप इंसुलिन या ब्लड शुगर कम करने वाली दवाएं लेते हैं, तो व्यायाम या योग की दिनचर्या में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
