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क्या प्रेगनेंसी में बार-बार अल्ट्रासाउंड से बच्चे को नुकसान पहुंच सकता है? जानिये Pregnancy में क्यों और कितनी बार सोनोग्राफी जरूरी है

Does frequent Ultrasound or Sonography Harm the Baby: प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड बहुत जरूरी है। डॉक्टरों के मुताबिक यह पूरी तरह सुरक्षित है।

क्या प्रेगनेंसी में बार-बार अल्ट्रासाउंड से बच्चे को नुकसान पहुंच सकता है? जानिये Pregnancy में क्यों और कितनी बार सोनोग्राफी जरूरी है
Ultrasound or Sonography Test in Pregnancy: डॉक्टरों के मुताबिक प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड पूरी तरह सेफ है. (Photo Source-Freepik)

प्रेगनेंसी (Pregnancy) के दौरान अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) या सोनोग्राफी (Sonography) को लेकर तमाम तरह के सवाल किये जाते हैं। सबसे कॉमन सवाल है कि क्या प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड की वजह से बच्चे को कोई नुकसान पहुंच सकता है? अल्ट्रासाउंड क्यों किया जाता है और कितनी बार किया जाता है? आइये समझते हैं।

प्रेगनेंसी में क्यों किया जाता है अल्ट्रासाउंड या सोनोग्राफी? (Why Ultrasound is Done During Pregnancy)

गर्भावस्था के दौरान बच्चे की ओवरऑल डेवलपमेंट का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड या सोनोग्राफी की (Ultrasound or Sonography) जाती है। चर्चित टेस्ट ट्यूब बेबी कंसल्टेंट डॉ. सुप्रिया पुराणिक अपने एक वीडियो में कहती हैं कि प्रेगनेंसी में सोनोग्राफी बहुत जरूरी है। इससे बेबी की उम्र, उसकी डेवलपमेंट, उसकी हेल्थ का तो पता चलता ही है। इसके अलावा कई ऐसी चीजों का पता चलता है, जो प्रेगनेंसी (Pregnancy) के दौरान जानना बहुत जरूरी है।

प्रेगनेंसी में कितनी बार किया जाता है अल्ट्रासाउंड? (How Many Times Ultrasound is Done During Pregnancy)

प्रेगनेंसी (Pregnancy Ultrasound) के दौरान सामान्यत: 4-5 बार अल्ट्रासाउंड या सोनोग्राफी की जाती है। डॉ. सुप्रिया पुराणिक कहती है कि कई प्रेगनेंसी में 4 से 5 सोनोग्राफी (Sonography) में लगभग सभी चीजों का पता लग जाता है, लेकिन कई बार हाई रिस्क वाली प्रेगनेंसी (High Risk Pregnancy) में इससे ज्यादा बार भी सोनोग्राफी की जरूरत पड़ सकती है।

क्या प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड या सोनोग्राफी से बच्चे को नुकसान पहुंच सकता है? (Do Ultrasounds Affect Babies?)

मिरेकल हेल्थकेयर की सीनियर कंसल्टेंट और मेडिकल डायरेक्टर डॉ. रमिता शाह (Dr Ramita Shah) अपने वीडियो में बताती हैं कि अक्सर हमसे पूछा जाता है कि क्या अल्ट्रासाउंड से बच्चे को नुकसान पहुंच सकता है? इसका सीधा सा जवाब है ना। अल्ट्रासाउंड या सोनोग्राफी पूरी तरह सुरक्षित है और पिछले 40 सालों से ज्यादा सालों से होता आया है। डॉ. सुप्रिया पुराणिक भी इस बात से इत्तेफाक रखती हैं और कहती हैं कि सोनोग्राफी बेसिकली ध्वनि की तरंगे होती हैं। इससे बच्चे को बिल्कुल भी किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचता है। यह पूरी तरह सेफ है।

कितनी तरह की सोनोग्राफी या अल्ट्रासाउंड होता है? (Types Of Ultrasound for Pregnant Women)

सोनोग्राफी (Sonography) दो तरीके से की जाती है तो एक तो पेट के जरिये और दूसरा वजाइना या प्राइवेट पार्ट के जरिए। पेट के जरिये होने वाले अल्ट्रासाउंड को एब्डॉमिनल स्कैन (Abdominal Scan) और प्राइवेट पार्ट के जरिये होने वाले अल्ट्रासाउंड को ट्रांसवजाइनल अल्ट्रासाउंड (Transvaginal Scan) कहते हैं। डॉ. पुराणिक कहती है कि एब्डॉमिनल स्कैन (Abdominal Sonography) के लिए ब्लैडर का पूरी तरह भरा होना जरूरी है। अगर ब्लैडर या मूत्राशय पूरी तरह भरा हुआ रहता है तो बच्चे की प्रॉपर स्कैनिंग हो जाती है और पूरा आईडिया लग जाता है।

इसी तरह प्राइवेट पार्ट के जरिए जो सोनोग्राफी की जाती है वो ज्यादातर प्रेगनेंसी की शुरुआत (Early Stage) में होती है। कई बार एब्डॉमिनल स्कैन (Abdominal Ultrasound) से कई चीजें पता नहीं लग पाती हैं, इसलिए इसका सहारा लेना पड़ता है।

प्रेगनेंसी में सोनोग्राफी या अल्ट्रासाउंड से क्या-क्या पता लगता है? (Why is Ultrasound Done in Pregnancy)

1. प्रेगनेंसी के दौरान पहला अल्ट्रासाउंड या सोनोग्राफी 6 से 8 सप्ताह में के अंदर कराया जाता है। इसे डेटिंग स्कैन (Dating Scan) भी कहते हैं। इससे यह पता लगाते हैं कि कितने दिन की प्रेगनेंसी (Pregnancy) है, बच्चे की धड़कन शुरू हुई है या नहीं और कहीं ब्लीडिंग तो नहीं हुई है। कई केस में बेबी यूट्रस के अंदर नहीं रहता है, बल्कि गर्भ नलिका में फंसा रहता है। इसको एक्टॉपिक प्रेगनेंसी (Ectopic Pregnancy) भी कहते हैं। कई बार यह जानलेवा हो जाता है।

2. दूसरा अल्ट्रासाउंड प्रेगनेंसी के 3 महीने पूरा होने या 11 से 13 सप्ताह के बाद भीतर कराया जाता है। इससे बेबी स्पाइनल कॉर्ड और नाक का विकास देखा जाता है। डॉ. पुराणिक कहती हैं कि इस स्कैन में बेबी के गर्दन के नजदीक एक फोल्ड रहता है, जिसे नकल ओल्ड कहते हैं, उसको मेजर किया जाता है।

अगर नकल फोल्ड 2 एमएम से ज्यादा हो तो बेबी में डाउन सिंड्रोम का खतरा रहता है। मानसिक समस्याएं हो सकती हैं, इसीलिए यह स्कैन बहुत महत्वपूर्ण है। अगर यह सब पैरामीटर ठीक नहीं होते हैं तो आपका डॉक्टर आपको डबल मार्कर और एनटी स्कैन टेस्ट (लेवल वन स्कैन) कराने को कह सकता है, ताकि यह पताया लगाया जा सके कि आपकी हाई रिस्क प्रेगनेंसी है या लो रिस्क।

3. तीसरे अल्ट्रासाउंड को लेवल 2 अल्ट्रासाउंड भी कहते हैं। जो 19-20 सप्ताह के दौरान कराया जाता है। इस समय तक बेबी के लगभग सभी अंग बन चुके होते हैं और उसका पता लगाया जाता है। डॉक्टर देखते हैं कि कहीं किसी अंग में कोई दिक्कत तो नहीं है।

4. प्रेगनेंसी (Pregnancy) में चौथा अल्ट्रासाउंड या सोनोग्राफी 28वें सप्ताह में किया जाता है। इसे ग्रोथ स्कैन भी कहते हैं। इससे देखते हैं कि बेबी की ग्रोथ ठीक है या नहीं। बेबी के चारों तरफ फ्लूइड की क्या स्थिति है। साथ ही प्लासेंट की क्या पोजिशन है, यह भी देखा जाता है।

5. इसी तरह आखिरी अल्ट्रासाउंड नौवें महीने (3rd Trimester of Pregnancy) या 32 से 34वें सप्ताह में कराया जाता है। जिसे डॉपलर स्कैन (Doppler Scan) भी कहते हैं। यह बहुत स्पेशलाइज स्कैन है, इससे बेबी के शरीर में ब्लड फ्लो समेत सभी चीजों को बारीकी से देखा जाता है।

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First published on: 09-12-2022 at 05:40:58 pm
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