आंखों की रोशनी कम होना एक ऐसी परेशानी है जो आज हर उम्र के लोगों में देखने को मिल रही है। बच्चों से लेकर युवाओं तक बड़ी संख्या में लोग चश्मे का इस्तेमाल कर रहे हैं। किसी को पास की चीजें साफ दिखाई नहीं देतीं, तो किसी को दूर की चीजें धुंधली नजर आती हैं। वहीं, कुछ लोगों को पास और दूर दोनों जगह देखने में परेशानी होती है। लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर स्क्रीन देखने से आंखों पर तनाव और ड्राई आई जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं, हालांकि हर तरह की नजर की समस्या के लिए सिर्फ स्क्रीन टाइम को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। आंखों से धुंधला दिखना या अचानक रोशनी कम होना केवल सामान्य थकान या चश्मे का नंबर बदलने का संकेत नहीं होता।
सर गंगाराम अस्पताल, नई दिल्ली में सीनियर विट्रियॉरेटिनल कंसल्टेंट, नेत्र विज्ञान विभाग (Ophthalmology) में डॉ. टिंकू बाली राज़दान ने बताया बच्चों और युवाओं में आंखों की रोशनी कम होने का सबसे आम कारण मायोपिया (Myopia) यानी माइनस नंबर है। इसमें पास की चीजें साफ दिखाई देती हैं, लेकिन दूर की चीजें धुंधली नजर आती हैं। आजकल बच्चों में मोबाइल, लैपटॉप और दूसरे डिजिटल डिवाइस पर लंबे समय तक पास से काम करने की वजह से मायोपिया के मामले बढ़ रहे हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि आंखों की रोशनी अगर अचानक कम हो जाए तो उसके क्या कारण हैं और आंखों को हेल्दी कैसे रखें।
अचानक नजर कम होना हो सकता है गंभीर संकेत
डॉक्टर टिंकू ने बताया कि अगर नजर अचानक कम हो जाए, तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके पीछे रेटिना में ब्लीडिंग, रेटिना की नस में ब्लॉकेज, ऑप्टिक नर्व में सूजन या दूसरी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। रेटिनल डिटैचमेंट भी अचानक नजर कम होने का एक कारण हो सकता है, जिसमें आंख का पर्दा अपनी जगह से अलग हो जाता है।
बच्चों की आंखों की रोशनी कम होने का कैसे लगाएं पता?
बच्चों में नजर की समस्या का पता लगाने के लिए रिफ्रैक्शन टेस्ट यानी चश्मे का नंबर जांचा जाता है। छोटे बच्चों में, जो मशीन पर ठीक से जांच नहीं करा पाते, मैनुअल तरीके से भी नंबर जांचा जा सकता है। डॉक्टर ने सलाह दी कि स्कूल जाने की उम्र तक बच्चों की आंखों की जांच करा लेनी चाहिए और करीब 3 साल की उम्र में एक बार नंबर की जांच कराना उपयोगी हो सकता है।
उम्र बढ़ने पर मोतियाबिंद कर सकता है नजर धुंधली
बड़ी उम्र में मोतियाबिंद (Cataract) आंखों की रोशनी कम होने का एक प्रमुख कारण है। आमतौर पर यह उम्र बढ़ने के साथ होता है, लेकिन डॉक्टर के अनुसार भारत जैसे देशों में ज्यादा धूप और अल्ट्रावायलेट (UV) किरणों के संपर्क के कारण कम उम्र में भी मोतियाबिंद देखा जा सकता है। 40 और 50 की उम्र में भी इसके मामले सामने आ सकते हैं। इसलिए तेज धूप में UV-protective sunglasses का इस्तेमाल करना आंखों की सुरक्षा में मदद कर सकता है।
डायबिटीज में आंखों के पर्दे को हो सकता है नुकसान
डायबिटीज भी नजर कमजोर होने की एक महत्वपूर्ण वजह है। लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा रहने पर आंख के पीछे मौजूद रेटिना प्रभावित हो सकती है। इसे डायबिटिक रेटिनोपैथी (Diabetic Retinopathy) कहते हैं। इसमें रेटिना में सूजन या ब्लीडिंग हो सकती है और धीरे-धीरे नजर प्रभावित होने लगती है। खास बात यह है कि शुरुआती चरण में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते, इसलिए डायबिटीज वाले लोगों के लिए नियमित आंखों की जांच जरूरी है।
अचानक विजन लॉस में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
अचानक नजर कम होने की स्थिति में इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। खासकर रेटिनल डिटैचमेंट जैसी समस्या में समय पर जांच और उपचार बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। इसके विपरीत मोतियाबिंद में नजर आमतौर पर अचानक नहीं बल्कि धीरे-धीरे कम होती है।
चश्मा लगाने से आंखें और कमजोर होती है क्या?
डॉक्टर टिंकू ने बताया चश्मे को लेकर एक आम मिथक है कि चश्मा लगाने से आंखें और कमजोर हो जाती हैं। डॉक्टर के मुताबिक ऐसा नहीं है। चश्मा लगाने या न लगाने से आंख का नंबर अपने आप नहीं बढ़ता। नंबर मुख्य रूप से आंख के आकार, लंबाई और कॉर्निया के कर्वेचर जैसे कारणों पर निर्भर करता है। चश्मा लगाने से आंख का नंबर खत्म या आंख पूरी तरह ठीक नहीं होती। चश्मा सही दृष्टि देने में मदद करता है। बच्चों में मायोपिया उम्र और आंखों के विकास के साथ बढ़ सकता है। डॉक्टर ने बताया कि कुछ मामलों में मायोपिया की प्रोग्रेशन को धीमा करने के लिए विशेष आई ड्रॉप्स भी इस्तेमाल की जाती हैं, लेकिन इन्हें डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए।
आंखों को हेल्दी रखने के लिए डॉक्टर की सलाह
आंखों के लिए अपनाएं 20-20-20 नियम
लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करने वालों के लिए 20-20-20 Rule मददगार हो सकता है। यानी हर 20 मिनट में करीब 20 सेकंड के लिए लगभग 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें। लगातार पास की स्क्रीन देखने के बजाय बीच-बीच में दूर देखना आंखों को आराम देने में मदद करता है।
आंखों में बार-बार पानी नहीं डालें
आंखों में जलन या थकान होने पर बार-बार पानी से आंखें धोना जरूरी नहीं है। डॉक्टर के मुताबिक इससे कुछ समय के लिए राहत महसूस हो सकती है, लेकिन बार-बार पानी डालने से आंखों की प्राकृतिक नमी प्रभावित हो सकती है। ड्राइनेस की समस्या में डॉक्टर की सलाह से लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स, आर्टिफिशियल टीयर्स इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
क्या आंखों की एक्सरसाइज से चश्मे का नंबर कम हो जाता है?
डॉक्टर के अनुसार ऐसी कोई खास आंखों की एक्सरसाइज नहीं है जो चश्मे का नंबर खत्म कर दे या कमजोर नजर को वापस सामान्य कर दे। हालांकि स्क्रीन पर लगातार पास का काम करने के बजाय बीच-बीच में दूर देखना और 20-20-20 नियम अपनाना आंखों पर पड़ने वाले तनाव को कम करने में मदद कर सकता है।
क्या गाजर खाने से चश्मा उतर जाता है?
सिर्फ गाजर खाने या कोई विशेष विटामिन लेने से चश्मे का नंबर खत्म नहीं होता। डॉक्टर के मुताबिक युवाओं को आंखों की सेहत के लिए अलग से सप्लीमेंट लेने के बजाय विटामिन और मिनरल्स से भरपूर संतुलित डाइट लेनी चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियां और फल नियमित डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। बुजुर्गों में उम्र से जुड़ी रेटिनल समस्याओं के आधार पर डॉक्टर कुछ विशेष सप्लीमेंट्स की सलाह दे सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी डॉक्टर से हुई बातचीत और सामान्य स्वास्थ्य जानकारी पर आधारित है। आंखों की समस्या, धुंधला दिखने या अचानक नजर कम होने पर खुद इलाज न करें और योग्य नेत्र रोग विशेषज्ञ से जांच व सलाह लें।
